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कौन था भारत पाकिस्तान की सरहदों को तय करने वाला शख्स, और क्या है भारत-पाकिस्तान के दुनिया के सामने अवतरण की दास्तान

कौन था भारत पाकिस्तान की सरहदों को तय करने वाला शख्स, और क्या है भारत-पाकिस्तान के दुनिया के सामने अवतरण की दास्तान

नई दिल्ली :भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. वहीं पाकिस्तान हर साल 14 अगस्त को यानी एक दिन पहले ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है.दरअसल, इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई को पारित किया था. इस बिल के मुताबिक 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत का बंटवारा होगा जिससे भारत और पाकिस्तान नाम के दो नए देश वजूद में आ जाएंगे.

कैसे वर्तमान स्वरुप में आये भारत पाकिस्तान 
करीब 90 साल के कालखंड में अंग्रेजी दास्तां से मुक्त होने के लिए क्रांतिकारियों, नरम दल और कई संगठनों ने लड़ाई लड़ी.अंग्रेजों के चंगुल से भारत को आजाद कराने की लड़ाई की औपचारिक शुरुआत 1857 के गदर से शुरू हुई.और अब अंग्रेजी हुकुमत को ये समझ से आने लगा कि अब भारत को कब्जे में रखना मुश्किल होगा और 18 जुलाई 1947 को अंग्रेजों ने औपचारिक तौर पर ऐलान कर दिया कि वो अब भारत को आजाद कर देंगे लेकिन उसमें बंटवारे का प्रस्ताव था अंग्रेजों ने भारत को आजाद जरूर किया लेकिन भारत खंडित हो चुका था. भारत के राजनीतिक नक्शे पर पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान उभर कर सामने आया. अब ये समस्या थी कि भारत के कौन कौन से इलाके पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनेंगे.

ब्रिटिश सरकार के सामने सवाल था कि आखिर भारत के मानचित्र पर लकीर कौन खीचेगा। भारत-पाकिस्तान की सरहदों को तय करने के लिए बाउंड्री कमीशन के गठन पर सहमति बनी और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के तीन वरिष्ठ सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया। लेकिन भारत की गर्मी और सदस्यों की उम्र आड़े आ गई। इस पृष्ठभूमि में वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन के बॉस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट लॉर्ड लिस्टोवेल ने सर रेडक्लिफ का नाम प्रस्तावित किया। रेडक्लिफ लंदन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष थे उन्हें कानून की अच्छी समझ थी। रेडक्लिफ के नाम पर जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना दोनों ने सहमति जताई

रेडक्लिफ कमीशन में पंजाब बाउंड्री कमीशन के लिए मुस्लिम लीग की तरफ से जस्टिस दीम मुहम्मद और जस्टिस मुहम्मद सदस्य के तौर पर शामिल हुए जबकि कांग्रेस की तरफ से जस्टिस मेहर चंद महाजन और जस्टिस तेजा सिंह शामिल हुए। इसी तरह से बंगाल बाउंड्री कमीशन के लिए मुस्लिम लीग की तरफ से जस्टिस अबू सलेह अकरम, जस्टिस एस ए रहमान और कांग्रेस की तरफ से जस्टिस सी सी विश्वास और जस्टिस बी के मुखर्जी नियुक्त किए गए। ये सभी सदस्य हाईकोर्ट के जज थे। इसके साथ ही क्रिस्टोफर ब्यूमांट को कमीशन का सेक्रेटरी और केवीके सुंदरम को कमीशन का ओएसडी नियुक्त किया गया। 

बंगाल में सरहद का खाका खींचने के लिए कलकत्ता में 16 जुलाई से लेकर 24 जुलाई को बैठक हुई जिसमें 20 जुलाई को बैठक नहीं हुई थी क्योंकि वो रविवार का दिन था। इसी तरह से 21 जुलाई से 31 जुलाई 1947 को पंजाब के लिए बैठक हुई।रेडक्लिफ चूँकि पंजाब और बंगाल बाउंड्री कमीशन के अध्यक्ष थे। इस लिहाज से उन्होंने बंगाल और लाहौर दोनों जगहों का दौरा किया। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर आम लोगों की आपत्तियों को नहीं सुना या यूं कहें कि जनता दरबार नही लगाया

