UN की रिपोर्ट: दुनिया भर में 12000 बच्चों की मौत का जिम्मेदार हिंसक संघर्ष

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/30 11:24

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बलों द्वारा बच्चों पर हिंसा की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. हिंसक संघर्षो में बच्चों की मौत की संख्या सबसे अधिक साल 2018 में 12000 से ज्यादा रही. 

साल 2017 और 2016 का आंकड़ा कुछ इस तरह रहा:  
2017 में दुनिया भर में हुए सशस्त्र संघर्षों में 10,000 से ज्यादा बच्चे मारे गए या विकलांगता का शिकार हुए. इसके साथ ही कई अन्य बच्चे बलात्कार के शिकार हुए, सशस्त्र सैनिक बनने पर मजबूर किए गए या स्कूल तथा अस्पताल में हुए हमलों की चपेट में आए. संरा की वार्षिक “ चिल्ड्रन एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में बाल अधिकारों के हनन के कुल 21,000 से ज्यादा मामले सामने आए जो उससे पिछले साल (2016) की तुलना में बहुत ज्यादा थे. 

बच्चों के साथ हिंसा में सबसे बड़ी संख्या अफगानिस्तान की: 
इनमें सबसे ज्यादा बच्चे अफगानिस्तान, सीरिया और यमन में हताहत हुए. रिपोर्ट में बताया कि ये मौतें या चोट पहुंचाना बच्चों के खिलाफ होने वाले उन 24,000 से अधिक क्रूर हिंसा में शामिल हैं जिनकी संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है. बच्चों के साथ हिंसा में सबसे बड़ी संख्या अफगानिस्तान की है. पिछले साल अफगानिस्तान में 3062 बच्चे हिंसा में मारे गए. हिंसक घटनाओं में नागरिकों की मौत में 28% बच्चे शामिल हैं.  सीरिया में एयर स्ट्राइक, हवाई बम हमले में 1,854 बच्चों की मौत हुई और यमन में 1,689 बच्चों की जान चली गई. इजरायल और फलस्तीन में जारी संघर्ष के बीच 2018 में बच्चों की मौत की संख्या सबसे अधिक रही. 59 बच्चे इसमें मारे गए और 2,756 बच्चे 2014 से अब तक घायल हो चुके हैं. इसी दौरान 6 इजरायली बच्चे भी हिंसक संघर्ष में घायल हुए.  

हिंसक संघर्षों में बच्चों की मौत की संख्या में बड़ा इजाफा: 
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बच्चों के साथ हिंसा की रिपोर्ट पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा, '2018 में दुनिया भर में बच्चों के साथ जिस तरह की हिंसा हुई है उससे हम बहुत चिंतित हैं. हिंसक संघर्षों में बच्चों को निशाना बनाया जाना व्यथित करनेवाला है. इस साल हिंसक संघर्षों में बच्चों की मौत की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है. यानि की बच्चों पर हो रहे अत्याचार साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं जो की एक बड़ी चिंता का विषय हैं.  

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