जैसलमेर में पानी के लिए मचा हाहाकार, पानी मुहैया कराने में जिम्मेदारों को आ रहा पसीना

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/05/12 10:37

जैसलमेर। गर्मी के प्रहार से आहत जैसाणे में इन दिनों पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। सरकारी बैठकों में किए जा रहे दावों के बीच जमीनी सच्चाई यह है कि जैसलमेर के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कुल आबादी की तुलना में पानी मुहैया कराने में जिम्मेदारों को पसीना आ रहा है। अभी बैशाख यह हालात है तो ज्येष्ठ में होने वाली परेशानियों का अनुमान सहज लगाया जा सकता है। सार्वजनिक नल के समीप मटके लिए दर्जनों महिलाएं बच्चों के हाथ में दो जरीकन, टूटी हुई पाइप लाइन से घरों में पीने के लिए पानी ले जाने की मशक्कत और सूखे नलों में पानी तलाशने के नजारे जैसलमेर में इन दिनों देखना आम है। जिले भर में इन दिनों पानी की आपूर्ति में हो रही अव्यवस्था का दौर जारी है। समयबद्ध, नियमित व पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

पानी जिसके बिना जीवन का निर्वाह अधूरा माना जाता है, चाहे इंसान हो या फिर जानवर या फिर मूक पंछी सब का जीवन पानी पर निर्भर है लेकिन इन दिनों जैसलमेर में हालात बडे विकट नजर आ रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी को लेकर हाहाकार मच रहा है। जिले भर में पेयजल समस्या से जूझ रहे लोग मजबूर हो रहे हैं प्यासे मरने के लिये क्यों कि सरकार के पास उनके लिये सिवाय आश्वासनों के कुछ भी नही है। शहरी क्षेत्र में पेयजल के लिये सात दिनों से अधिक इंतजार करना पड रहा है और सात दिन बाद भी आने वाले पानी की गारन्टी नहीं होती है कि वह साफ व पीने योग्य सप्लाई होगा ऐसे में शहर में पानी का धंधा करने वालों की मौज हो गई है। 

पशुओं की प्यास बुझाने के लिए हो रही काफी परेशानी 
आम लोगों को पानी के लिए त्राहि त्राहि होना पड़ रहा है।  पशुपालन का व्यवसाय करने वाले लोगों को भी अपने पशुओं की प्यास बुझाने के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। तल्ख धूप में भरी दुपहरी में घर से दो कदम घर से बाहर ले जाना पीड़ादायक होता है, ऐसे में हाथों में जरीकन व बोतलें लिए बच्चे घरों से पानी की जुगत में निकल जाते हैं। बच्चों के साथ-साथ महिलाएं भी मटका व बाल्टी लिए निकल पड़ती हैं, पानी की जुगत में। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के बाशिंदों व शहर में कच्ची बस्तियों के बाशिंदो को हर दिन इसी तरह पानी के लिए पेयजल के लिए जूझना पड़ता है। आम जन की प्यास बुझाने के लिए बनाई गई पानी की टंकियां व जीएलआर में माकूल व समयबद्ध सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। इन टंकियों में झांककर देखने के बाद किसी की पानी पीने की इच्छा नहीं हो सकती। शहर और गांव, दोनों ही क्षेत्रों टंकियों का यही हाल है।

करोड़ो खर्च कर भी नहीं बुझ रही प्यास
सरहदी जैसलमेर जिले में शहर व गांवों में पेयजल व्यवस्था को लेकर सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं, लेकिन पेयजल व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। शहर में कभी दो तो कभी तीन, वहीं गांवों में कभी तीन दिन में तो कभी पांच दिन तक तक भी पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। गर्मी के मौसम में पानी की बढ़ती खपत के कारण जल वितरण व्यवस्था पटरी से उतर गई है। जैसलमेर जिले के बाशिंदों को टैंकर व कैंपर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

यह भी है हकीकत
कब पानी आ जाए, यही बात ध्यान में रखते हुए लोग खाली बर्तन लिए तैयार ही रहते हैं। कई बार तो पूरे दिन केवल इंतजार ही बना रह जाता है और पानी की आपूर्ति ही नहीं होती। पानी की समस्या के बीच एक परेशानी यह भी है कि उन्हें जलापूर्ति के समय की भी जानकारी नहीं रहती। कभी अल सुबह तो कभी दिन में तो कभी शाम या रात को पानी की आपूर्ति होती है।  गर्मी की दस्तक के साथ ही क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने लगा है। एक तरफ भीषण गर्मी में पानी की खपत बढ़ गई है। दूसरी तरफ जलदाय विभाग की ओर से नियमित व पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति नहीं की जा रही है। जलापूर्ति के अभाव में ग्रामीणों सहित मवेशी का बेहाल हो रहा है। ग्रामीणों को ट्रैक्टर टंकियों से पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है, तो मवेशी पेयजल के लिए इधर उधर भटकते नजर आ रहे हैं। 

दावे हैं दावों का क्या
एक तरफ केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से आमजन व दूर दराज छितराई ढाणियों में निवास कर रहे लोगों को पेयजल मुहैया करवाने के दावे किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने लगा है। सर्दी के मौसम में पानी की खपत कम रहती है। ऐसे में जलापूर्ति नहीं होने पर भी काम चल जाता है। गर्मी के मौसम में पानी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में आवश्यकतानुसार पानी नहीं मिलने पर क्षेत्र में त्राही-त्राही मच जाती है। जिससे आमजन को परेशानी होती है।  जलापूर्ति ठप होने के कारण ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

फैक्ट फाइल---
- जैसलमेर जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल- 38, 392
- उपखंड -4
- तहसील- 4
- पंचायत समितियां- 3
- ग्राम पंचायत - 140
- शहर में पानी की अनुमानित खपत- 1 करोड़ लीटर प्रतिदिन
- शहर में पानी की आपूर्ति- 80 लाख लीटर आपूर्ति
- ग्रामीण क्षेत्र में पानी की अनुमानित खपत - 6 करोड़ लीटर प्रतिदिन
- ग्रामीण क्षेत्र में पानी की अनुमानित आपूर्ति - 4 करोड़ लीटर प्रतिदिन
- जलदाय विभाग के पास टैंकर - 12
- पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर पर निर्भर- 51 गांव व 136 ढाणियां
- जिले में नलकूपों की संख्या- 516
- गांवों में हैंडपम्प- 4300

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