गुलाम नबी आजाद का विरोध, मीडिया संयोजक ललन कुमार ने कहा-ऐसे मौकापरस्त नेताओं को तुरंत पार्टी से निकाल दिया जाए

गुलाम नबी आजाद का विरोध, मीडिया संयोजक ललन कुमार ने कहा-ऐसे मौकापरस्त नेताओं को तुरंत पार्टी से निकाल दिया जाए

गुलाम नबी आजाद का विरोध, मीडिया संयोजक ललन कुमार ने कहा-ऐसे मौकापरस्त नेताओं को तुरंत पार्टी से निकाल दिया जाए

लखनऊ: बिहार चुनाव में कांग्रेस की पराजय के बाद पार्टी के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाने वाले वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का पार्टी में ही विरोध शुरू हो गया है. 

ललन कुमार ने कहा- ऐसे मौकापरस्त नेताओं को तुरंत पार्टी से निकाल दिया जाए:
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया संयोजक ललन कुमार ने सोमवार को एक बयान में कहा कि ग़ुलाम नबी आजादजी, उत्तर प्रदेश का प्रभारी रहते हुए आपने कार्यकर्ताओं से बात करना तक ज़रूरी नहीं समझा. आपके मुंह से अब ये सब बातें शोभा नहीं देती. उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी जब जनता के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रही है, उस समय ऐसी बातें करना आपके स्वार्थ को दिखाता है. कांग्रेस नेतृत्व से अनुरोध है कि ऐसे मौकापरस्त नेताओं को तुरंत पार्टी से निकाल दिया जाए. कुमार ने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी के साथ-साथ कांग्रेस के अन्य नेता विकट परिस्थितियों में जब सड़कों पर थे, तब आप कहां थे? कांग्रेस में फाइव-स्टार कल्चर ना कभी था और ना अभी है.

 गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में आमूल चूल परिवर्तन का आह्वान किया थाः
गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद रविवार को कहा कि कांग्रेस के नेता आम लोगों से पूरी तरह से कटे हुए हैं और पार्टी में ‘‘पांच सितारा संस्कृति' घर कर गई है. पार्टी नेताओं को कम से कम चुनावों के दौरान पांच सितारा संस्कृति को छोड़ देना चाहिए. उन्होंने संगठनात्मक ढांचे में आमूल चूल परिवर्तन का आह्वान भी किया. आजाद ने कहा कि ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर तक चुनाव कराकर पार्टी के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की तत्काल जरूरत है. उन्होंने चुनाव में हार के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार नहीं ठहराया बल्कि नेताओं और लोगों के बीच संपर्क नहीं होने की बात कही. आजाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने प्रमुख पदों पर चुनावों और पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की मांग को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अगस्त में पत्र लिखा था.
सोर्स भाषा

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