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यूपीएससी की प्रारंभिक सिविल सेवा परीक्षा संपन्न, प्रदेश में 71253 परीक्षार्थी हुए शामिल 

यूपीएससी की प्रारंभिक सिविल सेवा परीक्षा संपन्न, प्रदेश में 71253 परीक्षार्थी हुए शामिल 

जयपुर: यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा आज आयोजित हुई. प्रदेश में आज कुल 171 केंद्रों पर 71253 परीक्षार्थी ने इस परीक्षा को दिया. इस परीक्षा को सफल और शांतिपूर्ण सम्पादित करवाने में प्रशासन की और से विशेष व्यवस्थाएं की गई. लोकोमेटिव व नेत्रहीन के लिए 1 विशेष सेंटर बनाया गया. साथ ही अभ्यर्थी को प्रवेश पत्र के साथ आधिकारिक दस्तावेज दिखाकर ही प्रवेश दिया गया. 

जयपुर में 100 केंद्र:
प्रदेशभर में ये परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से हुई. साथ ही परीक्षा केन्द्रो पर पुलिस, लाइट, सुरक्षा, पानी, जेमर जैसी सभी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया. परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष करवाने के लिए निरीक्षण अधिकारी की पर्याप्त व्यवस्था के साथ रेंडमली चेकिंग की भी व्यवस्था की गई. सिविल सेवा की आज की परीक्षा में कुल 171 केंद्रों पर 71253 परीक्षार्थी शामिल हुए. जयपुर में सौ केंद्रों पर यूपीएससी के प्री आईएएस एग्जाम में पहली पारी में 45209 अभ्यर्थी पंजीकृत थे. जिनमें से पहली पारी में 20512 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी. वहीं दूसरी पारी में पारी में 19944 अभ्यर्थी उपस्थित रहे. पहली पारी में ही 24697 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे. 

पेपर पिछले साल की तुलना में थोड़ा कठिन:
इसके साथ ही गर्मी का असर यहां भी देखने को मिला. जिसके चले कई अभ्यर्थी परीक्षा देने ही नहीं पहुंचे. इस तरह से अजमेर में 26 केंद्रों पर 11200 परीक्षार्थी, जोधपुर में 27 केंद्रों पर 8831 परीक्षार्थी, उदयपुर में 18 केंद्रों पर 6008 परीक्षार्थी के साथ ये परीक्षा समपन्न हुई. परीक्षा देने आये अभर्थियों ने बताया कि पेपर पिछले साल की तुलना में थोड़ा कठिन नज़र आया, लेकिन तैयारी के चलते इन अभ्यर्थियों ने पुरे मन के साथ ये परीक्षा दी. 
 

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जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स परवान चढ़ती नजर आ रही है. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी, सुभाष पूनिया, रामलाल शर्मा और निर्मल कुमावत ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है. विधायकों ने इसको लेकर विधानसभा सचिव को पत्र सौंपा है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के भी हस्ताक्षर है. 

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मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को किया गया कोट: 
ऐसे में अब आखिर विशेषाधिकार हनन बनता है या नहीं इस पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. आरोप में मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को कोट किया गया है. इस बारे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कटारिया के कक्ष में एक बड़ी बैठक भी हुई है. 

संयम लोढ़ा ने सतीश पूनिया पर लगाया था विशेषाधिकार हनन का आरोप:
वहीं इससे पहले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया. लोढ़ा ने शिकायत में कहा है कि, सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को वोट के बदले खान, रिको प्लॉट देने और कैश ट्रांजैक्शन से लाभान्वित किया गया है.

21 जून को विधानसभा में दी थी शिकायत:
दरअसल, कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय संयम लोढ़ा ने पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत 21 जून को विधानसभा में दी थी. विधानसभा सचिवालय ने अध्यक्ष के समक्ष फाइल पुटअप किया था. ऐसे में अब दोनों ही मामलों में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. 

क्या है विशेषाधिकार हनन?
देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

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कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुनिल शर्मा रिपोर्ट

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जयपुर: राजधानी जयपुर से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है. मुख्यमंत्री निवास को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. यह धमकी राजस्थान पुलिस के कंट्रोल रूम में मिली है. इसके बाद एहतियात के तौर पर सीएम आवास के आस-पास की सुरक्षा बढ़ा  दी गई है. जैसे ही अधिकारियों को इस धमकी की जानकारी हुई हड़कंप मच गया. 

