लगातार घट रहा है बीसलपुर में जलस्तर, फाइलों में अटकी पानी की प्लानिंग

Naresh Sharma Published Date 2018/12/23 03:12

जयपुर। 'रोम जल रहा है और नीरो बांसुरी बजा रहा है...' यह कहावत अब राज्य के जलदाय विभाग पर भी सटीक बैठ रही है। बीसलपुर में पानी घट रहा है। राजधानी में पानी के लिए जनता परेशान है, लेकिन जलदाय विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पानी की कमी दूर करने के लिए अगस्त में बनाई गई प्लानिंग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में अब पानी सरकार के लिए कहीं गले की फांस न बन जाए। खास रिपोर्ट-

—जयपुर की लाइफ लाइन है बीसलपुर बांध
—लगातार घट रहा है बीसलपुर में पानी का स्तर
—स्तर घटने से जयपुर में हो रही पानी की कटौती
—30 फीसदी तक हो गई है शहर में कटौती
—कई इलाकों में आता है बहुत कम पानी
—कुछ इलाकों में सूख रहे हैं जनता के हलक
—अब ट्यूबवेल पर टिकी है प्यास बुझाने की उम्मीद
—लेकिन जलदाय विभाग है कि मानता ही नहीं
—फाइलों में अटकी रह जाती है पानी की प्लानिंग

बीसलपुर बांध को शहर की सप्लाई से 2009 में जोड़ा गया था। कमजोर बारिश के कारण इस बार पानी कम आया और इसका सीधा असर राजधानी पर पड़ा। ऐसे में विभाग ने तीन प्लान बनाए थे। पहले प्लान के अनुसार पुराने ट्यूबवेल फिर से चालू करने थे और दूसरे प्लान के अनुसार नए ट्यूबवेल खोदने थे। तीसरा प्लान जोखिम भरा था, जिसके अनुसार शहर में दो दिन में एक बार पानी सप्लाई की जाए। अब आइये आपको शुरुआती दो प्लान की हकीकत से रुबरु कराते हैं-

—PHED इंजीनियर्स की लापरवाही पड़ेगी भारी
—283 पुराने ट्यूबवेल को ठीक कराना था
—अगस्त में बन गई थी इस बात की प्लानिंग
—5 करोड़ की राशि मंजूर कर दी गई थी
—लेकिन अभी तक सभी ट्यूबवेल ठीक नहीं हो सके
—279 नए ट्यूबवेल खोदने का भी बना था प्लान
—35 करोड़ रुपए खर्चा होना था इस काम पर
—लेकिन टेंडर में ही लंबा समय लगा दिया इंजीनियर्स ने
—फिर आचार संहिता में उलझ गई फाइल
—अभी भी चार महीने और लग जाएंगे इस काम में
—ऐसे में शहर में बरकरार रहेगी पानी की किल्लत
—प्रेशर से पानी भी नहीं आ पाएगा राजधानी में

बीसलपुर बांध से कटौती किए पानी को मेंटेन करने के लिए प्रमुख सचिव ने 280 नए ट्यूबवेल खोदने के निर्देश दिए थे, लेकिन इंजीनियर्स ने टेंडर लगाने में समय जाया कर दिया। इस काम पर करीब 35 करोड़ रुपए खर्च होना है। लेकिन आचार संहिता के कारण वित्त विभाग से स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। वहीं रेट कॉन्ट्रेक्ट पर 10 करोड़ के ट्यूबवेल खोदने की फाइल चीफ इंजीनियर आईडी खान की टेबल पर ही पड़ी रह गई।  विभाग के चीफ इंजीनियर दिनेश सैनी का कहना है कि ट्यूबवेल के लिए अब वित्त विभाग से अनुमति मिल गई है। अब फाइनेंस कमेटी में स्वीकृत होते ही टेंडर जारी कर देंगे। लेकिन नए ट्यूबवेल में कम से कम चार महीने लग जाएंगे।

सभी पुराने ट्यूबवेल कब चालू होंगे और नए ट्यूबवेल कब बनेंगे यह तो भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन राजधानी में जनता की हालत खराब है। शहर के झोटवाड़ा, मुरलीपुरा, राजापार्क, जवाहरनगर, सांगानेर, आमेर, दिल्ली रोड और चारदीवारी के क्षेत्रों में पाइपलाइन के टेल एंड के घरों में कम प्रेशर से पानी सप्लाई हो रहा है। प्रोजेक्ट विंग की मॉनिटरिंग लापरवाही के कारण शहर के उत्तरी क्षेत्र के झोटवाड़ा, मुरलीपुरा, शास्त्रीनगर, हरमाड़ा, विश्वकर्मा, आमेर सहित अन्य इलाकों में 30 से 40 फीसदी तक पेयजल कटौती हो रही है। लोगों को 20 मिनट भी पानी नहीं मिल रहा है। कुछ इलाकों में तो पानी आ ही नहीं रहा। विभाग टैंकर से पानी सप्लाई करने का दावा तो कर रहा है, लेकिन टैंकर सिर्फ प्रभावशाली लोगों तक ही पहुंच पा रहा है। या फिर उस जगह जहां पर नेताजी का आदेश आ जाता है। कई जगह पुरानी लाइनें बिछी है, जो बार बार टूट जाती है, इस कारण भी पानी सप्लाई में दिक्कत आती है।
 

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