कौन था भारत पाकिस्तान की सरहदों को तय करने वाला शख्स, और क्या है भारत-पाकिस्तान के दुनिया के सामने अवतरण की दास्तान

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/14 06:19

नई दिल्ली :भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. वहीं पाकिस्तान हर साल 14 अगस्त को यानी एक दिन पहले ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है.दरअसल, इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई को पारित किया था. इस बिल के मुताबिक 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत का बंटवारा होगा जिससे भारत और पाकिस्तान नाम के दो नए देश वजूद में आ जाएंगे.

कैसे वर्तमान स्वरुप में आये भारत पाकिस्तान 
करीब 90 साल के कालखंड में अंग्रेजी दास्तां से मुक्त होने के लिए क्रांतिकारियों, नरम दल और कई संगठनों ने लड़ाई लड़ी.अंग्रेजों के चंगुल से भारत को आजाद कराने की लड़ाई की औपचारिक शुरुआत 1857 के गदर से शुरू हुई.और अब अंग्रेजी हुकुमत को ये समझ से आने लगा कि अब भारत को कब्जे में रखना मुश्किल होगा और 18 जुलाई 1947 को अंग्रेजों ने औपचारिक तौर पर ऐलान कर दिया कि वो अब भारत को आजाद कर देंगे लेकिन उसमें बंटवारे का प्रस्ताव था अंग्रेजों ने भारत को आजाद जरूर किया लेकिन भारत खंडित हो चुका था. भारत के राजनीतिक नक्शे पर पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान उभर कर सामने आया. अब ये समस्या थी कि भारत के कौन कौन से इलाके पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनेंगे.

ब्रिटिश सरकार के सामने सवाल था कि आखिर भारत के मानचित्र पर लकीर कौन खीचेगा। भारत-पाकिस्तान की सरहदों को तय करने के लिए बाउंड्री कमीशन के गठन पर सहमति बनी और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के तीन वरिष्ठ सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया। लेकिन भारत की गर्मी और सदस्यों की उम्र आड़े आ गई। इस पृष्ठभूमि में वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन के बॉस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट लॉर्ड लिस्टोवेल ने सर रेडक्लिफ का नाम प्रस्तावित किया। रेडक्लिफ लंदन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष थे उन्हें कानून की अच्छी समझ थी। रेडक्लिफ के नाम पर जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना दोनों ने सहमति जताई

रेडक्लिफ कमीशन में पंजाब बाउंड्री कमीशन के लिए मुस्लिम लीग की तरफ से जस्टिस दीम मुहम्मद और जस्टिस मुहम्मद सदस्य के तौर पर शामिल हुए जबकि कांग्रेस की तरफ से जस्टिस मेहर चंद महाजन और जस्टिस तेजा सिंह शामिल हुए। इसी तरह से बंगाल बाउंड्री कमीशन के लिए मुस्लिम लीग की तरफ से जस्टिस अबू सलेह अकरम, जस्टिस एस ए रहमान और कांग्रेस की तरफ से जस्टिस सी सी विश्वास और जस्टिस बी के मुखर्जी नियुक्त किए गए। ये सभी सदस्य हाईकोर्ट के जज थे। इसके साथ ही क्रिस्टोफर ब्यूमांट को कमीशन का सेक्रेटरी और केवीके सुंदरम को कमीशन का ओएसडी नियुक्त किया गया। 

बंगाल में सरहद का खाका खींचने के लिए कलकत्ता में 16 जुलाई से लेकर 24 जुलाई को बैठक हुई जिसमें 20 जुलाई को बैठक नहीं हुई थी क्योंकि वो रविवार का दिन था। इसी तरह से 21 जुलाई से 31 जुलाई 1947 को पंजाब के लिए बैठक हुई।रेडक्लिफ चूँकि पंजाब और बंगाल बाउंड्री कमीशन के अध्यक्ष थे। इस लिहाज से उन्होंने बंगाल और लाहौर दोनों जगहों का दौरा किया। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर आम लोगों की आपत्तियों को नहीं सुना या यूं कहें कि जनता दरबार नही लगाया

बंगाल के संबंध में चार, पांच और 6 अगस्त 1947 को पब्लिक सीटिंग संपन्न हुई थी। लेकिन पब्लिक सीटिंग किसी सार्वजनिक स्थान की जगह लाहौर और कलकत्ता के हाईकोर्ट में संपन्न कराई गई। इतनी कवायद के बाद जब दोनों कमीशन साझा बिंदू पर नहीं पहुंचे तो रेडक्लिफ ने अकेले ही दोनों देशों की सीमाओं को तय कर दिया। ये बात अलग है कि जमीन पर लीग और कांग्रेस के नेताओं की तरफ से जबरदस्त विरोध हो रहा था। लेकिन सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने अपना फैसला 16 अगस्त 1947 को सुना दिया और भारत-पाकिस्तान आज के स्वरूप में दुनिया के सामने अवतरित हुए

रेडक्लिफ अपना फैसला सुना चुके थे। और ब्रिटिश सरकार जमीनी हकीकत को समझते हुए भी रेडक्लिफ के फैसले पर मुहर लगा दी थी। भारी विरोध के बीच रेडक्लिफ ने 14 अगस्त 1947 को भारत छोड़ दिया। बताया जाता है कि किसी ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की थी कि अगर वो दोबारा भारत लौटेंगे तो निर्मम तरीक से उनकी हत्या कर दी जाएगी। ज्योतिषी के इस चेतावनी या भविष्यवाणी का असर ये हुआ कि वो कभी भारत नहीं आए। यही नहीं उन्होंने पांच हजार पौंड की अपनी फीस भी लेने से इंकार कर दिया था। 1 अप्रैल 1977 को उनकी लंदन में मौत हो गई

हाइलाइट्स
सर रेडक्लिफ कमीशन को भारत और पाकिस्तान की सरहदों को तय करने की दी गई थी जिम्मेदारी पंजाब-बंगाल बाउंड्री कमीशन का किया गया था गठन, दोनों आयोगों में मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा नामित जस्टिस थे शामिलआयोग में आम सहमति न बनने की वजह से सर रेडक्लिफ ने खुद किया सीमा निर्धारण

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