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जमवारामगढ़ के पापड़ गांव से आरोपी को किया गिरफ्तार: 
वहीं फोन आने के बाद तुरंत एक्शन में आई पुलिस ने जमवारामगढ़ के पापड़ गांव से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. कानोता थाना पुलिस ने पापड़ गांव में दबिश देकर आरोपी को पकड़ा है. अब आरोपी को विधायकपुरी थाना पुलिस के हवाले किया गया है. जानकारी के अनुसार युवक का नाम लोकेश बताया जा रहा है. हालांकि अभी तक युवक द्वारा धमकी देने के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है. 

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सीएम आवास के आस-पास पुलिस की सतर्कता:
पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है युवक का फोन करने के पिछे क्या मकसद था? फोन कॉल की सच्चाई पता चलने तक सीएम आवास के आस-पास पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है. मुख्यमंत्री आवास के साथ अगल-बगल के वीआईपी इलाके में भी नजर रखी जा रही है. 


 

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

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जयपुर: पंचायत चुनावों को लेकर अदालती आदेश ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को उफान पर ला दिया है. पहले से ही पंचायत चुनाव समय पर कराने की सोच रखने वाले डिप्टी सी एम और पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने सक्रियता बढ़ा दी है, वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमे के मंत्री भी है. गांव की राजनीति करने की पसंद रखने वाले पायलट की शायद ये सोच है कि उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहते हुये पंचायत चुनाव भी हो जाये. 

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कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर:
अक्टूबर तक पंचायत चुनाव कराये जाने के सर्वोच्च अदालत के फरमान ने राज्य की कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर ला दिया. डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट पक्ष धर रहे है पंचायत चुनाव सही वक्त पर कराने के लेकिन कोविड के कारण ऐसा नहीं हो पाया था. जाहिर है पायलट कैम्प की सोच है कि पीसीसी अध्यक्ष पद पर काबिज रहते हुये पंचायत ओर निकाय दोनों चुनाव संपन्न हो जाये.

कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे: 
सरपंच, पंच, पटेल, प्रधान और प्रमुख.. कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे है. कांग्रेस पार्टी इन चुनावों को दमखम से साथ लड़ती है. पहला टारगेट होता है विचारधारा आधारित सरपंच और फिर प्रधान और जिला प्रमुख जीते. गांव और किसान की सियासत पर सदैव कांग्रेस का फोकस रहा है. पायलट कैम्प चाहता है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी जल्द ही पंचायतीराज चुनाव को लेकर जिला और पंचायत स्तर पर चुनाव पर्यवेक्षक या प्रभारी की नियुक्ति करेगी. सचिन पायलट कैम्प की गणित .

--- समय पर पंचायत चुनाव हो जाये 
---प्रदेश कांग्रेस की कमान सचिन पायलट के हाथों में रहे
---संगठन चीफ होने से टिकट वितरण में पूरा दखल रहे
----पंचायत चुनाव में जीत का क्रेडिट खाते में आये 
---समर्थक प्रमुख और प्रधान बनाने में मिले कामयाबी
--स्व जातीय वोटों का साथ मिलने का भरोसा 

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गहलोत सरकार में सचिन पायलट के पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमा है. पसंद के मुताबिक पायलट ने ये महकमा चुना था जिससे ग्रामीण राजनीति में धाक कायम रहे. जाहिर है सत्ता में होने के कारण और ग्रामीण इलाकों में पकड़ के कारण पंचायत चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत मिल सकती है.  लिहाजा है जंग है इस विजय का श्रेय लेने की. सब कुछ टिका है पीसीसी के नये भविष्य पर.

... फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

Rajasthan Corona Updates: पिछले 24 घंटे में 9 मौत, 500 नए पॉजिटिव केस, जोधपुर में मिले सर्वाधिक 112 पॉजिटिव मरीज

Rajasthan Corona Updates: पिछले 24 घंटे में 9 मौत, 500 नए पॉजिटिव केस, जोधपुर में मिले सर्वाधिक 112 पॉजिटिव मरीज

जयपुर: राजस्थान में कोरोना वायरस के मरीजों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 24 घंटे में 9 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 500 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. जोधपुर और पाली में 3-3, जयपुर में एक, नागौर में एक,उदयपुर में एक मरीज की मौत हुई. 

जोधपुर में मिले सर्वाधिक 112 कोरोना पॉजिटिव मरीज:
जोधपुर में सर्वाधिक 112 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है. इसके अलावा अजमेर 34, अलवर 21, बारां 3, बाड़मेर 53, भरतपुर 29, भीलवाड़ा 1, बीकानेर 42, चूरू 13, दौसा 11, धौलपुर 6, श्रीगंगानगर 1, जयपुर 48, जालोर 1, झुंझुनूं 8, करौली 7, कोटा 2, नागौर 55, पाली 7, प्रतापगढ़ 1, राजसमंद 3, सीकर 16, सिरोही 7, टोंक से 1, उदयपुर 15 सहित अन्य राज्य के 2 मरीज कोरोना संक्रमित मिले है. प्रदेश में अब तक कोरोना की चपेट में आने से 491 मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं पॉजिटिव मरीजों की संख्या 22 हजार 563 पहुंच गई है.

