जयपुर VIDEO: वी. एस. लिग्नाइट में 83 लाख टन क्ले में घोटाला ! अधिकारियों और कंपनी पर मिलीभगत के आरोप, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: वी. एस. लिग्नाइट में 83 लाख टन क्ले में घोटाला ! अधिकारियों और कंपनी पर मिलीभगत के आरोप, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: बीकानेर के कोलायत में 83 लाख टन क्ले के मामले में खान विभाग के अधिकारियों पर फर्म वीएस लिग्नाइट के साथ मिलीभगत करने के आरोप लग रहे हैं. पूरे प्रकरण में खान विभाग को करीब 70 करोड़ रुपए रॉयल्टी और डीएमएफटी का नुकसान हुआ. यही नहीं खान विभाग की लापरवाही से वीएस लिग्नाइट का 8 वर्ष से असेसमेंट ही नहीं करवाया गया. इसी के कारण वी.एस. लिगनाईट पर विभाग का रॉयल्टी डीएमएफटी, एनएमईटी व टीसीएस मिलाकर मय जुर्माना 8 करोड़ 20 लाख 18 हजार 68 रुपये वर्ष 2020 तक बकाया हो गया था. मगर इस फर्म के दिवालिया घोषित हो जाने के कारण महज मात्र 7 लाख 65 हजार उनतालीस रुपये की वसूली ही की जा सकी.

कोलायत में वीएस. लिग्नाइट पावर लिमिटेड कॉ. 25 मई 2008 से खनिज लिगनाईट निकट ग्राम गुड़ा तहसील कोलायत, जिला बीकानेर में क्षेत्रफल 1241.25 हेक्टेयर का खनन पटटा संविदा पंजीयन की तिथि से 30 वर्ष के लिए स्वीकृत किया गया. खनन पट्टाधारी द्वारा उत्पादित खनिज लिग्नाइट का उपयोग उनके द्वारा स्थापित 135 मेगावाट के पावर प्लांट में किया जाता है. उक्त खनन पट्टे के स्वीकृति आदेश में अंकित विशेष शर्त संख्या 4 में ये उल्लेख किया गया है कि खनिज लिग्नाइट का खनन कार्य करते समय में यदि खनिज क्ले का उत्पादन होता है तो पट्टेधारी इस बात की सूचना राज्य सरकार को देगा तथा बिना खनन लागत के राज्य सरकार के निर्देशानुसार उक्त खनिज क्ले का निस्तारण किया जाएगा. 

इसी सन्दर्भ में निदेशालय के 16 सितंबर 2009 के आदेश से उक्त खनिज के निस्तारण के लिए कमेटी का गठन किया गया जिसमें एसएमई वृत बीकानेर को अध्यक्ष बनाया गया, जबकि 28 अगस्त 2008 को उप सचिव ने पत्र में यह स्पष्ट बताया कि यदि उक्त खनन क्षेत्र में लिगनाईट के उत्खनन के दौरान यदि खनिज क्ले / मुल्तानी मिट्टी का उत्खनन होता है तो उसे ओवर बर्डन से दूर पृथक से डम्प किया जाए. वर्तमान में 83 लाख 57 हजार 800 मैट्रिक टन अलग-अलग ढेरों में क्ले व फेरों जीनियस सैण्डस्टोन (वेस्ट) के रूप में एक साथ डम्प कर दिया गया है. उक्त खनिज हेतु विभाग द्वारा समय-समय पर उक्त क्ले के निस्तारण के लिए 08 नवंबर 2014, 18 नवंबर 2014, 20 जून 2018 एवं 21 जून 2018 को नीलामी की कार्रवाई की गई.

परन्तु हर बार दर सही नहीं होने के चलते बोलीदाता द्वारा भाग नहीं लिया गया. क्योंकि न तो विभाग द्वारा बाजार मूल्य का आकलन कर राशि दर तय की गई न ही वीएस. लिग्नाइट द्वारा उक्त खनिज का भंडार सही प्रकार से किया गया. स्पष्ट प्रतीत होता है वीएस. लिग्नाइट द्वारा जानबूझ कर व लापरवाही के साथ क्ले के साथ सैण्ड स्टोन, फेरा जीनियस सैण्ड स्टोन व येलो ऑकर का भण्डारण कर मिश्रत परतें बना दी गई जिससे खनिज क्ले की गुणवत्ता खराब हुई. ई नीलामी में बोलीदाता के भाग न लेने का कारण है कि पट्टाधारी द्वारा पेड / गुणवत्ता के अनुसार स्टॉक नहीं किया गया है. इस प्रकार उक्त खनन पट्टा धारक द्वारा अपने स्तर पर ही खनिज क्ले का निस्तारण किया जा रहा है. यदि वीएस लिगनाईट में भी विभाग द्वारा विशेष शर्त नहीं रखी जाती तो शायद आज लगभग 83 लाख टन क्ले की हानि नहीं होती और न ही उसकी रॉयल्टी राशि व डीएमएफटी राशि का नुकसान होता जो कि लगभग 70 करोड़ रुपये की राशि का है. 

