VIDEO: लोकसभा की रणभूमि में क्या है बीजेपी के सियासी रणनीतिकारों का भाग्य

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/11 08:56

जयपुर। लोकसभा की रणभूमि के परिणामों के साथ सियासी रणनीतिकारों का भाग्य भी जुड़ा है। यह ऐसे दिग्गज नेता है जो खुद भले ही चुनाव नहीं लड़ रहे, लेकिन इनके विधानसभा क्षेत्रों के परिणामों से उन्हीं पार्टी के उम्मीदवारों कि चुनावी किस्मत का फैसला होना है। बताते हैं बीजेपी के ऐसे ही दिग्गज विधायकों के बारे में जिनकी सीटों के परिणामों पर उनके आलाकमान की नजरें गढ़ी है। खास रिपोर्ट:

आमेर और सतीश पूनिया:
—जाट वोट बहुतायत में है आमेर में
—पूनिया है आमेर से विधायक
—जयपुर ग्रामीण में यही एकमात्र सीट जहां से बीजेपी का विधायक
—सतीश पूनिया की मेहनत पर टिका आमेर का परिणाम

जयपुर ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे है, दिग्गज राजपूत नेता और केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़। राठौड़ के लोकसभा क्षेत्र में ही आता है, आमेर विधानसभा क्षेत्र। यहां से बीजेपी के विधायक है सतीश पूनिया। आमेर कितना साथ राठौड़ का देगा इस पर सियासी विश्लेषकों की निगाहें टिकी हैं। सतीश पूनिया आते है जाट वर्ग से और इसी वर्ग से ताल्लुक है कृष्णा पूनिया का। दिलचस्प संयोग है कि दोनों पूनिया है, मूल रुप से चूरु के राजगढ़ के। राजगढ़ से ही एक बार सतीश पूनिया भी चुनाव लड़ चुके है। कृष्णा पूनिया अभी राजगढ़ से कांग्रेस की विधायक है। सवाल यह है कि क्या अपने समाज के वोट बीजेपी की ओर शिफ्ट कर पाये है सतीश पूनिया। आमेर के परिणाम जयपुर ग्रामीण सीट पर महत्व रखेंगे। 

चौमूं और रामलाल शर्मा:
—चौमूं आता है सीकर लोकसभा क्षेत्र में
—चौमूं की बढ़त ने पिछले लोकसभा चुनावों में सुमेधानंद की मदद की थी
—सीकर लोकसभा क्षेत्र में यहीं एकमात्र सीट जहां से बीजेपी विधायक
—रामलाल का साथ सुमेधानंद के चुनावी भाग्य से जुड़ा है 

चौमूं सदैव सीकर लोकसभा सीट पर टर्निंग पाइंट रहा है। पिछले लोकसभा चुनावों में चौमूं से भारी बढ़त मिली थी और सुमेधानंद सरस्वती विजयी हुये थे। सीकर लोकसभा क्षेत्र में चौमूं ही ऐसी सीट है, जहां से कमल खिला हुआ है। यहां से विधायक है रामलाल शर्मा। सुमेधानंद को इस सीट से खासी उम्मीद है वहीं रामलाल उनकी कितनी मदद कर पायेंगे यह भी परिणामों से ही पता चलेगा। सुभाष महरिया ने भी चौमूं का गढ़ फतह करने के लिये कसर नहीं छोड़ी थी। 

मंजीत सिंह और मुंडावर:
—अलवर लोकसभा क्षेत्र में आता है मुंडावर
—मंजीत सिंह है मुंडावर से भाजपा के विधायक
—मंजीत की परफोरमेंस पर टिकी बाबा की बागड़ौर!