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए 17 हजार 70 मरीज:
प्रदेश में कुल 17 हजार 70 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं 16 हजार 712 लोग अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए है. प्रदेश में 5002 मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 5 हजार 833 पहुंच गई है.

VIDEO: आबकारी विभाग का स्पेशल ऑपरेशन, अवैध शराब के काले कारोबार पर कसा शिकंजा

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जयपुर: अवैध शराब के काले कारोबार और ओवर रेट माफिया को कुचलने के लिए शुरू किए गए 'स्पेशल ऑपरेशन' में आबकारी विभाग ने कामयाबी तो हासिल की है, लेकिन राजधानी में पुराने ठेकेदारों के काले गठजोड़ को विभाग अभी तक नहीं तोड़ पाया है. विभाग ने शराब तस्करों राज्यबदर करने में काफी हद तक सफलता हासिल कर ली है. अभियान के शुरुआती 2 महीने में रिकॉर्ड कार्रवाई से उत्साहित वित्त विभाग ने अभियान को जारी रखने को कहा है. 

- 25 मार्च से 6 जुलाई तक कार्रवाई
- कुल 35089 दबिश
- अभी तक अभियान में 3625 मामले दर्ज
- अभी तक अभियान में  1078 गिरफ्तार
- अभियान में ओवररेट वसूली के 460 मामले दर्ज

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ओवररेट माफिया पर जोरदार कार्रवाई:
पिछले कई वर्षों से शराब तस्करों ने शाहजहांपुर से जयपुर-उदयपुर होते हुए गुजरात में शराब सप्लाई का बड़ा सिंडीकेट बना लिया है. प्रदेश में जहां विभिन्न जिलों में अवैध शराब और ओवररेट माफिया पर जोरदार कार्रवाई की जा रही है वहीं राजधानी जयपुर में आबकारी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है. राजधानी में न तो ओवर रेट पर नियंत्रण हो रहा और ना ही पुराना ठेकेदारों द्वारा रचा गया लोकेशन का जाल ही विभाग तोड़ पाया। राजस्थान को ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. विभाग को मिल रही लगातार शिकायतों के बाद  वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने खुद  एफएसआर डॉ पृथ्वी के साथ मिलकर इस सिंडिकेट को  तोड़ने का बीड़ा उठाया। आबकारी आयुक्त रहे बीसी मलिक और अब डॉक्टर जोगाराम तस्करी के तिलिस्म को तोड़ने के लिए 'स्पेशल आपॅरेशन' चला रहे हैं. 25 मार्च से शुरू किए गए अभियान में 6 जुलाई तक प्रदेश में रोजाना औसतन 350 स्थानों दबिश दी गई तो 44 मामले रोजाना दर्ज भी किए गए. कार्रवाई इतनी ठोस की जाती रही कि रोजाना औसतन 29 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया. प्रदेश के भीतर शराब ठेकेदारों में पनप रहे ओवर रेट माफिया को भी कुचलने के प्रयास किए जा रहे हैं और रोजाना ओवर रेट के औसतन 8 मामले दर्ज किए गए. प्रदेश में करीब 1900 गांवों और कस्बों का चयन कर उन्हें ए, बी, सी श्रेणी में बांटा गया और ताबड़तोड कार्रवाई कर शराब माफिया को संभलने का मौका ही नहीं दिया.

ऑपरेशन के दौरान जब्ती
-देशी मदिरा 22, 576 बोतल
-अंग्रेजी शराब 42, 385 बोतल
-बीयर 8960  बोतल
-हथकड़ 29222 बोतल
-वाश 17.19 लाख लीटर
-जब्त वाहन 190
-नष्ट भट्टी 1396
-भांग 15 किलो
-डोडापोस्त 59 किलो
-नकली शराब की फैक्ट्री 3

