लखनऊ VIDEO: यूपी की सियासत और ब्राह्मण वोटर्स, सबसे ज्यादा 8 बार मुख्यमंत्री ब्राह्मण जाति के रहे, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: यूपी की सियासत और ब्राह्मण वोटर्स, सबसे ज्यादा 8 बार मुख्यमंत्री ब्राह्मण जाति के रहे, देखिए ये खास रिपोर्ट

लखनऊ: यूपी की सियासत में ब्राह्मण राजनीति का सदैव बोलबाला रहा है. सबसे अधिक 8 बार मुख्यमंत्री इसी जाति के रहे. करीब 12 फीसदी ब्राह्मण वोट यहां की कम से कम 60 से अधिक सीटों पर सीधा प्रभाव रखते है. ब्राह्मण वोट लेने के लिए सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताक़त झोंक दी है. यूपी के इस चुनाव राम और कृष्ण के साथ साथ जय परशुराम का नारा भी गूंज रहा है. 

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोटरों की संख्या करीब 12 फीसदी है. 403 में 60 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां, ब्राह्मण वोटर्स ही निर्णायक की भूमिका में हैं. यहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 20% से भी अधिक है. प्रयागराज समेत चार ऐसे भी विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां ब्राह्मणों की संख्या 40% से भी ज्यादा है. मतलब साफ है, यूपी की सत्ता हासिल करने में ब्राह्मण वोटर्स की अहमियत काफी अहम है

ब्राह्मण वोटर्स की अहमियत काफी अहम:

-उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे ज्यादा आठ बार ब्राह्मण मुख्यमंत्री रहे हैं.
-गोविंद वल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, पं. कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, नारायण दत्त तिवारी और श्रीपति मिश्र ने ये जिम्मेदारी निभाई
-नारायण दत्त तिवारी तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे.
-पांच दिसंबर 1989 को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था और इसके बाद से अब तक कोई भी ब्राह्मण उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बन सका है.

साल 2007 के चुनाव में बसपा ने 63 ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और इनमें 41 ने जीत हासिल की थी. मायावती की सरकार बनी थी. तब उन्होंने नारा दिया था, हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा, विष्णु महेश है. मायावती का ये बड़ा सियासी दांव था और सफल भी हुआ. दलित और ब्राह्मण वोटर्स का कॉम्बिनेशन बना और सभी ने एक होकर बसपा को वोट दिया. 2012 में भाजपा ने सबसे ज्यादा 62 ब्राह्मण उम्मीदवारों को उतारा था, जबकि बसपा ने बसपा 58, सपा ने 38 और कांग्रेस ने 52 ब्राह्मण प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था. तब ब्राह्मण वोटों का बंटवारा हो गया और समाजवादी पार्टी ने यादव-मुस्लिम का गठजोड़ बनाते हुए सत्ता हासिल कर ली. 

 

साल 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के 312 विधायकों में से 58 ब्राह्मण चुने गए थे. इस वक्त प्रदेश में नौ ब्राह्मण मंत्री हैं. प्रो. दिनेश शर्मा को डिप्टी सीएम बनाया गया. इसके अलावा श्रीकांत शर्मा, ब्रजेश पाठक, जितिन प्रसाद, सतीश चंद्र द्विवेदी, डॉ. नीलकंठ तिवारी, रामनरेश अग्निहोत्री, अनिल शर्मा, आनंद स्वरूप शुक्ला समेत नौ ब्राह्मण मंत्री बनाए गए. सत्ताधारी भाजपा में नौ ब्राह्मण मंत्री हैं और 58 ब्राह्मण विधायक हैं. 

उधर समाजवादी पार्टी ने भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित की,बीएसपी से एसपी में आए विधायक विनय शंकर तिवारी टीम बनाकर एसपी के पक्ष में प्रचार में जुट गए है.वहीं बीएसपी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा लगातार ब्राह्मणों के सम्मेलन कर रहे.बीजेपी में अरविंद कुमार शर्मा ने रणनीति बनाने का काम हाथ में लिया है. बहरहाल यूपी का और खासतौर पर पूर्वांचल का ब्राह्मण वोटर किधर जाएगा ये तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन योगी आदित्यनाथ से नाराज ब्राह्मण वोटर्स को रिझाने के लिए बीजेपी ने डैमेज कंट्रोल का.काम शुरु कर दिया है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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