बंगाल के संबंध में चार, पांच और 6 अगस्त 1947 को पब्लिक सीटिंग संपन्न हुई थी। लेकिन पब्लिक सीटिंग किसी सार्वजनिक स्थान की जगह लाहौर और कलकत्ता के हाईकोर्ट में संपन्न कराई गई। इतनी कवायद के बाद जब दोनों कमीशन साझा बिंदू पर नहीं पहुंचे तो रेडक्लिफ ने अकेले ही दोनों देशों की सीमाओं को तय कर दिया। ये बात अलग है कि जमीन पर लीग और कांग्रेस के नेताओं की तरफ से जबरदस्त विरोध हो रहा था। लेकिन सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने अपना फैसला 16 अगस्त 1947 को सुना दिया और भारत-पाकिस्तान आज के स्वरूप में दुनिया के सामने अवतरित हुए

रेडक्लिफ अपना फैसला सुना चुके थे। और ब्रिटिश सरकार जमीनी हकीकत को समझते हुए भी रेडक्लिफ के फैसले पर मुहर लगा दी थी। भारी विरोध के बीच रेडक्लिफ ने 14 अगस्त 1947 को भारत छोड़ दिया। बताया जाता है कि किसी ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की थी कि अगर वो दोबारा भारत लौटेंगे तो निर्मम तरीक से उनकी हत्या कर दी जाएगी। ज्योतिषी के इस चेतावनी या भविष्यवाणी का असर ये हुआ कि वो कभी भारत नहीं आए। यही नहीं उन्होंने पांच हजार पौंड की अपनी फीस भी लेने से इंकार कर दिया था। 1 अप्रैल 1977 को उनकी लंदन में मौत हो गई

हाइलाइट्स
सर रेडक्लिफ कमीशन को भारत और पाकिस्तान की सरहदों को तय करने की दी गई थी जिम्मेदारी पंजाब-बंगाल बाउंड्री कमीशन का किया गया था गठन, दोनों आयोगों में मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा नामित जस्टिस थे शामिलआयोग में आम सहमति न बनने की वजह से सर रेडक्लिफ ने खुद किया सीमा निर्धारण

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Covid-19 World Update: दुनिया में अब तक कोरोना से 10 लाख मरीजों की मौत, 3.30 करोड़ इंसान हुए संक्रमित 

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नई दिल्ली: दुनियाभर में कोरोना वायरस के मरीजों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. हर रोज मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है. इस महामारी की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है. पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की चपेट में आने से अब तक 10 लाख मरीजों की मौत हो चुकी है. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक गत 24 घंटों में दुनिया में 2 लाख 93 हजार नए संक्रमित मिले है और 2 लाख 33 हजार लोग इलाज के बाद ठीक हुए हैं. हालांकि कोरोना वायरस की चपेट में आने से 5 हजार 297 लोगों की जान भी चली गई.

दुनिया में 76 लाख से ज्यादा एक्टिव केस:
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक विश्व में अब तक 3 करोड़ 30 लाख इंसान कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं. इसमें से 9 लाख 98 हजार मरीजों की मौत हो चुकी है. तो वहीं 2 करोड़ 44 लाख से ज्यादा लोग पॉजिटिव से नेगेटिव हो चुके है. अगर बात करें एक्टिव केस की, तो मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक पूरी दुनिया में 76 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं यानी कि फिलहाल इतने लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

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ये है सबसे प्रभावित देश:
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों में कोविड-19 केस और मौत के आंकड़ों में कमी आई है. भारत ही एक मात्र देश है जहां कोरोना महामारी सबसे तेजी से बढ़ रही है. हालांकि कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में अमेरिका पहले पायदान पर है. यहां अबतक 72 लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके है. अमेरिका में गत 24 घंटों में 43 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आये है. वहीं ब्राजील में 24 घंटे में 25 हजार से ज्यादा केस मिले है. 

संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन में बोले पीएम मोदी, वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में UN कहां है?

संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन में बोले पीएम मोदी, वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में UN कहां है?

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए क​हा कि भारत को इस बात का बहुत गर्व है कि वो संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक देशों में से एक है. आज के इस ऐतिहासिक मौके पर मैं आप सभी के सामने भारत के 130 करोड़ लोगों की भावनाएं इस वैश्विक मंच पर साझा करने आया हूं.पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है?

संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता:
पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं. अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं. ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए. कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियां बहती रहीं. इन युद्धों और हमलों में, जो मारे गए वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे. लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़ कर चले गए. उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे? 

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पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र से किया सवाल?:
पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है.इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहां है? एक प्रभावशाली Response कहां है? पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोग UN के रिफॉर्म्स को लेकर जो प्रोसेस चल रहा है, उसके पूरा होने का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रोसेस कभी logical end तक पहुंच पाएगा. कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के decision making structures से अलग रखा जाएगा.

