राजसमंद में मनाया जाता है अनोखा रक्षाबंधन, गांव की बेटियां पेड़ पौधों को बांधती है राखी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/15 12:20

राजसमंद: देशभर में जहां एक और स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं आज रक्षाबंधन का त्यौहार भी धूमधाम से मनाया जा रहा है. वैसे इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है, लेकिन राजसमंद जिले में अनोखा रक्षाबंधन मनाया जाता है. राजसमंद जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर स्थित है, निर्मल ग्राम पंचायत पिपलांत्री, जहां गांव ही नहीं आसपास की गांव की बेटियां पेड़ पौधों को राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मनाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं. 

पर्यावरण संरक्षण का संदेश:
जहां एक ओर पूरे विश्व पर ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मंडरा रहा है और इसको लेकर जहां विश्व विरासत चिंता में है, तो वहीं राजस्थान के राजसमंद जिले का एक छोटा सा गांव आदर्श ग्राम पिपलांत्री की बेटियां पेड़ लगा कर और उस पर राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है. यह परंपरा 15 वर्ष पूर्व उस समय के सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल के सोच का नतीजा है कि आज इस परंपरा ने जन-जन को पर्यावरण के मुरीद बना दिया है. 

बंजर से बना हराभरा:
2006 मे जब श्याम सुंदर पालीवाल सरपंच बने, तब यह गांव ऐसा नहीं था. चारों तरफ मार्बल खदानों से गिरा पिपलांत्री गांव बंजर था, लेकिन सरपंच श्याम सुंदर का पर्यावरण के प्रति लगाव पिपलांत्री गांव को बंजर से हरा भरा कर दिया. गांव में बेटी हो या बेटा उनके पैदा होने पर 111 पौधे लगाए जाते हैं. जब तक वह पौधा बड़ा नहीं हो जाता उसकी देखरेख वह परिवार करता है और फिर रक्षाबंधन पर्व से एक दिन पहले यहां की बेटियां उन्हीं पेड़ पौधों को राखी बांध कर रक्षा का संकल्प लेती है.

ढोल नगाड़ों के साथ बांधा जाता है रक्षासूत्र:
इस दिन सुबह से ही गांव की बेटियां सज धज कर तैयार होती हैं. एक थाली में कुमकुम, चावल, रक्षा सूत्र के साथ एक नारियल लेकर वहां पहुंचती है और पेड़ को रक्षा सूत्र बांधती हैं. 15 सालों से चली आ रही इस परंपरा ने अब बड़ा रूप ले लिया है. दूर-दूर से बेटियां ढोल नगाड़ों के साथ पेड़ पौधों को रक्षा सूत्र बांधने के लिए यहां पहुंचती है. गांव की बेटियों ने बताया कि जिस तरह से विश्व पर प्राकृतिक आपदा मंडरा रहा है. कहीं ना कहीं यह मॉडल पर्यावरण को बचाने को लेकर सार्थक कदम है. देश ही नहीं विश्व को भी इस मॉडल को अपनाना चाहिए, जिससे एक बार फिर पर्यावरण को संतुलित किया जा सके. 
 

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