वाडिया ग्रुप की 15 साल पुरानी एयरलाइंस GoAir अब बनी Go First,  3600 करोड़ रुपये के IPO के दस्तावेज दाखिल किये

 वाडिया ग्रुप की 15 साल पुरानी एयरलाइंस GoAir अब बनी Go First,  3600 करोड़ रुपये के IPO के दस्तावेज दाखिल किये

 वाडिया ग्रुप की 15 साल पुरानी एयरलाइंस GoAir अब बनी Go First,  3600 करोड़ रुपये के IPO के दस्तावेज दाखिल किये

नई दिल्ली: वाडिया ग्रुप (Wadia Group) की 15 साल पुरानी एयरलाइंस (Airlines) GoAir ने रीब्रांडिंग (Rebranding) करने का निर्णय लिया है. देश की जानी-मानी एयरलाइन कम लागत वाली एयरलाइन गो एयर अब Go First में बदल गई है. इसके लिए कंपनी ने 3,600 करोड़ रुपये के आईपीओ के दस्तावेज दाखिल किये है.

ULCC पर एयरलाइंस का फोकस:
देश में कोरोना महामारी की वजह से तमाम सेक्टर के साथ एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इससे उबरने के लिए यह अब लो कॉस्ट बिजनेस मॉडल (Business Model) पर फोकस करेगी. दरअसल गो एयर ULCC (Ultra Low Cost Carrier) पर फोकस कर रही है, जिस वजह इसने ये निर्णय लिया है.

 

पब्लिक इश्यू के जरिये प्राइमरी मार्केट से फंड्स जुटाने की तैयारी में है GoAir: 
13 मई को एयरलाइन ने औपचारिक रूप से एक बयान में कहा कि वह खुद को गो फर्स्ट के रूप में रीब्रांड कर रही है. बता दें कि एयरलाइन ने 2005 में परिचालन शुरू किया और उसके बेड़े में सिर्फ 50 से अधिक विमान हैं, यहां तक ​​कि प्रतिद्वंद्वी इंडिगो (Paragon Indigo) के रूप में जो एक साल बाद शुरू हुआ, आकार में 5 गुना से अधिक है. बता दें कि गोएयर (GoAir) पब्लिक इश्यू (Public Issue) के जरिये प्राइमरी मार्केट (Primary Market) से फंड्स जुटाने की तैयारी में है. रिपोर्ट के मुताबिक, GoAir 2500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए IPO लॉन्च करेगी. सूत्रों ने बताया कि यह IPO सितंबर, 2021 तक लॉन्च हो सकता है, जिसके बाद इसे आप सब्सक्राइब (Subscribe) कर पाएंगे. 

फंड को अपने कर्ज को चुकाने और वर्किंग कैपिटल के उपयोग में लेगी कंपनी:
इस IPO (Initial Public Offering) के लिए कंपनी अप्रैल 2021 के सेकेंड वीक में मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP Draft Red Herring Prospectus) फाइल कर करने की तैयारी में थी. एयरलाइन फिर से एक IPO के लिए फाइल करने की योजना बना रही है रिपोर्ट के मुताबिक, इस IPO के जरिये जुटाये गए फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज को चुकाने और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने में करेगी. आपको बता दें कि मार्च, 2020 तक कंपनी पर 1780 करोड़ रुपये का कर्ज था.


 

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