मिशिगन यूनिवर्सिटी का दावा: वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमित होने वाले लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र है कमजोर

मिशिगन यूनिवर्सिटी का दावा: वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमित होने वाले लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र है कमजोर

मिशिगन यूनिवर्सिटी का दावा: वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमित होने वाले लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र है कमजोर

ऐन आर्बर: अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन और रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने 12-13 अगस्त, 2021 को आधिकारिक तौर पर सिफारिश की कि मध्यम एवं गंभीर रूप से कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को कोविड-19 टीके की तीसरी खुराक लेनी चाहिए. इन केंद्रों के यह सिफारिश करने के पीछे कारण है टीकाकरण करवा चुके कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों के अस्पतालों में भर्ती होने की दर अधिक होना. जुलाई 2021 तक, कोविड-19 के कारण अस्पतालों में भर्ती लोगों में से करीब आधे लोग वे थे जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम थी जबकि अमेरिका के वयस्क लोगों की आबादी में ऐसे लोगों की संख्या महज 2.7% है. टीकाकरण के बावजूद संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों में से ऐसे लोगों की संख्या 1% से भी कम है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है.

लेखक फिजिशियन साइंटिस्ट हैं जिन्हें कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण के मामलों में विशेषज्ञता प्राप्त है. उनके मुताबिक कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों की कोविड-19 से रक्षा में टीके की तीसरी खुराक मददगार हो सकती है. 

कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र का क्या अर्थ है?
प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने का कारण कोई रोग और चिकित्सा उपचार मसलन कैंसर, ऑटोइम्युन रोग, एचआईवी, अंग प्रतिरोपण के बाद ली जाने वाली दवाएं, गुर्दा रोग आदि हो सकते हैं. इसमें संक्रमणों के प्रति शरीर की रक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है. कोविड-19 की चपेट में आने से बचाने में प्रतिरक्षा प्रणाली के दो हिस्से- टी कोशिकाएं और बी कोशिकाएं विशेष महत्व रखती हैं. बी कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाती हैं जो वायरस को निष्प्रभावी करती हैं. टी कोशिकाएं वायरस से प्रभावित कोशिकाओं को खत्म करती हैं और संक्रमण को और फैलने से रोकती हैं. लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाली विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां इन महत्वपूर्ण कोशिकाओं की प्रभावशीलता को कम करती हैं.

कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों के लिए कोविड घातक:
ऐसे में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को अच्छी प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों की तुलना में अलग टीकाकरण दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ता है ताकि उनकी संक्रमण से अच्छी तरह से रक्षा हो सके. बोन मैरो प्रतिरोपण या अंग प्रतिरोपण वाले लोगों का हैपिटाइटिस-बी जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए बार-बार टीकाकरण किया जाता है. कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों के लिए कोविड-19 खासतौर से घातक है. वैश्विक महामारी की शुरुआत में अध्ययनकर्ताओं ने ऐसे लोगों में संक्रमण विशेषतौर पर गंभीर और दीर्घकालिक पाया. उनके द्वारा वायरस संक्रमण फैलने का जोखिम भी अधिक पाया गया.

टीके की दोनो खुराकें कमजोर प्रतिरक्षा तंत्रा वालों का नहीं करती बचाव:
कोविड-19 रोधी टीकों के ट्रायल में शुरुआत में कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया था लेकिन बाद में अध्ययनों में पता चला कि एमआरएनए टीके की दो खुराकें ऐसे लोगों का कोविड-19 से मजबूती से बचाव नहीं कर पाती जितना कि सामान्य लोगों का करती हैं. खासकर अंग प्रतिरोपण वाले मरीजों में टीकाकरण के बाद एंटीबॉडी भी कम बनना पाया गया. 

इसमें हैरानी की बात नहीं क्योंकि अंग प्रतिरोपण के लिए जिन दवाओं का इस्तेमाल होता है वे रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती हैं, एंटीबॉडी बनने से रोकती हैं ताकि शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र नए अंग को अस्वीकार न कर दे. हालांकि अंग प्रतिरोपण वाले लोगों पर किए गए शुरुआती ट्रायल में पाया गया कि टीके की अतिरिक्त खुराक उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है.
 

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