हम लड़ाकू विमान का इंजन नहीं बना पाए यह देश का दुर्भाग्य - वी.के.सिंह

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/04/28 08:44

जैसलमेर। रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि आज भारत कहां से कहां पहुंच गया लेकिन अपने देश में निर्मित लड़ाकू विमान का इंजन आज तक नहीं बना पाया। उन्होंने कहा कि पहले स्वदेशी लड़ाकू विमान एच.एफ. 24 मारूत विमान के डाटा व ड्रॉईन्ग के दस्तावेज उस समय तत्कालीन सरकार के समय गायब हो गए ये कहां गए, कैसे गए। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि तत्कालीन भारत सरकार के द्वारा इस देशी लड़ाकू विमान के प्रोजेक्ट के बंद करने के बाद फ्रांस के कुछ विशेषज्ञ इस विमान को देखने आए थे तथा इसकी फोटोग्राफी के साथ इस संबंध में जानकारी जुटाई थी और कुछ सालों बाद मिराज 2000 विमान फ्रांस द्वारा लॉन्च किया गया था जो हुबहु एच.एफ 24 जैसा ही था आज दुर्भाग्य हैं कि भारत कहां पहुंच गया, हम अपना लड़ाकू विमान का इंजन नहीं बना पाए। यह हम पर निर्भर करता हैं कि कैसा इंजन बनना चाहिए और किस तरह बनना चाहिए। उन्होंने देशी बोफोर्स गन के भी निर्माण में कई सालों के हुए विलंब में अपनी नाराजगी जाहिर की।

लड़ाकू विमान के प्रोजेक्ट में कई सालों के हुए विलंब  
जैसलमेर आए जनरल वी.के. सिंह ने देश में निर्मित तेजस लड़ाकू विमान के प्रोजेक्ट में कई सालों के हुवे विलंब के संबंध में पूछे गए कहा कि गलती जो है उसमें जो हमारा डीआरडीओ का महकमा है उसके अंदर उनकी जिम्मेदारी काफी होती है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि एक हमारा हिंदुस्तान फाइटर बना था 60 के दशक में 24 मारुत के नाम से बनाया था मारुत डेल्टा विंग था। उस समय उसकी डिजाइन दुनिया में अपने आप में सबसे आगे थी लेकिन जिस उद्योगिक संस्था को उसका इंजन बनाने के लिए कहा वह उसके अनुरूप नहीं बना पाया हम अमेरिका के पास गए और उनसे इसके इंजन बनाने के संबंध में बातचीत की। अमेरिका के विशेषज्ञों को लगा कि इस जहाज का इंजन ठीक रूप से बन गया तो उनके जहाज बिकने बंद हो जाएंगे उन्होंने हमें पावर्ड इंजन दिया जब इस विमान की ट्रायल हुई तो जहाझ में कई तकनीकियां खामियां सामने आई, जहाज जब उड़ान भरता तो अचानक दाहिने मुड़ जाता और क्रैश हो जाता था जिससे हमारे कई पायलट शहीद हो गए जिससे इस सरकार को भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया और जहाज को खड़ा कर दिया। 

उन्होंने आगे बताया कि जब हमारे जहाज के प्रोजेक्ट को बंद करने व जहाज को खड़ा करने की जानकारी फ्रांस को मिली तो फ्रांस के विशेषज्ञ भारत सरकार के पास आए तथा उन्होंने पूछा कि क्या आपके पास इस जहाज का इंजन नहीं है हम भी देखें भारत ने कहा कि इसके अनुरूप हमें नहीं लगता कि कोई इंजन है आप देख सकते हो एक हफ्ते तक उन्होंने उस जहाज पर भी सर्च किया फोटोग्राफी की, जानकारी हासिल की और उसके कुछ साल बाद फ्रांस ने मिराज 2000 लॉन्च किया जो कि एच. एफ मारूत 24 की तरह था आज की तारीख में उस जहाज की ना तो आपके पास डाटा है ना कोई ड्राइंग है वह कहां गई कैसे गई किसी को पता नहीं उस समय कौन सरकार थी वह पता कर लीजिएगा ।

देशी बोफोर्स गन के भी निर्माण में कई सालों से हुआ विलंब  
उन्होंने देशी बोफोर्स गन में हुए विलंब के संबंध में कहा कि जब भारत ने बोफोर्स गन टेक्नोलोजी ट्रांसफर ली थी व उस समय उसके ब्लू प्रिन्ट भी भारत को मिले थे लेकिन 2009 में जब वे ईस्टन कमाण्ड में जी.ओ.सी सी.एन.सी थे उस समय रक्षा राज्य पंत्री पल्लवराजू वहां आए थे तब डी.आर.डी.ओ से बोफोर्स गन की टैक्नोलोजी व ब्लू प्रिन्ट मांगे गए थे तथा इसके निर्माण में हो रही देरी के संबंध में पूछा था तब उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया 2010 में जब वह आर्मी चीफ बने तब उन्होंने यही सवाल पुनः डी.आर.डी.ओ से किया तो उन्होंने कहा कि हमें इसे बनाने के लिये उपर से कोई ऑर्डर नहीं मिला लेकिन फिर बाद में हमने 2011 में 400 बोफोर्स का ऑर्डर दिया। इससे साफ जाहिर हो रहा था कि व्यवस्था में गड़बड़ जरूर है।

राम मंदिर के निर्माण के संबंध में दिया बड़ा बयान   
केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री जनरल वी.के.सिंह ने राम मंदिर के निर्माण के संबंध में बहुत बड़ा बयान देते हुवे कहा कि जिस दिन भगवान राम जी चाहेंगे उस दिन राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा इसमें चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है। पहले भी जिस जगह रामलला जी मूर्तियां स्थापित होनी थी उसी जगह स्थापित हो गई। यह बात उन्होंने जैसलमेर प्रवास के दौरान एक बातचीत में कही। उन्होंने राम मंदिर व जम्मूकश्मीर 370 हटाने का मुद्वा भाजपा के प्रमुख ऐजेन्डा में पहले भी था आज भी लेकिन स्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने पड़ते है। देश में कई वर्ग होते हैं कोई वर्ग यह नहीं सोचे कि यह निर्णय उनके हक में नहीं है। जहां तक 370 की बात हैं इसके लिये दोनों सदनों में बहुमत होना जरूरी हैं और मुद्धा काफी पुराना  हैं इस पर समय आने पर निर्णय कर लिया जाएगा । 

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