खान विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि प्रति वर्ष होने वाले खनिज की रॉयल्टी का वार्षिक असेसमेंट वर्ष 2013-14 के पश्चात आज तक नहीं करवाया गया इसी के कारण वीएस लिगनाईट पर विभाग का रॉयल्टी डीएमएफटी, एनएमईटी व टीसीएस मिलाकर मय जुर्माना 8 करोड़ 20 लाख 18 हजार 68 रुपये वर्ष 2020 तक बकाया हो गया था मगर इस फर्म के दिवालिया घोषित हो जाने के कारण महज मात्र 7 लाख 65 हजार उनतालीस रुपये की वसूली ही की जा सकी. यदि समय रहते विभाग जाग जाता तो असेसमेन्ट करवाकर तुरन्त वसूली की कार्रवाई प्रारम्भ कर दी जाती तो शायद विभाग को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानी नहीं होती जबकि प्रधान खनिज रियायत नियमावली 1960 के नियम 27 (5) तथा संविदा के भाग 9 में अनुभाग 2 व 3 में प्रतिभूति राशि व स्थिर भाटक राशि का दोगुना शास्त्री या प्रतिभूति राशि जब्त करते हुए खनन पट्टा खारिज किये जाने का प्रावधान है. 

खान विभाग द्वारा उक्त प्रकरण में सही पैरवी नहीं किये जाने के चलते नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल हैदराबाद द्वारा पारित आदेश दिनांक 16 मार्च 2021 के अनुसार 01 अप्रेल 2014 से 18 सितंबर 2019 तक बकाया राशि 8,20,18068 के एवज में वी.एस. लिगनाईट द्वारा 7,96,144 रुपये जमा होने के पश्चात कोई राशि बकाया नहीं मानी जाएगी. इस आदेश के विरूद्ध अभीतक विभाग द्वारा अभी तक कोई अपील नहीं की गई है. इस प्रकार अधिकारियों द्वारा पहले ही लगभग 8 करोड़ रुपये की हानि विभाग को पहुंचाई जा चुकी है लगता है विभाग वीएस. लिग्नाइट पर पूरी तरह से मेहरबान है, इधर तो निदेशालय लगभग 83 लाख मेट्रीक टन क्ले के निस्तारण के लिए मूल्य 50 रुपये प्रति टन पर बोली लगाने हेतु प्रस्ताव जारी कर चुका है ताकि इस क्ले का निस्तारण किया जा सके व विभाग को रॉयल्टी, डीएमएफटी राशि की वसूली हो सके. 

और दूसरी तरफ उक्त खनन पट्टे धारकों के पट्टे में अंकित शर्त संख्या 4 को समाप्त करते हुए निकलने वाली क्ले को मात्र रॉयल्टी व डी. एम.एफ.टी. राशि के बदले निस्तारण करने की अनुमति प्रदान करने का निर्णय जारी करना औचित्यहीन लगता है क्योकि पूर्व में वी.एस. लिगनाईट को इस बात का ज्ञान था की वह अलग-अलग निकलने वाले क्ले ओवर बर्डन का स्टॉक सही तरीके से अलग-अलग भी करता है तो भी उसे कोई लाभ नहीं होगा क्योकि शर्त संख्या 4 के अनुसार उसे वह क्ले / मुल्तानी मिट्टी बिना खर्चे लागत विभाग को सौंपनी होगी इसी कारण वी. एस. लिग्नाइट ने अपनी लागत कम करते हुए वेस्ट मेटेरियल व क्ले को एक साथ डम्प कर खनिज का नुकसान जानबूझकर किया है जो खनन पट्टे की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है जिससे विभाग को लगभग 100 करोड़ रुपये के राजस्व की हानि स्पष्ट रूप से हुई है इस 100 करोड़ रुपये के नुकसान के जिम्मेदार कौन होंगें ? 

मान भी लिया जाए कि वी. एस. लिग्नाइट को एस.टी.पी. जारी की जाएगी नियम मात्रा के लिए तो भी इस बात की पूर्ण संभावना बनी रहेगी की वी.एस. लिगनाईट एस.टी.पी. लेकर नये निकलने वाले क्ले का ही विक्रय करेगा ना की पुराने पड़े ढेरों से उस स्थिति में विभाग के पास क्या उपाय रहता है इससे बेहतर तो विभाग को आदेश जारी करना था आपने 83 लाख मैट्रिक टन क्ले का हास किया है जिससे विभाग को करोड़ों रुपए की राजस्व प्राप्ति होती. 

इसलिए इस खनिज की लागत व रॉयल्टी राशि आपसे ही वसूल की जावें यह राशि जमा करवाने के पश्चात ही आपकों कोयले की बिक्री का अधिकार दिया जाए. सूत्रों का कहना है कि सिर्फ रॉयल्टी राशि व डी. एम. एफ. टी. राशि के बदले वी. एस. लिग्नाइट को क्ले के विक्रय का अधिकार का आदेश जारी करना विभाग का नुकसान करना है. यदि इस क्ले की ऑनलाइन ई ऑक्सन में बोली लगाई जाए, जिसकी बेस प्राइस 1 रुपए भी रखी जाये तो भी आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते यह बोली करोड़ों रुपए में चली जाएगी, जिससे विभाग को काफी फायदा होगा परंतु विभागीय मिलीभगत के चलते वी. एस. लिग्नाइट को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से क्ले की बिक्री का अधिकार प्रदान किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उक्त प्रकरण की जांच हुई तो मोटे घोटाले की परतें खुल सकती हैं.

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