शराब तस्करों पर लॉकडाउन में बड़ी कार्रवाई:
इस ऑपरेशन को शराब तस्करों पर लॉकडाउन में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. शराब तस्करों पर सिलसिलेवार कार्रवाई से उनके प्रदेश से पैर उखड़ते दिखाई दे रहे हैं. बेहतर हो आबकारी विभाग राजधानी जयपुर में भी अवैध शराब वह ओवर रेट माफिया पर ठोस कार्रवाई कर पाए. विभाग में पनप रहे भ्रष्टाचार  को खत्म करने के लिए खुद एसीएस निरंजन आर्य ने अभियान की सफलता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए मॉनिटरिंग की कमान संभाल रखी है. वॉट्स एप ग्रुप बनाए गए, हर कार्रवाई की फोटो और वीडियो मंगाए गए। कोताही बरतने वालों को चार्जशीट दी गई और खुद मौके पर पहुंच कर अच्छा कार्य करने वालों की पीठ भी थपथपाई. आबकारी अभियान की सफलता से कहा जा सकता है कि टीम ने अभियान में जोरदार कामयाबी हासिल की है अब इस स्प्रिट को बरकरार रखने की जरूरत है. 

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राज्य के आईटी विभाग में वीडियो वॉल खरीद में फर्जीवाड़े का मामला: एसीबी महानिदेशक सहित 8 को हाईकोर्ट का नोटिस

राज्य के आईटी विभाग में वीडियो वॉल खरीद में फर्जीवाड़े का मामला: एसीबी महानिदेशक सहित 8 को हाईकोर्ट का नोटिस

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के आईटी विभाग के तहत राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड में वीडियो वॉल की खरीद में हुए फर्ज़ीवाड़े के मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित 8 अधिकारियो को नोटिस जारी किये है.मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये है.याचिका में मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कि गयी है. पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी और डॉ टी एन शर्मा ने अदालत को बताया कि वर्ष 2016-17 में राज्य के आईटी विभाग में करीब 100 करोड़ रूपये खर्च कर 300 वीडियो वॉल खरीद की गई थी. याचिका में कहा गया कि एक ही दिन मे दो अलग अलग कंपनियों से अलग अलग दरों पर सामान खरीदा गया. समय पर भुगतान नहीं करने पर भी कंपनियों पर जुर्माना नहीं लगाया और निजी कंपनियों को करीब 2.5 करोड़  रुपए का फायदा पहुंचाया. यही नही सभी सामान की तीन साल की गारंटी होने के बावजूद करोडों रुपए मेंटिनेस के नाम पर खर्च किए गये. 

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ना बिजली ना इंटरनेट लगा दी वीडियो वॉल:
याचिका में फर्जीवााड़े की जानकारी देते हुए अदालत को बताया गया कि विभाग ने ऐसी जगह पर भी 18 वीडियो वॉल लगा दी गई. जहां पर बिजली का कनेक्शन एवं इंटरनेट सुविधा नही थी इस प्रकार पांच करोड़ रुपए का सरकारी खजाने को नुकसान पहंचाकर निजी कम्पनियों को लाभ पहुंचाया गया. याचिका में कहा गया कि कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस खरीद को लेकर विपरित टिप्पणी की है.

नोटिस जारी कर चार सप्ताह में किया जबाब तलब:
सभी तथ्यों के साथ संस्था की ओर से एसीबी में शिकायत की गई, लेकिन बार बार प्रतिवेदन के बाद भी कोई कार्यवाही नही कि गयी.मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति की खण्डपीठ ने संस्था की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक, के बाद भ्रस्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक, राज़कॉम्प के पूर्व तकनीकी निदेशक उदय शंकर, संयुक्त निदेशक विजय प्रकाश, उप निदेशक वेद प्रकाश, वित्त अधिकारी कौशल सुरेश गुप्ता सहित आठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में  जबाब तलब किया है.

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जयपुर: सूबे के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल के कोरोना फ्री होने के बाद अब संक्रमित मरीजों को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के आरयूएचएस हॉस्पिटल में रखा जा रहा है.सरकार ने आरयूएचएस को कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल घोषित किया है, जहां ओपीडी से लेकर आईपीडी तक की सेवाएं चल रही है.

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कोरोना के खिलाफ जंग:
फिलहाल 170 से अधिक कोरोना पॉजिटिव मरीज अस्पताल में ट्रिटमेंट ले रहे है.आइए हम आपको दिखाते है कि कोरोना मरीजों को डेडिकेटेड अस्पताल में कैसे रखा जा रहा है, साथ ही कोरोना के खिलाफ जंग लड रहे वॉरियर्स किस परिस्थिति में पिछले चार माह से जिन्दगी और मौत की जंग लड रहे है.

