मथुरा Uttar Pradesh: मथुरा में पैर पसार रहा जानलेवा बुखार, 3 और बच्चों को तेज बुखार के कारण गवानी पड़ी जान

Uttar Pradesh: मथुरा में पैर पसार रहा जानलेवा बुखार, 3 और बच्चों को तेज बुखार के कारण गवानी पड़ी जान

Uttar Pradesh: मथुरा में पैर पसार रहा जानलेवा बुखार,  3 और बच्चों को तेज बुखार के कारण गवानी पड़ी जान

मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में फैला जानलेवा बुखार दिनों-दिन और अधिक खतरनाक होता जा रहा है. बीते दो दिन में डेंगू और बुखार से एक किशोर और दो बच्चों की मौत हो गई. इनमें छह माह का बच्चा भी शामिल है. इससे पूर्व फरह क्षेत्र के कोह व गोवर्धन के जचौंदा गांव में बुखार से कई बच्चों की मौत हो चुकी है. 

बुखार से पीड़ित बच्चें ने रास्तें में तोड़ा दम:
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जनपद के मांट क्षेत्र के टैंटीगांव निवासी मुकेश के छह माह के बेटे लव को बीते तीन दिन से बुखार आ रहा था. परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ. गुरुवार को बच्चे ने दम तोड़ दिया. उन्होंने बताया कि सुरीर के गांव लोहई में राजन के आठ वर्षीय पुत्र रोहित को मंगलवार की रात अचानक बुखार और पेट में दर्द हुआ.  परिजन इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के लिए निकले लेकिन रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई. इसी प्रकार, लोहई निवासी पिंकी के 15 वर्षीय पुत्र राजकुमार ने बुधवार को डेंगू से दम तोड़ दिया.  स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांवों में सर्वेक्षण शुरू कराकर बुखार पीड़ितों के नमूने एकत्र किए हैं. 

गांवो में चलाया जा रहा जागरूकता अभियान:
नौहझील सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. शशिरंजन का कहना है कि सुरीर व लोहई में टीमें भेजी गई हैं. संचारी रोग नियंत्रण के प्रभारी डॉ. भूदेव ने बताया कि स्वर्ण जयंती अस्पताल, जिला अस्पताल तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरह में मलेरिया व डेंगू के जो मरीज भर्ती हैं उनमें से ज्यादातर की सेहत में सुधार हो रहा है. फरह व छाता क्षेत्र के गांवों में कराए गए सर्वेक्षण में अब तक डेंगू के 327 मामले पाए गए हैं. मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रचना गुप्ता ने बताया कि मलेरिया व डेंगू की बीमारी न फैलने देने के लिए पंचायत विभाग के कर्मचारी गांवों में लार्वा-रोधी छिड़काव, सैनिटाइजेशन व फॉगिंग कर रहे हैं. साथ ही पानी इकट्ठा होने से रोकने व अन्य सावधानियों को लेकर ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि मच्छर न पैदा हो सकें. सोर्स-भाषा
 

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