राजनीति में फंसे हनुमान, पहले दलित फिर आर्य और अब बने मुसलमान!

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/20 05:29

लखनऊ। राजनीति भी बड़ी अजीब है किसी से कुछ भी करवाने को मजबूर कर देती है। कल आपको गाली देने वाला आज आपका दोस्त हो सकता है। अब देखिए ना हिंदुओं की आस्था के प्रतीक वीर हनुमान को इस धरा से गए ज़माना बीत गया लेकिन लोगों के बीच उनमें भक्ति और आस्था है और इसी आस्था को मक्खन बनाकर खा रहे हैं राजनेता। अब तो भगवान की भी जातियां होने लगी हैं। पहले उत्तरप्रदेश से बीजेपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,फिर बागपत से बीजेपी सांसद और केंद्रीयमंत्री सत्यपाल सिंह और अब उत्तरप्रदेश बीजेपी एमएलसी बुक्कल नवाब ने भगवान हनुमान की जातियां तय कर दी। लेकिन ये तो खुद हनुमान ही बता सकते हैं कि वो किस जाती से थे। ख़ैर अब तो लगता है हिंदुओं और भगवान का ठेका सारा बीजेपी के नेता और मंत्रियों ने ले रखा है तभी तो गाए बगाए कुछ भी बक देते हैं।

बीजेपी एमएलसी बुक्कल नवाब ने कहा कि हमारा मानना है कि हनुमान जी मुसलमान थे इसलिए मुसलमानों को जो नाम होते हैं रेहमान, रमजान वो करीब-करीब उन्ही पर रखे जाते हैं।

इससे पहले मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा, 'भगवान राम और हनुमान जी के युग में, इस देश में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी। कोई दलित, वंचित और शोषित नहीं था। वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस को आप अगर पढ़ेंगे तो आपको मालूम चलेगा कि उस समय जाति व्यवस्था नहीं थी। हनुमान जी आर्य थे। इस बात को मैंने स्पष्ट किया है, उस समय आर्य थे और हनुमान जी उस आर्य जाति के महापुरुष थे।'

बता दें कि नंद कुमार साय ने कहा था, 'आदिवासियों में हनुमान गोत्र होता है। ठीक उसी तरह रीछ और गिद्दा गोत्र भी होता है। यहां तक कि आदिवासी तिग्गा गोत्र भी लिखते हैं। टिग्गा का मतलब होता है वानर या बंदर। यहां कई आदिवासी समुदाय हैं जिनके अलग-अलग गोत्र होते हैं। जब भगवान राम लंका पर हमला करने गए थे तब उनकी वानरों के सेना में दो वानर गरुण और रीछ भी थे। इनमें हनुमान भी शामिल थे। इसलिए वह दलित नहीं थे।' 

वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अलवर के मालाखेड़ा में कहा था, 'बजरंग बली ऐसे लोकदेवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं दलित हैं वंचित हैं।' इससे नाराज ब्राह्मण समाज ने नोटिस में कहा है कि हनुमान भगवान हैं। उन्हें वंचित और लोकदेवता बताना न केवल उनका, बल्कि लाखों हनुमान भक्तों का अपमान है।
 

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