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कोरोना मरीजों के लिए आरयूएचएस बड़ी उम्मीद 

-आरयूएचएस हॉस्पिटल में मरीजों के लिए विशेष इंतजाम

-मुख्य बिल्डिंग में छह फ्लोर पर रखे जा रहे कोरोना मरीज

-हर फ्लोर पर सुरक्षा से लेकर ट्रीटमेंट के लिए स्टॉफ तैनात

-परिजनों को भी साथ रहने के लिए उपलब्ध कराई जा रही पीपीई किट

-हालांकि, इस दौरान कोरोना वॉरियर्स को ट्रिटमेंट में बड़ी चुनौती

-भीषण गर्मी में आठ-आठ घंटे पीपीई किट पहनकर दे रहे ट्रीटमेंट

-फर्स्ट इंडिया की टीम ने कोरोना हॉस्पिटल पहुंचकर देखी व्यवस्थाए

बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच राजस्थान हाईकोर्ट में कल अहम बैठक, फिर से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए सुनवाई पर किया जा सकता है विचार

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जयपुर: देश और प्रदेश में बढते कोरोना संक्रमण के बीच अब राजस्थान हाईकोर्ट भी संक्रमण की जद में आ गया है.जोधपुर हाईकोर्ट में एक वरिष्ठ न्यायाधीश के निजी सचिव के कोरोना पॉजिटीव पाये जाने के बाद जोधपुर हाईकोर्ट में सुनवाई स्थगित कर दी गई है.बुधवार देर शाम मिली रिपोर्ट के बावजूद गुरूवार सुबह हाईकोर्ट खोला गया.लेकिन न्यायालय समय शुरू होने के साथ जोधपुर हाईकोर्ट के अधिकांश न्यायाधिशों ने कार्य स्थगित करने के पक्ष में होने के चलते तत्काल हाईकोर्ट बिल्डिंग को बंद किया गया.जोधपुर के चिकित्सा अधिकारियों से बातचीत के बाद कोर्ट को खाली कराते हुए कोर्ट स्टॉफ, अधिवक्ताओं से लेकर जजों को भी पुन: घरों के लिए रवाना किया गया.आनन फानन में रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी किये गये आदेश में न्यायिक कार्य स्थगित किया गया.इसके बाद दोपहर में मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति ने जोधपुर हाईकोर्ट के जजो से वीसी के जरिए हालात पर चर्चा की गई.

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शुक्रवार को होगी अहम बैठक:
जोधपुर हाईकोर्ट के साथ ही प्रदेश की कई अदालतों में कोरोना संक्रमित पाये जाने के चलते अब अदालतों को चालू रखने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन नए सिरे से विचार कर सकता है.अधिवक्ताओं के साथ ही न्यायिक अधिकारी भी बढते संक्रमण से डर के साये में है ऐसे में शुक्रवार दोपहर 2 बजे मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति की अध्यक्षता में बैठक बुलायी गयी है.बैठक में जोधपुर-जयपुर हाईकोर्ट के अधिकांश न्यायाधीश भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए मौजुद रहेगे. वही राज्य के महाधिवक्ता एम एस सिंघवी, एडिशनल सॉलिस्टर जनरल आर डी रस्तेगी, राजस्थान बार काउंसिल चैयरमेन शाहीद हसन के साथ ही दोनों हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष शामिल होंगे.माना जा रहा है कि प्रदेश में बढते कोरोना संक्रमण के चलते अदालतों में फिर से वीडियो कॉन्फ्रसिग के जरिए सुनवाई करने पर विचार किया जा सकता है.

एएसजी सहित सीनियर एडवोकेट जताते रहे है आपत्ति:
राजस्थान हाईकोर्ट देश का एकमात्र हाईकोर्ट है जहां पर निरंतर मामलो की सुनवाई कि जा रही है.कोरेाना काल में लॉकडाउन से लेकर लॉकडाउन खुलने के बाद भी लगातार वीडियो कॉलिंग के जरिए सुनवाई कि जाती रही है.वही 29 जून से हाईकोर्ट सहित अधिनस्थ अदालतों में रेगुलर सुनवाई भी शुरू कर दी गयी है.रेगुलर केार्ट को लेकर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने खुलकर इसका समर्थन किया.वहीं राज्य के एडीशनल सॉलिस्टर जनरल के साथ एक दर्जन वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आपत्ति भी जतायी.एडिशनल सॉलिस्टर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर रेगुलर कोर्ट खोलने पर आपत्ति जतायी थी.यहां तक एएसजी अदालते खुलने के बाद से ही वीडियो कॉप्फ्रेंसिंग के जरिए ही पैरवी कर रहे है.इसके चलते हाईकोर्ट द्वारा आयोजित हुई पिछली बैठकों में भी वे शामिल नही रहे है.

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