फार्मा इंडस्ट्री ने भेजी 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां:
पीएम मोदी ने कहा कि भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो वो किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होती. भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है, तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती. हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते.भारत ने हमेशा पूरी मानव जाति के हित के बारे में सोचा है, न कि अपने निहित स्वार्थों के बारे में, भारत की नीतियां हमेशा से इसी दर्शन से प्रेरित रही हैं. महामारी के इस मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां भेजीं हैं. विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर आज मैं वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूं. भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डिलीवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी.

रूस की कोरोना वैक्सीन Sputnik V फिर आई सवालों के घेरे में, हर 7 में से एक शख्स में दिखे साइड इफेक्ट

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस के खिलाफ पूरी दुनिया अभी जंग लड़ रही है. सभी देश कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस दौर में रूस सबसे आगे है और उसकी कोरोना वैक्सीन Sputnik V पर सबकी नजरें टिकी हैं, लेकिन इसके ट्रायल पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. दरअसल, इस वैक्सीन को जिन लोगों को लगाया जा रहा है, उनमें से सात में से एक स्वयंसेवक पर इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं. इस बारे में रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने जानकारी दी है. 

300 से अधिक को अब तक स्पुतनिक वी वैक्सीन लगाई गई:
राज्य द्वारा संचालित ताश समाचार एजेंसी के मुताबिक, मुराशको ने कहा कि 40,000 घोषित स्वयंसेवकों में से 300 से अधिक को अब तक स्पुतनिक वी वैक्सीन लगाई गई है. ताश ने मुराशको के हवाले से लिखा, लगभग 14 फीसदी स्वयंसेवकों ने 24 घंटे कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और शरीर के तापमान में कभी-कभी वृद्धि की शिकायतें कीं. हालांकि इन लक्षणों को हल्का बताते हुए उन्होंने कहा कि ये अगले ही दिन गायब भी हो गए.

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Sputnik V वैक्सीन को लेकर मिल रहीं ये शिकायतें अनुमानित: 
टीएएसएस के अनुसार, Sputnik V वैक्सीन को लेकर मिल रहीं ये शिकायतें अनुमानित हैं और इसे पहले ही बता दिया गया था. उम्मीद की जा रही है कि वॉलंटियर्स को पहले डोज के 21 दिन के भीतर ही दूसरी खुराक भी दी जाएगी.

Sputnik V के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा:  
बता दें कि अभी Sputnik V के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है और भारत में भी इसके ट्रायल और वितरण के लिए डॉ. रेड्डी लेबोरेटरिज से समझौता हुआ है और इसी महीने की शुरुआत में मास्को में इस वैक्सीन के फाइनल स्टेज का क्लिनिकलल ट्रायल शुरू होना है.

रिपोर्ट में खुलासा- 13 फीसदी आबादी वाले चंद अमीर देशों ने खरीदी 50 फीसदी कोरोना वैक्सीन

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वाशिंगटन: धनी देशों के एक समूह ने भविष्य में आने वाले कोरोना वायरस के टीकों का 50 फीसदी से ज्यादा खुराक खरीद लिए हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये देश पूरी दुनिया की मात्र 13 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है. एनालिटिक्स कंपनी एयरफिनिटी द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर गैर-सरकारी संगठन ने परीक्षण के अंतिम दौर से गुजर रहे पांच वैक्सीन की उत्पादक कंपनियां, फार्मास्यूटिकल्स और खरीदार देशों के बीच हुए सौदों का विश्लेषण किया है.

टीके सभी के लिए उपलब्ध हों और सस्ती हों:  
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ऑक्सफैम अमेरिका के रॉबर्ट सिल्वरमैन ने कहा कि जीवन रक्षक वैक्सीन की पहुंच इस बात पर निर्भर नहीं करनी चाहिए की आप कहां रहते हैं या आपके पास कितना पैसा है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन का विकास और अनुमोदन महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण यह भी सुनिश्चित करना है कि टीके सभी के लिए उपलब्ध हों और सस्ती हों क्योंकि कोविड -19 सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि हर जगह है.

