चारे-पानी के अभाव में रामदेवरा में लगा मृत पशुओं का अंबार, प्रशासन ने नहीं ली सुध

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/16 11:46

रामदेवरा। गत साल मानसून की बेरुखी से बरसात नही होने का दश ग्रामीणों को अकाल के रूप में झेलना पड़ा। वही बिना बरसात के क्षेत्र के खेतों में न फसले हुई न ही कोई चारा हुआ , नही क्षेत्र के जलाशयों में पीने के लिये कोई पानी जमा हुआ।जिसके चलते पशुधन के सामने चारे पानी की विकट समस्या आ खड़ी हुई हैं।

क्षेत्र के लोगो ने अपनी प्यास बुझाने के लिये तो पानी का जैसे तैसे प्रबन्ध कर दिया। लेकिन पशुधन के लिये पानी का कोई प्रबन्ध नही होने के कारण पशुधन को बिना चारे-पानी के भटकते हुए दम तोड़ना पड़ा। 

आज हम आपको रूबरू करवा रहे है नाचना क्षेत्र के सत्याया ग्राम पंचायत के सेवड़ा गांव के पास का क्षेत्र। जहा चारे-पानी की किल्लत से एक दो नही दर्जनों पशुओं ने अकाल दम तोड़ दिया है। एक तरफ हम गाय को गौ माता कह कर उसे भारतीय संस्कृति में सबसे महान बताते हैं। वही दूसरी तरफ यही गाये बिना चारे पानी के भटकती हुई दम तोड़ने को मजबूर हैं।

जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारी तक सभी चुनावो के कार्यक्रम में पूरी तरह व्यस्त हैं। लेकिन क्षेत्र के पशुधन की सुध लेने को किसी को फिक्र नही है। जिले में इस वर्ष पड़े अकाल व प्रदेश सरकार के क्षेत्र के कई गांवों में पशु शिविर, चारा डिपो नहीं खोलने से पशुपालकों की हालत खस्ता है। महंगे चारे पर पशुपालक पशुओं को राम भरोसे छोड़ रहे हैं। इस पर गर्मी में बेसहारा पशु चारा- पानी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। कमजोर पशु अब दम तोड़ रहे हैं।

बाजार में 13 से 14 रुपए प्रति किलो सूखा चारा बिकने पर कई पशुपालक अब पशुओं को राम भसोसे छोड़ रहे हैं। इस पर गांवों में बेसहारा पशु चारा-पानी की तलाश में भटक रहे हैं। भूख व प्यास से कमजोर हुए कई पशु अब दम तोड़ रहे हैं। इससे पशुपालक बहुत परेशान है। इनके अनुसार शीघ्र ही पशु शिविर व अनुदान आधारित पशु चारा डिपो नहीं खोले गए तो पशुओं को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

यहाँ चारे के अभाव में प्रतिदिन मर रहा है पशुधन, बेबस पशुपालक:- 

चारे की किल्लत से पशुपालको के ललाट पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी है।एक तो चारे की कमी और ऊपर से गायों में फैलती बीमारियों से प्रतिदिन गाये काल का ग्रास बनती जा रही हैं।
ग्राम पंचायत सत्याया के राजस्व ग्राम सेवडा जो की पशु पालन पर ही पूरी तरह निर्भर हैं। यहां के पशुपालकों की  आजीविका का मूल साधन ही पशुधन है।

प्रशासन द्वारा चुनाव में व्यस्त होने और पशु डिपो और चारा शिविर ना खुलने के कारण प्रतिदिन 3 से 4 गाय या सांड काल का ग्रास बन रहे है।

भादरिया गौशाला नजदीक होने के कारण अधिकतर पशु विचरण और पानी के लिए सेवडा गाँव की और रूख कर देते है और पानी की अधिकता और पानी के अधिक ग्रहण करने व अत्यधिक कमज़ोरी के कारण उठ नही पाती है और उस पशु  की एक दो दिन बाद उसकी म्रत्यु हो जाती हैं।

पशु शिविर आखिर कब खुलेंगे....:

ग्रामीणों को भय सत्ता रहा हैं की जल्द पशु शिविर ना खुले तो क्षेत्र के पूरे पशुधन  पर संकट गहरा सकता है।

ग्रामीण प्रशासन से अपील कर रहे है की जल्द से जल्द पशु शिविर खोले जाए ताकि पशुधन बचाया जा सके ।
-संक्रमणबीमारी फैलने का खतरा..:-
सेवडा गाँव में जिधर भी नज़र घुमा के देखो उधर मृत पशु ही नज़र आ रहे है तथा उनकी बदबू और जानवरों के संपर्क से संक्रमण बीमारिया फैलने का पूरा अंदेशा बना हुआ है। चारे की कमी से गाय उन मृत पशु को खाने की कोशिश करते है तथा एक दो दिन बाद वह पशु भी बीमार हो जाते हैं तथा आखिर में उसको मौत का सामना ही करना पड़ता है।

-मृत पशुओं की सड़ांध से ग्रामीण परेशान:-

सेवडा गाँव में प्रतिदिन 3 से 4 पशुओं के मरने और कुत्तों द्वारा उसे नोचने से गाँव का शुद्ध वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो गया है और हर तरफ़ सड़ांध मारने लगा है तथा ग्रामीणों का चलना दुश्वारहो गया है तथा छोटे बालक भी उस संक्रमण बीमारी का शिकार होने लगे है।

आसानी से नही मिलता चारा:-

चौदह रुपए किलो में चारा- अकाल पर चारा 13 से 14 रुपए प्रतिकिलो भाव मिल रहा है। वह भी आसानी से नहीं मिल रहा है। समझ में नहीं आ रहा कि महंगा चारा खरीदकर पशुओं को पाले अथवा घर चलाएं। भूख व प्यास से पशु कमजोर हुए जा रहे हैं। सरकार पशुओं को बचाने के लिए शिविर, चारा डिपो खोलें।

           रामदेवरा से सवांददाता राजेन्द्र सोनी की रिपोर्ट

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