राजस्थान में लगे पहले राष्ट्रपति शासन में आखिर कौन था जिम्मेदार !

Nizam Kantaliya Published Date 2018/10/17 11:25

जयपुर (निजाम कण्टालिया)। प्रदेश में पहला राष्टपति शासन 13 मार्च 1967 को लगाया गया था। पुर्नसीमन के बाद 1967 के आम विधानसभा चुनाव में 184 सीटो पर 15,18 और 22 फरवरी को चुनाव संपन्न हुए। चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और संयुक्त मोर्चे के बीच चले संघर्ष का नतीजा पहले राष्टपति शासन के रूप में सामने आया। एक गोलीकांड ने राज्य में पहले राष्टपति शासन की नींव रखी थी। आईए जानते है क्या है इस गोलीकांड और पहले राष्टपति शासन की कहानी....

--1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली 89 सीटों पर जीत
--दोमादारलाल व्यास जीते थे टोक—मालपुरा दो विधानसभा सीटो पर 
--ऐसे में कांग्रेस की वास्तविक सीटो की संख्या रह गयी थी 88
--जनसंघ— 22, स्वतंत्र पार्टी—49, समाजवादी दल—8, भाकपा—1 
--और 15 निर्दलिय प्रत्याशियो को मिली थी चुनाव में सफलता
--कांग्रेस— संयुक्त मोर्चा दोनो ने किया सरकार बनाने का दावा
--महारानी गायत्रीदेवी—महारावल लक्ष्मणसिंह कर रहे थे मोर्चे का नेतृत्व
--दावे पर निर्णय के लिए राज्यपाल डॉ सम्पूर्णानंद ने तारीख कि तय 
--तय तारीख पर निर्णय से पूर्व राज्यपाल से मिला मोर्चा प्रतिनिधीमण्डल
--मुलाकात के दौरान राजा मानसिंह—राज्यपाल के बीच हुई कहासुनी 
--नाराज राज्यपाल सम्पूर्णानंद ने अपना निर्णय कर दिया स्थगित

सयुक्त मोर्चे में शामिल राजा मानसिंह द्वारा राज्यपाल के साथ किये गये दुव्यवहार ने पुरा मामला ही बदल दिया। राज्यपाल कुछ ही देर बाद अपना निर्णय सुनाने वाले थे लेकिन ऐसा नही हो सकता। इस घटना के करीब 6 दिन बाद 4 मार्च 1967 को राज्यपाल ने विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए मोहनलाल सुखड़िया को आमंत्रित किया। राज्यपाल के इस का निर्णय के खिलाफ सयुक्त् मोर्चे ने विरोध का ऐलान करते हुए सड़कों पर संघर्ष शुरू कर दिया। 

--राज्यपाल ने 4 मार्च 1967 को सुनाया अपना फैसला 
--सबसे बड़े दल कांग्रेस को सरकार बनाने का दिया निमत्रंण 
--राज्यपाल के निर्णय से सयुक्त मोर्चा उतरा सड़को पर 
--4 मार्च को ही माणक चौक पर किया सभा का आयोजन
--सभा में किया गया 5 मार्च को राजभवन कूच का ऐलान 
--5 मार्च को सिविल लाइंस में लगा दी गयी धारा 144
--जुलूस से पूर्व जिला प्रशासन करता रहा गायत्रीदेवी से फरियाद
--जिला मजिस्टेट विष्णुदत्त शर्मा ने गायत्रीदेवी—लक्ष्मणसिंह से की वार्ता
--वार्ता के बावजूद सयुक्त मोर्चा का जुलूस निकला सड़को पर 
--जुलूस के दोरान हुए हंगामे के बाद हुआ जमकर लाठीचार्ज

पुलिस की लाठीचार्ज के दोरान सयुक्त मोर्चे के कई नेता भी घायल हो गये। कई नेताओं को गिरफतार किया गया जिनमें महारावल लक्ष्मणसिंह, भैरोसिंह शेखावत, सतीशचन्द्र अग्रवाल, हरिकृष्ण व्यास और आदित्येन्द्र सहित कई नेता शामिल थे। इस लाठीचार्ज ने आग में घी का काम किया। जयपुर शहर में पुलिस पर जगह जगह पथराव किया गया। सड़को पर पत्थरो के चलते गाड़ी चलाना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में 5 और 6 मार्च को जयपुर शहर में कफर्यु लगा दिया गया। 

--सरकार बनाने के लिए संयुक्त मोर्चा पहुंचा राष्टपति भवन 
--6 मार्च को राष्टपति के समक्ष मोर्चे के विधायको की हुई परेड
--केन्द्र ने शांति होने तक बहुमत पर विचार करने से किया मना
--7 मार्च 1967 को गायत्रीदेवी ने कि केन्द्रीय गृहमंत्री से मुलाकात
--गृहमंत्री  यशवंतराव चव्हाण ने मुख्यमंत्री सुखाड़िया से कि फोन पर बात
--गायत्रीदेवी के आहवान पर बुलायी गयी प्रशासनिक बैठक
--दोपहर तक चली बैठक के बाद कफर्यु हटाना हुआ तय 
--कर्फ्यू हटाने से पूर्व ही माणक चौक पुलिस से हुई एक गलती
--धारा 144 हटाने की गफलत में छोड़ दिये 50 प्रदर्शनकारी
--प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में पहुंच गये जौहरी बाजार 
--जौहरी बाजार में मौजूद थी यूपी पीएसी पुलिस की टुकड़िया
--पीएसी कंपनियो को नही थी कफर्यु हटाने की जानकारी 
--इसी बीच प्रदर्शनकारियो ने कर दिया पुलिस पर हमला 
--पुलिस की फायरिंग में हुई 9 प्रदर्शनकारियो की मौत 

प्रदर्शनकारियों  की मौत के बाद जयपुर सहित पुरे प्रदेश में स्थिती विस्फोटक हो गयी। जयपुर के जौहरी बाजार में हुए गोलीकांड से नाराज हजारो लोग माणक चौक पहुंचने लगे। एक बार फिर यहां पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियो पर गोली चलाने के आदेश दिया जिसमें 1 प्रदर्शनकारी घायल हो गया। इस गोलीकाण्ड के बाद 13 मार्च 1967 को सुखड़िया ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार से बनाने से इंकार कर दिया। राज्यपाल डॉ संपूर्णानंद ने ऐसी स्थिती में राजस्थान विधानसभा को भंग कर राष्टपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। इसके साथ ही राजस्थान के इतिहास में पहला राष्टपति शासन लागू कर दिया गया। 

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