Vijay Diwas 2020: 1971 के युद्ध के हीरो ने कहा— भारतीय सेना को देखते ही भाग रहे थे पाकिस्तानी सैनिक...

Vijay Diwas 2020: 1971 के युद्ध के हीरो ने कहा— भारतीय सेना को देखते ही भाग रहे थे पाकिस्तानी सैनिक...

Vijay Diwas 2020: 1971 के युद्ध के हीरो ने कहा— भारतीय सेना को देखते ही भाग रहे थे पाकिस्तानी सैनिक...

झुंझुनूं: आज विजय दिवस है. आज ही के दिन 1971 में भारत पाकिस्तान के युद्ध में पाकिस्तानी सेना के करीब 93 हजार सैनिकों ने भारत के सामने आत्म समर्पण किया और बांग्लादेश का उदय था. इस युद्ध में शेखावाटी के 168 जवान शहीद हुए थे. जिनमें से सर्वाधिक 108 जवान झुंझुनूं के थे. लड़ाई में शामिल झुंझुनूं के सैनिकों में से कई सैनिक आज भी उस मंजर को याद करते है तो उनका खून खौल उठता है. ऐसे ही एक रियल हीरो की जुबानी, सुनते है युद्ध की कहानी...

यह लड़ाई भारतीय सेना के पराक्रम की विजयी गाथा है:
ये है झुंझुनूं के मेजर जयरामसिंह. जब जयरामसिंह साढ़े 18 साल के थे और सेना में भर्ती हुए थे. उससे छह महीने बाद ही 1971 का युद्ध हो गया था. जयरामसिंह बताते है कि उस वक्त पूर्वी और पश्चिम पाकिस्तान हुआ करता था. पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेशियों को यातनाएं दी जाती थी. भारतीय सेना ने दखल दी तो युद्ध हुआ और बांग्लादेश का जन्म हुआ. उन्होंने बताया कि उन्होंने पश्चिम पाकिस्तान में रहते हुए 1971 की लड़ाई लड़ी. यह लड़ाई भारतीय सेना के पराक्रम की विजयी गाथा है. उस वक्त एक साथ भारतीय सेना ने ना केवल 93 हजार सैनिकों को आत्म समर्पण करवाया. बल्कि पाकिस्तानी चीफ ने टेबल पर हथियार रखकर आत्म समर्पण भी किया. यह युद्ध उन्हें इसलिए भी याद है. क्योंकि उनके हमनाम का एक साथी उनके साथ पढ़ा था. फौज में भर्ती हुआ था. साथ ही 1971 की लड़ाई में एक जयराम, वे खुद पश्चिम पाकिस्तान में दुश्मनों को जवाब दे रहे थे. तो उनके ही नाम का जयराम पूर्वी पाकिस्तान में दुश्मनों के दांत खट्टे कर रहा था. लेकिन उनका साथी युद्ध में शहीद हो गया.

आज भी युद्ध की याद आती है तो खून खौल उठता है:
मेजर जयरामसिंह ने बताया कि आज भी युद्ध की याद आती है तो खून खौल उठता है. जब उन्होंने 1971 की लड़ाई लड़ी. तब उन्हें फौज में भर्ती हुए मात्र छह महीने ही हुए थे. उन्हें केवल हथियार चलाने और युद्ध की ट्रेनिंग दी जा रही थी. उसी वक्त युद्ध हो गया और उन्हें बॉर्डर पर लड़ने के लिए भेज दिया. लेकिन उन्हें आज भी अच्छी तरह वे 14 राजपुताना राइफल्स बटालियन में थे और जब उन्होंने पाकिस्तान की चौकी पर हमला करने के लिए चढाई की तो पाकिस्तान सेना में भगदड़ मच गई और वे भाग गए कि भारतीय आ गए. युद्ध के दौरान ही पाकिस्तानी सेना में इतना खौफ हो गया था कि भारतीयों की आहट से वे भाग जाते. यही कारण रहा कि उन्होंने आत्म समपर्ण किया.

1971 के युद्ध में देश के करीब 3900 जवान शहीद हुए:
आपको बता दें कि 1971 का युद्ध करीब 13 दिन चला. इस युद्ध में देश के करीब 3900 जवान शहीद हुए. जिनमें सर्वाधिक जवान शेखावाटी के थे. जिनकी संख्या 168 थी. इनमें भी झुंझुनूं के 108, सीकर के 46 तथा चूरू के 12 जवान शामिल थे. शहादत देने वालों में जाबासर के दो भाई भी शामिल थे. सेवानिवृत्त सैनिक करीब खन के दो बेटे ग्रेनेडियर उम्मेद अली खान व राज राइफल्स के जवान हाकम अली मोर्चे पर थे. उम्मेद अली खन राजोरी में दुश्मन से लड़ते हुए शहीद हो गए. उनके भाई हाकम अली शक्करगढ़ क्षेत्र में जख्मी हो गए थे. बाद में वीरगति को प्राप्त हुए.  

और पढ़ें