जयपुर VIDEO: रेलवे के अधूरे प्रोजेक्ट्स होंगे पूरे, अब रेलवे प्रोजेक्ट्स को गति देंगे सीपीएम, देखिए खास रिपोर्ट

VIDEO: रेलवे के अधूरे प्रोजेक्ट्स होंगे पूरे, अब रेलवे प्रोजेक्ट्स को गति देंगे सीपीएम, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुर: रेलवे बोर्ड ने राजस्थान सहित देशभर में चल रहे करीब 100 प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने के लिए एक नया बदलाव किया है. अब जोनल रेलवेज में प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर स्तर के अधिकारी लगाए जाएंगे. इन अधिकारियों की जिम्मेदारी ही नई रेल लाइन डालने, दोहरीकरण और आमान परिवर्तन के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की रहेगी. 

करीब रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल लाइन के प्रोजेक्ट की घोषणा एक दशक से भी पहले हुई थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका है. बांसवाड़ा, डूंगरपुर के लोगों की ही तरह टोंक के निवासियों का भी रेल का सपना अभी पूरा नहीं हो सका है. रेलवे के ऐसे ही बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए रेलवे बोर्ड ने चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर यानी सीपीएम लगाने की शुरुआत की है. अब जोनल रेलवेज में नई रेल लाइन, आमान परिवर्तन (जीसी), दोहरीकरण जैसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स को समय से पूरा करने के लिए सीपीएम तैनात किए जाएंगे. ये सभी विभिन्न तकनीकी सेवाओं के एसएजी ग्रेड के अधिकारी होंगे. जो स्थानीय रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) को समय-समय पर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी जानकारियां देंगे. यानी अब वर्तमान और भविष्य के सभी प्रोजेक्ट्स के लिए अलग से सीपीएम नियुक्त किए जाएंगे. राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर मंडलों में यात्री सुविधाओं से जुड़े फिलहाल 8 बड़े प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं. जो पिछले लंबे समय से तकनीकी कारणों के चलते धीमी गति से चल रहे हैं. लेकिन अब उन्हें जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा. हालांकि सीपीएम किस प्रोजेक्ट में तैनात किया जाएगा, ये सीएओ-सी ही निर्णय लेंगे. 

इन प्रोजेक्ट्स के जल्द पूरा होने की बढ़ी उम्मीद

- दौसा-गंगापुर सिटी (92 किमी), डीडवाना-पिपलाई (34.47किमी) नई लाइन

- गुढ़ा-मिथरी (59 किमी) डेडीकेटेड आरडीएसओ टेस्ट ट्रैक

- खारवा-चंदा जैसलमेर आमान परिवर्तन (36.99 किमी)

- फुलेरा-डेगाना (108.75 किमी), कुचामन सिटी-नावा सिटी (16 किमी)

- नावा सिटी-फुलेरा (35 किमी), डेगाना-राई का बाग (145 किमी)

- खारिया खंगार-पीपार रोड (31 किमी), पीपार रोड़-राई का बाग (46 किमी) डबलिंग प्रोजेक्ट लंबित

- सीपीएम की नियुक्ति के बाद इन प्रोजेक्ट्स के जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद

केन्द्र सरकार ने राजस्थान में नई रेल लाइन, दोहरीकरण और आमान परिवर्तन के लिए पिछले 25 सालों में कई छोटी-बड़ी घोषणाएं की. जिनमें से कुछ को मंजूरी तो कुछ को बजट भी दिया. लेकिन इतने सालों बाद भी राजस्थान से जुडे 5 रेलवे प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार की फाइलों में ही पूरे किए जा रहे हैं. लाखों लोग सालों से उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन कोई ना कोई वजह से इन्हें आज तक पूरा नहीं किया जा सका. इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स को रेलवे और राज्य सरकार की सहभागिता से पूरा करना था. लेकिन केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारें होने की वजह से इन्हें पूरा करना तो दूर कुछ प्रोजेक्ट्स को तो शुरू भी नहीं किया जा सका है. 

ये 5 बड़े प्रोजेक्ट चल रहे केवल कागजों में

- डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन प्रोजेक्ट : वर्ष 2011-12 में स्वीकृत, 50 करोड़ खर्च और काम सिर्फ 15 प्रतिशत

- पुष्कर-मेडता रेल लाइन प्रोजेक्ट : वर्ष 2013-2014 में स्वीकृत, अभी तो काम ही शुरू नहीं हुआ

- अजमेर-सवाईमाधोपुर वाया टोंक : वर्ष 2015-16 में स्वीकृत, महज एक घोषणा, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ

- अजमेर-कोटा वाया जालंधरी : वर्ष 2013-14 में स्वीकृति, लेकिन अभी तक एक इंच लाइन नहीं डली

- दौसा-गंगापुर सिटी : वर्ष 1995-96 में स्वीकृति, करीब 25 साल में 92 किमी के इस प्रोजेक्ट में 70 फीसदी ही काम हुआ

केंद्र सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में तीन नई रेल लाईन की घोषणा की गई थी. जिसमें जैसलमेर-भाभर (339 किमी) अनुमानित लागत 5000 करोड, परबतसर-किशनगढ़ (45 किमी) अनुमानित लागत 900 करोड और भिवानी-लोहारू (64 किमी) अनुमानित लागत 1280 करोड शामिल हैं. ये तीनों रेल लाईन पीपीपी मोड के तहत स्वीकृत की गई है, लेकिन अभी राजस्थान सरकार से किए जाने वाले एमओयू की शर्तें तय नहीं हुई हैं. वहीं राज्य सरकार ने भी इसमें कोई रुचि नहीं ली. इन परियोजनाओं का भविष्य क्या होगा? यह अभी स्पष्ट नहीं है. कुलमिलाकर रेलवे की इस नई कवायद से उम्मीद की जानी चाहिए कि रेलवे के वर्षों से अटके प्रोजेक्ट्स को शायद कुछ गति मिल सकेगी.

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