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उत्पादकों की कुल संयुक्त उत्पादन क्षमता की गणना 5.9 बिलियन खुराक:
आपको बता दें कि जिन पांच टीकों का विश्लेषण किया गया है, उनमें  एस्ट्राजेनेका, गामालेया/ स्पुतनिक, मॉडर्न, फाइजर और सिनोवैक के वैक्सीन हैं. ऑक्सफैम ने इन पांचों वैक्सिन उत्पादकों की कुल संयुक्त उत्पादन क्षमता की गणना 5.9 बिलियन खुराक की है.  ऐसे में यह केवल 3 बिलियन लोगों के लिए ही पर्याप्त है क्योंकि प्रति वैक्सनी की दो खुराक दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. वहीं सप्लायर्स कंपनियों ने 5.3 बिलियन वैक्सीन खुराक के लिए डील किए हैं. इनमें से 2.7 बिलियन (51 फीसदी) खुराक की डील सिर्फ चंद विकसित और अमीर देशों ने की है, जहां दुनिया की मात्र 13 फीसदी आबादी बसती है. इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, हॉन्गकॉन्ग और मकाऊ, जापान, स्विटजरलैंड और इजरायल शामिल है.

BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक आज, अजीत डोवाल और चीनी NSA होंगे आमने सामने

BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक आज, अजीत डोवाल और चीनी NSA होंगे आमने सामने

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच LAC पर चल रहे सीमा विवाद के बीच ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक आज होगी. इस बैठक में भारत के साथ साथ चीन के प्रतिनिधि भी शरीक होंगे. ऐसे में सबका ध्यान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीनी सुरक्षा सलाहकार पर होगा. क्योंकि LAC पर तनाव के बीच चीनी NSA यांग जिएची और भारतीय NSA अजीत डोवाल की बैठक होने वाली है. 

बैठक रूस की मेजबानी में आयोजित होगी:
ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की यह बैठक रूस की मेजबानी में आयोजित होगी. ब्रिक्स एनएसए की यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले होने वाली अहम बैठकों की ही एक कड़ी है. बैठक आज शाम लगभग 6 बजे शुरू होगी. बता दें कि दोनों देशों के NSA अधिकारियों की बैठक उन अहम मुद्दों में से एक है जिसमें हाल ही में सहमति बनी थी.

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निकोलाई पैट्रूशेव इस बैठक का प्रतिनिधित्व करेंगे:
रूस ने अपने बयान में कहा कि BRICS देश आज की बैठक में वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पैदा हुए खतरों और चुनौतियों पर बहस करेंगे. रूस के सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी निकोलाई पैट्रूशेव इस बैठक का प्रतिनिधित्व करेंगे. हालांकि बैठक में भारत और चीन के NSA के बीच सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर कोई बातचीत होगी या नहीं इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है. 

इन पांच देशों का संगठन है ब्रिक्स: 
ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का संगठन है. इन पांचों देशों में विश्व की 42 फीसदी जनसंख्या रहती है और दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में इनकी हिस्सेदारी 23 फीसदी है. ऐसे में ये सभी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है. 

संसद में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीन सीमा पर जवानों ने संयम और शौर्य का परिचय दिया, विफल कर दिया स्टेटस बदलने का प्रयास

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नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच संसद के मॉनसून सत्र का आज दूसरा दिन है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चीन से तनाव पर लोकसभा में बयान दिया. राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर हमारे जवानों से मुलाकात की. उन्होंने यह संदेश भी दिया था वह हमारे वीर जवानों के साथ खड़े हैं. मैंने भी लद्दाख जाकर अपने यूनिट के साथ समय बिताया था. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था. आप जानते हैं कर्नल संतोष मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था.

राजनाथ सिंह ने दी चीन की एक-एक नापाक करतूतों की जानकारी:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन की एक-एक नापाक करतूतों की जानकारी सदन को दी. उन्होंने बताया कि 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग लेक के साउथ बैंक इलाके में यथास्थिति बदलने का प्रयास था. हमारे सेना ने उनके प्रयास विफल कर दिया गया. चीन ने द्विपक्षीय संबंधों का अनादर पूरी तरह दिखता है. LAC का सम्मान करना और इसे 1993-1996 के समझौते में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है. चीन की तरफ से ऐसा नहीं हुआ है, उनकी कार्रवाई के कारण के सीमा पर झड़प हुए हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि 15 जून को चीन के साथ गलवान घाटी में खूनी संघर्ष में हमारे जवानों ने बलिदान दिया और चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान पहुंचाया. जहां संयम की जरूरत थी वहां हमारे जवानों संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य प्रदर्शित किया है. किसी को भी हमारी सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए.

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दोनों देशों को करना चाहिए LAC का सम्मान:
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे सुरक्षाबल हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं. उन्होंने कहा कि 15 जून को हमारे जवानों ने स्टेटस बदलने के प्रयास को असफल कर दिया. जवानों ने बलिदान दिया है. चीन को भी भारी नुकसान हुआ. चीन की ये कोशिश हमें मंजूर नहीं है. दोनों देशों को LAC का सम्मान करना चाहिए.

