VIDEO: मल्टी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटीज की धोखाधड़ी में कब मिलेगा न्याय, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: मल्टी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटीज की धोखाधड़ी में कब मिलेगा न्याय, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: मल्टी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटीज द्वारा धोखाधड़ी के मामले में केंद्र ने असहयोग का रुख अख्तियार कर रखा है. मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री को लिखे गए पत्र, रजिस्ट्रार द्वारा केंद्रीय रजिस्ट्रार को लिखे गए पत्र भी शायद रद्दी की टोकरी में फेंक दिए हैं. यही कारण है कि प्रदेश में 1700 करोड रुपए से अधिक के गबन के बावजूद निवेशकों को न्याय नहीं मिल पा रहा. 

मल्टीस्टेट क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटीज की धोखाधड़ी के शिकार निवेशकों को न्याय का इंतजार लंबा होता जा हरा है. राज्य सरकार ने मल्टीस्टेट क्रेडिट कंपरेटिव सोसायटीज के संचालकों के खिलाफ इस्तगासा दायर करने के लिए केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय से इनके नाम भेजने के लिए करीब 10 बार चिट्ठी लिखी. इसमें 2 बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम नरेंद्र मोदी को, एक बार केंद्रीय कृषि मंत्री और 7 बार सहकारिता रजिस्ट्रार ने केंद्रीय रजिस्ट्रार को लिखा.

केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय की तरफ से राज्य सरकार को 48 मल्टीस्टेट क्रेडिट कंपरेटिव सोसायटीज के संचालकों के नाम भेजे गए लेकिन अधूरे. इसमें आदर्श क्रेडिट कंपरेटिव सोसायटी के 2008 के संचालक मंडल के नाम भेजे गए. अब सहकारिता रजिस्ट्रार कार्यालय ने बीते मंगलवार को फिर से केंद्रीय रजिस्ट्रार को चिट्ठी लिखकर पूरी सूचना मांगी है. प्रदेश में 50 मल्टीस्टेट क्रेडिट कंपरेटिव सोसायटीज के खिलाफ 86 हजार से ज्यादा निवेशकों ने रजिस्ट्रार कार्यालय में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई थी.

निवेशकों का आरोप है कि इन सोसायटीज ने करीब 1700 करोड़ का वित्तीय गबन किया है. आदर्श क्रेडिट कंपरेटिव सोयायटी के खिलाफ 37 हजार निवेशकों की शिकायतें अब तक सरकार को मिल चुकी हैं जिसमें 991 करोड़ रुपए से ज्यादा का वित्तीय गबन के आरोप हैं. राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम 2019 को लागू किया जा चुका है. 

दोषी पाए जाने पर 7 साल की सजा और कम से कम 5 लाख और अधिकतम 25 करोड़ रुपए के जुर्माने का भी प्रावधान है. इन सबके बावजूद न तो केंद्र द्वारा कोई ठोस कदम उठाया गया है और न ही राज्यों को पर्याप्त सूचनाएं उपलब्ध कराए जा रही हैं. इसका नतीजा यह है कि अपनी गाढ़ी कमाई मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज के संचालकों की धोखाधड़ी में गवा चुके निवेशकों को राहत नहीं मिल पा रही है. अब रजिस्ट्रार द्वारा एक बार फिर केंद्रीय रजिस्ट्रार को पत्र लिखा है उम्मीद की जानी चाहिए कि कोरोना संकट के दौर में अपनी गाढ़ी कमाई के लिए दर-दर भटक रहे निवेशकों को जल्द ही राहत का कोई फार्मूला सामने आएगा.

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