जयपुर VIDEO: जब जनरल टिकट मिल सकते हैं तो एमएसटी क्यों नहीं ? रोज हजारों स्थानीय यात्री हो रहे परेशान, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: जब जनरल टिकट मिल सकते हैं तो एमएसटी क्यों नहीं ? रोज हजारों स्थानीय यात्री हो रहे परेशान, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: कोरोना के दौरान ट्रेन संचालन में कई बदलाव किए गए. दो साल बाद रेलवे यात्रियों से जुड़ी ज्यादातर सुविधाओं को फिर से शुरू कर चुका है. यहां तक कि लगभग सभी ट्रेनों में जनरल क्लास के टिकट देना भी शुरू हो गए हैं, लेकिन स्थानीय यात्रियों से जुड़ी एक सुविधा अभी भी पूरी तरह से सुचारू नहीं हो सकी है. मासिक सीजन टिकट की इस सुविधा और रेलवे की गफलत से यात्री परेशान हैं. कोरोना के चलते लंबे समय तक ट्रेनों का संचालन बाधित रहा. कई प्रमुख ट्रेनें बंद कर दी गई तो कई के स्टॉपेज कम कर दिए गए. लेकिन 2 साल बाद अब लगभग सभी चीजें पुराने स्वरूप में लौट चुकी हैं. 

राजस्थान में कोरोना से पहले चल रही ट्रेनों में से करीब 92 फीसदी ट्रेनें फिर से पटरी पर लौट आईं हैं. वहीं किराए में रियायतों को छोड़कर ट्रेनों में यात्रियों को दी जाने वाली लगभग सभी सुविधाएं भी शुरू कर दी गई हैं. यात्रियों को अब ट्रेनों में चादर-कम्बल, खानपान, साधारण टिकट आदि सुविधाएं भी शुरू हो गईं हैं, लेकिन फिर भी रेलवे ने कुछ सुविधाओं को अधूरा ही शुरू किया है. सच यही है कि रेलवे ने सभी ट्रेनों में जनरल टिकट तो शुरू कर दिए हैं, लेकिन मासिक सीजन टिकट यानी एमएसटी अभी पूरी तरह शुरू नहीं की गई है. एमएसटी कुछ ट्रेनों में तो शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ ट्रेनों में यात्रियों को यह सुविधा नहीं दी जा रही. इसके विपरीत यात्री जब रेलवे के यूटीएस ऑन मोबाइल एप्लीकेशन से एमएसटी लेते हैं, तो उन्हें सभी तरह की मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए एमएसटी मिल जाती है.

कागजों में 160 में से 76 ट्रेनों में ही यात्रा की अनुमति:
- जयपुर मंडल की 160 मेल/एक्सप्रेस/सुपरफास्ट ट्रेनें चल रही
- रेलवे ने कागजों में 76 ट्रेनों में एमएसटी से यात्रा करने की अनुमति दी
- टिकट विंडो पर इन्हीं ट्रेनों में एमएसटी जारी करने के आदेश दिए हुए
- जबकि ऑनलाइन यूटीएस एप्लीकेशन पर सभी ट्रेनों में एमएसटी जारी हो रही
- यात्री जब काउंटर से एमएसटी बनवाने आता है, तो उसे ये मना कर दिया जाता है
- कहा जाता कि अभी इस ट्रेन में एमएसटी शुरू नहीं की गई
- इस वजह से रोज यात्रियों और बुकिंग कर्मी में हो जाती है बहस
- एमएसटी से रोज 150 किमी तक की कर सकते हैं यात्रा
- जयपुर मंडल में नजदीकी स्टेशनों के करीब 2 हजार एमएसटी धारक
- फुलेरा, अलवर, बांदीकुई, दौसा, सीकर, अजमेर से रोज जयपुर आते हैं यात्री 

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि काउंटर्स या टिकट विंडो पर संबंधित मंडल एवं मुख्यालय द्वारा ट्रेनों में साधारण टिकट और एमएसटी जारी करने के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन ऑनलाइन एप्लीकेशन को कमांड सेंटर फॉर रेलवे इनफॉर्मेशन सिस्टम यानी क्रिस द्वारा दी जाती है. रेलवे द्वारा कुछ मेल, एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों में तो एमएसटी दी जा रही है, जबकि कुछ में नहीं दी जा रही, लेकिन ऑनलाइन में अगर एक बार किसी भी श्रेणी की ट्रेन में एमएसटी देना शुरू कर दिया जाता है, तो वो सभी ट्रेनों में एमएसटी जारी कर देता है. क्योंकि वैसे भी एमएसटी ट्रेन नंबर से नहीं बल्कि ट्रेन की कैटेगरी के हिसाब से जारी होती है. ऐसे में इसे लेकर आए दिन टिकट विंडो पर यात्रियों और बुकिंग कर्मियों की बहस होती है. कई बार तो ये बहस बड़ा विवाद बन जाती है. इसलिए जरूरत इस बात की है कि उत्तर पश्चिम रेलवे प्रशासन यात्रियों के हित में यह निर्णय करे जिससे कि एमएसटी धारक यात्री सभी तरह की ट्रेनों में यात्रा कर सकें.

और पढ़ें