VIDEO: राजस्थान में आखिर कब कम होंगे सड़क हादसे ? परिवहन विभाग के खोखले दावे, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: राजस्थान में आखिर कब कम होंगे सड़क हादसे ? परिवहन विभाग के खोखले दावे, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए परिवहन विभाग ने हाल ही में अपना नाम परिवहन विभाग और सड़क सुरक्षा रखा है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि विभाग का यह प्रयास सिर्फ नाम बदलने तक ही सीमित होकर रह गया है. क्योंकि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग के प्रयास कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं. बाड़मेर जिले में हुई भीषण दुर्घटना की चर्चा पूरे देश भर में हुई है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस दुर्घटना पर दुख जताया है,लेकिन इस दुर्घटना के बाद एक ऐसा तथ्य भी सामने आया जिसमें प्रदेश के परिवहन विभाग पर ही सवाल खड़े कर दिए. 

दुर्घटना में जिस बस में बैठे यात्रियों की मौत हुई है उस बस की फिटनेस जून महीने में ही खत्म हो गई थी, लेकिन उसके बाद भी इस बस पर किसी तरह की कोई कार्रवाई परिवहन विभाग के अधिकारियों ने नहीं की.मौजूदा वर्ष में ही प्रदेश में एक के बाद एक बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं लेकिन किसी भी सड़क दुर्घटना के बाद संबंधित इलाकों के परिवहन विभाग के अधिकारियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

बुधवार को हुए सड़क हादसे के बाद जब फर्स्ट इंडिया ने एनसीआरबी से रोड एक्सीडेंट के आंकड़े जुटाए तो काफी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. मौजूदा वर्ष में लॉकडउन के बावजूद जयपुर में इतनी सड़क दुर्घटनाएं हुई है जो मुंबई पुणे सूरत जैसे बड़े शहरों से भी अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार ट्रैफिक दुर्घटनाओं के मामले में जयपुर छठें स्थान पर हैं जबकि दुर्घटना में हुई मौतों के मामले में तीसरे स्थान पर हैं. यहां पिछले एक साल में कुल 2041 ट्रैफिक दुर्घटना हुईं. इनमें से 1940 सड़क दुर्घटना और 101 रेलवे दुर्घटनाएं थी. जयपुर से अधिक दुर्घटनाएं बेंगलुरू में 3233, चेन्नई में 4389, दिल्ली (शहर) में 4556, हैदराबाद में 2065, इंदौर में 2112 हुई हैं. वहीं इन हादसों में हुई मौत के मामले में बेंगलुरू, हैदराबाद और इंदौर जयपुर से पीछे है.

एक्सीडेंट में मौत : दिल्ली (शहर) व चेन्नई में जयपुर से अधिक :
ट्रैफिक दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौत दिल्ली में हुई. यहां 1568 लोग मरे. दूसरे नंबर पर चेन्नई में 872 मौतें और तीसरे नंबर पर जयपुर में 708 मौतें हुईं. जयपुर में 606 लोग सड़क दुर्घटना और 102 लोग रेलवे दुर्घटना में मरे. साल 2020 में पूरे देश में 48,967 ट्रैफिक दुर्घटनाओं में 41,259 लोग घायल हुए वहीं 12,461 लोगों की मौत हुईं. सड़क दुर्घटनाओं का 97.7 फीसदी दुर्घटनाएं 53 बड़े शहरों में ही हुई हैं. इसका 9.2 प्रतिशत चेन्नई, 8.4 फीसदी दिल्ली में हुई हैं.

जयपुर में रिहायशी इलाके, आबादी के नजदीक अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं. वहीं शाम 6 से रात नौ बजे के बीच ही सर्वाधिक दुर्घटना और सर्वाधिक मौतें हुई हैं. इतना ही नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग के बजाए सामान्य सड़कों पर अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं. बेंगलुरू, हैदराबाद और इंदौर में जयपुर से अधिक ट्रैफिक दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन, समय पर अस्पताल पहुंचने व इलाज मिलने के कारण मौतें कम हो रही हैं. जयपुर में अधिक मौतों का बड़ा कारण अस्पताल पहुंचने में देरी ही है. सरकार की गुड सेमेटेरियन योजना के बावजूद लोग दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने से बच रहे हैं.
   
जयपुर में पिछले साल 2020  कितने ट्रैफिक दुर्घटनाएं हुईं :

माह 

ट्रैफिक दुर्घटना

जनवरी

281

फरवरी 

246

मार्च 

174

अप्रेल

30

मई

 87

जून

140

जुलाई

182

अगस्त

154

सितम्बर 

187

अक्टूबर

191

नवंबर 

177

दिसम्बर 

192

कुल

2041

जयपुर में सामान्य सड़क पर हुई अधिक दुर्घटना :

सड़क

केस घायल

मौत

राष्ट्रीय राजमार्ग

535 453 

212

राज्यीय राजमार्ग

84 62

29

एक्सप्रेस वे

44 34

28

अन्य सड़क

1277 1017

337

कुल

1940 1566

 606

राज्य की स्थिति :

सड़क दुर्घटनाएं

19121

रेलवे दुर्घटना

429

कुल ट्रैफिक दुर्घटना 

19550

बाड़मेर जिले में बुधवार को हुई भीषण दुर्घटना के बाद एक बार फिर से परिवहन विभाग पर सवाल खड़े हुए हैं सवाल यह है कि क्या परिवहन विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ राजस्व अर्जित करने की ही है आखिर क्यों परिवहन विभाग का इतना बड़ा अमला सड़क पर दौड़ रहे वाहनों की दस्तावेजों की जांच गंभीरता से नहीं कर रहा है अगर अभी भी परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सड़क पर दौड़ रहे वाहनों के दस्तावेजों की सही से जांच करें तो भी सड़क दुर्घटना में काफी कमी लाई जा सकती. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट 

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