राष्ट्रपति-पीएम-सोनिया गांधी समेत देश की कई बड़ी हस्तियों की जासूसी कर रहा चीन

राष्ट्रपति-पीएम-सोनिया गांधी समेत देश की कई बड़ी हस्तियों की जासूसी कर रहा चीन

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर काफी समय से तनाव चल रहा है. हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति तक बन रही है. इस तनाव के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जहां चीन कुछ कंपनियों के द्वारा भारतीयों पर नजर रख रहा है. इनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री तक, मुख्यमंत्री से लेकर सेना के वरिष्ठ अफसरों तक की जासूसी होने की जानकारी है. जो भारत का लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है. 

कंपनी का चीन की सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सीधा संबंध:  
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि शेनजेन बेस्ड चीनी कंपनी 'झेनझुआ डाटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड' भारत में करीब दस हजार लोगों की निगरानी कर रही है. इस कंपनी का चीन की सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सीधा संबंध है.  

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40 मुख्यमंत्रियों, 350 सांसद सूची में शामिल:
इस जासूसी लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पांच प्रधानमंत्रियों, पूर्व और वर्तमान के 40 मुख्यमंत्रियों, 350 सांसद, कानून निर्माता, विधायक, मेयर, सरपंच और सेना से जुड़े समेत करीब 1350 लोगों के नाम शामिल हैं. 

अलग-अलग पार्टियों के करीब 700 नेताओं पर भी चीन की नज़र:
इतना ही नहीं, चीन के द्वारा अलग-अलग पार्टियों के करीब 700 नेताओं की निगरानी रखी जा रही है. इसके अलावा 460 वो लोग भी हैं जो इन नेताओं के करीबी रिश्तेदार हैं. 100 से ज्यादा नेताओं की फैमिली ट्री बनायी गयी है, जिन पर निगाह रखी जा रही है. करीब एक दर्जन मौजूदा और पूर्व राज्यपालों की भी डिटेल्स रखी गयी हैं. वहीं चीन की निगरानी सूची में कई पोर्टियों के 200 छोटे बड़े नेता भी शामिल हैं. इस खुलासे से ये साफ हो गया है कि चीन सिर्फ सीमा पर नहीं बल्कि साइबर की दुनिया में भी एक जंग लड़ रहा है.
 

भारतीय सेना ने एक बार फिर खोली चीनी चालबाजियों के झूठ की पोल, कहा- चीन ने की फायरिंग, हमने LAC पार नहीं की

भारतीय सेना ने एक बार फिर खोली चीनी चालबाजियों के झूठ की पोल, कहा- चीन ने की फायरिंग, हमने LAC पार नहीं की

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने एक बार फिर चीनी चालबाजियों के झूठ की पोल खोल दी है. भारतीय सेना की ओर से एलएसी पर फायरिंग के चीन के दावे को भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर खारिज कर दिया है. सेना ने कहा कि भारतीय सेना ने ना तो एलएसी पर किसी तरह की आक्रामक कदम नहीं उठाया. फायरिंग चीन की तरफ से हुई. इससे पहले चीन ने दावा किया था कि भारतीय सेना की ओर से एलएसी पर फायरिंग की गई. 

चीन आगे बढ़ने के लिए उत्तेजक गतिविधियां कर रहा:
वहीं इसी पर अब भारतीय सेना की ओर से पूरी घटना पर प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया है. सेना का कहना है कि भारत, जहां एलएसी पर तनाव कम करने के लिए प्रतिबद्ध है. चीन आगे बढ़ने के लिए उत्तेजक गतिविधियां कर रहा है. भारतीय सेना ने एलएसी पार नहीं की, ना ही गोलीबारी समेत किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई नहीं की.

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हमारे सैनिकों ने बड़े संयम का परिचय दिया: 
भारतीय सेना ने कहा कि 7 सितंबर 2020 को पीएलए सैनिकों ने हमारे एक फॉरवर्ड पोजिशन पर कब्जा करने की कोशिश की, जब हमारे सैनिकों ने चीनी जवानों का मुकाबला किया तो उन्होंने (पीएलए) हवा में कुछ राउंड फायरिंग की. सैनिकों को डराने की कोशिश की, हालांकि गंभीर उकसावे के बावजूद हमारे सैनिकों ने बड़े संयम का परिचय दिया और परिपक्वता दिखाते हुए जिम्मेदार तरीके से व्यवहार किया.

क्या है चीन का बयान: 
चीनी सेना की वेस्टर्न कमांड ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने गश्त कर रही चीनी सैनिकों की टुकड़ी पर फायरिंग की है. इसके जवाब में चीनी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की है.