आखिर खजूर खाकर ही क्यों खोला जाता है रोजा

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/20 05:18

जयपुर: इस्लाम के पवित्र माह रमजान के दौरान प्रत्येक मुसलमान पर रोजा रखना फर्ज किया गया है। ऐसे में रोजा रखने वाला रोजेदार पुरे दिन भूखा प्यासा रहने के बाद जिस पहली चीज से रोजा इफतार करता है वो है खजूर. आईए जानते हैं आखिर इतने फलों में से रोजा इफतार के लिए खजूर को ही क्यों चुना गया है. 

इस्लाम के हिजरी कैलेंडर के नौंवें महिने का नाम रमजान है और इसी माह में मुसलमान पुरे महिने भर रोजे रखता है. रोजे का प्रारंभ इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद साहब के साथ जुड़ा हुआ है. रोजा रखने के लिए अलसुबह सादिक के समय जो खाना खाया जाता है उसे सहरी कहते हैं, वहीं रोजा खोलने को इफतारी कहा जाता है. रोजा खोलने के लिए खजूर का प्रयोग एक सुन्नत के रूप में माना जाता है, क्योंकि पैगम्मर मुहम्मद साहब ने इसी से अपना रोजा खोला था. खजूर से ही रोजा खोलने के लिए चुने जाने के पीछे उसमें छुपे सैंकड़ों गुण हैं.

खजूर के फायदे:
—इस्लाम में रोजा इफतारी के लिए खजूर का प्रयोग है सुन्नत
—खजूर से ही रोजा खोलने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी 
—खजूर करता है सबसे बेहतरीन एनर्जी बूस्टर की तरह कार्य
—मुुंह में चबाने के साथ ही शरीर में ग्लूकोज सप्लाई करता है खजूर
—न्यूट्रीएंट्स से भरा फल है खजूर, कहते है वंडर फ्रूट्स भी
—आयरन, मिनरल, कैल्शियम, अमीनो एसिड, फॉस्फोरस 
—और विटामिन्स से भरा खजूर सेहत के लिए है बड़ा खजाना 
—शरीर के लिए ल्यूब्रिकेन्ट की तरह करता है कार्य 

रोजा इफतारी में खजूर का प्रयोग आवश्यक माना गया है. इसके पीछे इसमें छुपे वे गुण हैं जो एक इंसानी शरीर को कई रूपों में स्वस्थ रहने में मदद करता है. जिस तरह पुरे दिनभर इंजन चलने पर उसमें आयल डाला जाना जरूरी है, उसी तरह से पुरे दिन का रोजा रखने के बाद खजूर खाना भी शरीर के लिए आवश्यक है. चिकित्सक भी रोजे के दौरान ही नहीं बल्कि आम दिनों में इसे खाने पर जोर देते हैं.

खजूर के चिकित्सकीय गुण:
—खजूर में होते है बी1, बी2, बी3, बी5, ए1 और सी विटामिन
—कोलेस्टोल फ्री होने से पाचन को करता है मजबूत
—एनीमिया, दांतो के दर्द, कब्ज और शरीर घटोन में करता है मदद
—पेट के कैंसर और आंखो कि रोशनी में भी है मददगार
—खजूर करता है इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का कार्य
—हीमोग्लोबिन बढ़ाने और उम्र घटाने वाला होता है खजूर 
—ग्लूकोज और फ्रक्टोज का बड़ा स्रोत होता है खजूर 
—कोलेस्ट्रॉल नहीं होने से खाया जाता है हर बीमारी में भी 
—खजूर में होते है डैमेज सेल और कैंसर से बचाव के भी गुण
—शरीर में पाचन, श्वसन, मानसिंक तंत्र को करता है मजबूत

खजूर में छुपे चिकित्सकीय गुणों के कारण ही इसे रोजा इफतारी का सबसे बेहतर जरिया बनाया गया है. हां ये जरूर है इसका प्रयोग आवश्यक रूप से करे इसलिए इस्लाम में सुन्नत के रूप में प्रयोग किया गया है. 

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 
 

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