VIDEO: चूरू में किसकी राठौड़ी, राम-लखन कैसे बने करन-अर्जुन ?

Laxman Raghav Published Date 2019/03/27 09:47

बीकानेर। बीकानेर संभाग की सबसे हॉट सीट इन दिनों चूरू बनी हुई है। दरअसल पिछले 20 सालों से यहां कमल खिलता रहा है, लेकिन इस बार भाजपा के भीतर चली खींचतान से मामला उलझ गया है। नतीजा ये रहा कि पहली सूची में सिटिंग एमपी राहुल कस्वां का नाम नहीं आया। दूसरी तरफ कांग्रेस में भी प्रत्याशी को लेकर तस्वीर बहुत साफ नहीं है। क्या है चूरू में भाजपा का चक्कर खास रिपोर्ट:

चूरू में भी इस बार विधानसभा चुनावों में भाजपा की आपसी खींचतान साफ दिखाई दी थी। यही वजह रही कि भाजपा के दिग्गज राजेन्द्र राठौड़ हारते हारते बचे, तो वहीं पूर्व सांसद राम सिंह कस्वा तो ना केवल हारे अपितु तीसरे नम्बर पर पहुंच गए। दरअसल कभी राम लक्ष्मण की जोड़ी के तौर सुर्खियां बटोरने वाले राम सिंह कस्वां और राजेन्द्र राठौड़ के रिश्ते दारिया एनकाउंटर में राजेन्द्र राठौड़ के जेल जाने के बाद से ऐसे बिगड़े की अभी भी कड़वाहट है। कहते हैं राजेन्द्र राठौड़ इस बात से खफा हुए कि वे हर घड़ी में रामसिंह कस्वा के साथ रहे, लेकिन कस्वां ऐसी घड़ी में दूर हुए जब उनकी पार्टी के बड़े नेता उनके साथ थे। 

उसके बाद से ही दोनों के रिश्ते सामान्य नहीं रहे। राठौड़ ने सियासी समीकरण कुछ इस तरह के बनाए कि राम सिंह कस्वां और उनके सासंद पुत्र जिले की सियासत में भाजपा में अलग थलग पड़ गए। हालांकि ये सच है कि राहुल कस्वा की सक्रियता कम नहीं रही और वे सोशल मीडिया के साथ ग्रामीण इलाकों में भी सक्रिय दिखे। हालांकि राजेन्द्र राठौड़ इस बार तल्ख दिखे। यहां तक कि कुछ दिनों पहले उन्होंने फर्स्ट इंडिया न्यूज के कार्यक्रम संसद तक में साफ तौर पर कह दिया कि उनकी राय निश्चित तौर पर अलग है, लेकिन फिर भी पार्टी जो फैसला करेगी वो मंजूर है। 

राजेन्द्र राठौड़ की इस तल्खी को कस्वां परिवार ने पहले तो गम्भीरता से नहीं लिया। संसदीय सीट पर लगातार जीत के चलते वे आश्वस्त थे, शायद वे इस बात को भूल गए गए थे कि राजेन्द्र राठौड़ की नाराजगी के  बीच सासंद के पिता की करारी हार आलकमान को भी सोचने के लिए मजबूर करेगी। अब जबकि पहली भाजपा की सूची में राहुल कस्वां का नाम नहीं आया तो अनुभवी पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां को सियासत का गणित समझ आया। अपने पुत्र के खातिर रामसिंह कस्वा ने राजेन्द्र राठौड़ से मुलाकात भी की, पर कहा जा रहा है कि रिश्तों में जमी बर्फ पिघली नहीं है। इस बीच संघ ने खिलाड़ी देवेन्द्र झाझड़िया का नाम भी आगे बढ़ा दिया।  सांसद राहुल कस्वां को उम्मीद है कि उनके पिता और उनके पिछले कामों के चलते पार्टी उनके नाम पर ही मुहर लगाएगी। हालांकि वे पिता रामसिंह कस्वा की हार पर सफाई देते नजर आते है। 

भले ही रामसिंह कस्वां परिवार टिकट लाने में कामयाब हो जाए लेकिन ये कड़वा सच है कि पहली लिस्ट में नाम नहीं आने के बाद कस्वां परिवार को झटका लगा है और अब दिल्ली में अपने रिश्तों को टोटलने में लगे है। वहीं कहा जा रहा है दिल्ली आलकमान ने राजेन्द्र राठौड़ को साधने का इशारा किया है। कहा जा रहा है अब भाजपा कांग्रेस के नाम के बाद ही इस सीट पर गणित लगाकर नाम तय करेगी। 

...संवाददाता लक्ष्मण राघव की रिपोर्ट 

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