मनरेगा में बगैर काम किए मिल रही है मजदूरी

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/17 02:29

अजमेर। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करते हो लेकिन प्रदेश में किशनगढ़ ऐसी जगह है जहां हर कार्य की शुरुआत ही भ्रष्टाचार से शुरू होती है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को रोजगार के प्रति गारंटी देने की सरकारी योजना इन दिनों लोगों के लिए चांदी काटने का जरिया बन चुकी है।

मनरेगा में कार्यरत श्रमिकों को बगैर काम के हाजिरी भरने और उन्हें भुगतान कराने की एवज में कथित रूप से मेट बने लोगों की जेबे गरम हो रही है। 1st इंडिया न्यूज की टीम ने इसका खुलासा किशनगढ़ के निकट ग्राम खातोली पंचायत के टुकड़ा गांव में किया जहां मेट महिला हाजरी के नाम पर 500रुपये लेकर पूरे महीने की हाजरी भरते हुए देखी जा रही है। इस महिला मेट के हाथ मे हाजरी का रजिस्टर था और आसपास में मनरेगा में कार्यरत ग्रामीण महिला श्रमिक है। इनमें से अधिकांश महिला श्रमिक ऐसी थी जो ना तो कार्य करती हैं और ना ही मनरेगा के कार्य मे कही उपस्थित होती है।

लेकिन उनका नाम मस्टरोल में होने के कारण उनकी हाजरी भरने का काम मेट का होता है यही से शुरू होता है गौरखधंदे का खेल और पनपती है रिश्वत की नई परंपरा। आश्चर्य की बात यह है कि यह महिला मेट इन महिला श्रमिको को बगैर कार्य के हाजरी देती है। इसकी एवज में प्रति श्रमिक 500रुपये बंधे हुए है जो हर सप्तहा 500 रुपये देती है और पूरे सप्तहा की हाजरी इस महिला मेट के द्वारा भर दी जाती है।
 

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