VIDEO: प्रदेश में पानी के लिए त्राहि त्राहि , 284 बांधों में से 215 बांध लगभग सूखे

Naresh Sharma Published Date 2019/06/11 09:47

जयपुर: भयंकर जल संकट से जूझ रहे राजस्थान में अब अधिकांश बांधों के कंठ भी सूख गए हैं. जयपुर की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध में तो मुश्किल से एक महीने का पानी बचा है. ऐसे में अब पूरी तरह से मानसून पर नजर टिकी हैं. यदि बादल जमकर नहीं बरसे, तो फिर प्रदेश में पानी के लिए त्राहि त्राहि मच जाएगी. 

प्रदेश के अधिकांश बांध सूखते जा रहे हैं 
भीषण गर्मी से जूझ रहे राजस्थान में अब पानी का संकट भी गहरा हो गया है. प्रदेश के अधिकांश बांध सूखते जा रहे हैं और जनता की प्यास बढ़ती जा रही है. प्रदेश में 22 बड़े बांध हैं, लेकिन उनमें औसतन 44 फीसदी ही पानी है.  4.25 एम क्यू एम से अधिक भराव क्षमता वाले मध्यम व लघु 262 बांधों में अब 11 फीसदी ही पानी बचा है. वहीं 4.25 एम क्यू एम से कम भराव क्षमता वाले करीब 563 बांधों में सिर्फ 3.52 फीसदी पानी है. यानी ये लगभग सूख चुके हैं. 

राजस्थान के 22 में से नौ बांध पूरी तरह सूख चुके हैं
राजस्थान के 22 बड़े बांधों की बात करें, तो  केवल चंबल नदी पर बने कोटा बैराज और जवाहर सागर बांध अच्छी स्थिति में हैं. इनके अलावा राजसमंद बांध में 18 फीसदी, धौलपुर के पार्वती बांध में 16, पाली के जवाई बांध में 14 और बूंदी के गुढ़ा डेम में 11.50 फीसदी पानी ही बचा है. कभी भीलवाड़ा की लाइफ लाइन रहा मेजा बांध सूख चुका है. जयपुर का रामगढ़ बांध तो दो दशक पहले ही मर चुका. 22 में से नौ बांध पूरी तरह सूख चुके हैं. 31 मार्च 2019 तक की बांधां की भराव की स्थिति पर एक नजर आप भी डाल लीजिए. अब तो पानी और भी कम हो गया.

जिला बांध भराव %
चितौड़गढ़ राणा प्रताप सागर- 64.62
कोटा कोटा बैराज- 98.65
कोटा जवाहर सागर- 83.19
बांसवाड़ा माही सागर- 45.62
बांसवाड़ा हारो- 31.71
टोंक बीसलपुर- 14.96
टोंक गलवा- 8
टोंक टोरडी सागर- 0
दौसा मोरेल- 0
भरतपुर सिकरी बांध- 0
धौलपुर पार्वती डैम- 17.16
बूंदी गुढ़ा डैम- 26.13
जयपुर रामगढ़- 0
जयपुर छापरवाड़ा- 0
जयपुर कालख सागर- 0
पाली जवाई डैम- 17.71
पाली सरदार समंद- 0.33
भीलवाड़ा मेजा डैम- 0
डूंगरपुर सोम कमला- 54.13
राजसमंद राजसमंद- 21.77
उदयपुर जयसमंद- 45.74
प्रतापगढ़ जाखम डैम- 30.51

जयपुर की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध भी अब दम तोड़ने लगा है. इस बांध से जयपुर के अलावा अजमेर व टोंक जिलों में भी पानी सप्लाई होता है, लेकिन अब यहां पर महज महज 11 फीसदी पानी बचा है. 315.50 भराव क्षमता वाले इस बांध में मार्च में 15 फीसदी पानी बचा था. जयपुर में पानी सप्लाई के मांग को देखते हुए उसी समय इससे खेती के लिए पानी की सप्लाई बंद कर दी गई थी. जयपुर व अजमेर को पानी तो मिल रहा है, लेकिन कटौती काफी हो चुकी है. जयपुर में तो अब ट्यूबवेल खोदे जाने लगे हैं, लेकिन अजमेर में तो ट्यूबवेल से भी पानी नहीं आ रहा. 

करोड़ों अरबों रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर समेत बीकानेर, हनुमानगढ, नागौर, चूरू, पाली व जालोर जिलों में पानी की भयंकर किल्लत बनी हुई है. ये वो जिले हैं जिनको भूजल स्तर के हिसाब से डार्क जोन घोषित कर दिया गया है. जलदाय विभाग ने बड़ी बड़ी योजनाएं शुरू कर रखी है. करोड़ों अरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. टैंकर्स से पानी सप्लाई का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकार की नाक के नीचे राजधानी और जयपुर जिले की आधी से ज्यादा आबादी को ही पेयजल नहीं मिल पा रहा है. कहीं गोली चल रही है, तो कहीं जनता द्वारा रास्ते रोके जा रहे हैं. मटके फोड़ना व अधिकारियों का घेराव करना तो आम बात हो गई है. प्रदेश को अब मानसून का इंतजार है. अगर समय रहते बारिश नहीं हुई तो प्रदेश में जलसंकट और गहरा सकता है. ऐसे में सरकार को अभी से पानी के वैकल्पिक स्रोत्रों पर भविष्य के लिए प्लानिंग करनी होगी. 

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