अलवर का मुंडावर विधानसभा क्षेत्र जाट और यादव बहुल इलाका कहा जाता है। बीजेपी के उम्मीदवार बाबा बालकनाथ को मुंडावर से काफी उम्मीदें है। मुंडावर से बीजेपी के विधायक है मंजीत सिंह। मंजीत है कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय धर्मपाल चौधरी के पुत्र। मंजीत के कारण जाट वोटों की शिफ्टिंग बीजेपी अपनी ओर मान रही है। मंजीत की मेहनत पर बाबा बालकनाथ की चुनावी तकदीर टिकी है। पहली बार विधायक बने है मंजीत। 

सूरजगढ़ और सुभाष पूनिया:
—सुभाष पूनिया है सूरजगढ़ से भाजपा विधायक 
—सूरजगढ़ ही श्रवण कुमार की धरती
—नरेन्द्र कुमार को साथी सुभाष पूनिया से साथ की आस

वैसे तो झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र में दो बीजेपी के विधायक है लेकिन निगाहें टिकी है सूरजगढ़ विधानसभा सीट पर। यहां से बीजेपी के विधायक है सुभाष पूनिया। सूरजगढ़ का इलाका माना जाता है कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार का सियासी गढ़। सुभाष पूनिया ने विधानसभा चुनावों में श्रवण कुमार को ही हराया था। संतोष अहलावत का गृह और कर्म क्षेत्र भी सूरजगढ़ ही है। सुभाष पूनिया अपने विधायकी वाले क्षेत्र में साथी विधायक और बीजेपी के प्रत्याशी नरेन्द्र कुमार को कितनी बढ़त दिला पायेंगे इस पर सबकी निगाहें टिकी है। श्रवण कुमार कितनी सेंध लगा पायेंगे सुभाष पूनिया के क्षेत्र में यह परिणामों से पता चलेगा। नरेन्द्र भी मंडावा से विधायक है, उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाद सूरजगढ़ से भी उम्मीदें है। 

सिवाना और हमीर सिंह भायल:
—राजपूत क्षत्रप हमीर सिंह है सिवाना से बीजेपी के विधायक
—बाडमेर लोकसभा क्षेत्र में सिवाना में ही खिला हुआ है कमल
—धर्म क्षेत्र और पार्टी प्रतिबद्धता के बीच की चुनौती से है हमीर सिंह का मुकाबला
—जाट वर्ग से आने वाले कैलाश चौधरी को सिवाना से उम्मीद

मरुस्थल की सिवाना सीट ने प्रचंड कांग्रेस लहर में भी कमल खिलाये रखा और बाड़मेर की गर्मी में कांग्रेस को राहत पहुंचाने का काम किया। मारवाड़ के सिवाना में लोकसभा चुनाव परिणाम क्या कहेंगे इसे लेकर सियासी विश्लेषकों के अलग अलग दावे है। सिवाना से बीजेपी के विधायक है हमीर सिंह भायल। भायल जाति से राजपूत है, वहीं कांग्रेस पार्टी के बाडमेर से उम्मीदवार है मानवेन्द्र सिंह जसोल। जसोल परिवार यहां का प्रतिष्ठित राजपूत ठिकाना है। ऐसे में सिवाना में वोटों के गणित पर बीजेपी के उम्मीदवार कैलाश चौधरी और पार्टी की नजरें टिकी है। सिवाना में ऊंट किस करवट बैठेगा यह परिणाम ही बतायेंगे। 

कई ऐसे लोकसभा क्षेत्र भी जहां सारे विधायक कांग्रेस के है इसके बावजूद वहां कांग्रेस के उम्मीदवार को बीजेपी ने कड़ी चुनौती दी है। बीजेपी के एक एक विधायक से उनके लोकसभा उम्मीदवार को आस इसलिये है कि मोदी टीम को इनसे जरुरत से अधिक उम्मीद है। बूंद बूंद से ही घड़ा भरता है। राजनीतिक शब्दों में यूं कह सकते है, जब परिणाम मनमाफिक आता है तो सियासी भाग्य बदलता है। 

... संवाददाता योगेश शर्मा के साथ ऐश्वर्य प्रधान की रिपोर्ट

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