विधेयक पास होने के बाद भी क्यों जारी है गुर्जर आंदोलन ? फिर हो रहा मंथन...

Nizam Kantaliya Published Date 2019/02/15 10:30

मलारना डूंगर(सवाईमाधोपुर)। गुर्जर समेत पांच जातियों को पांच फीसदी आरक्षण देने संबंधी विधेयक बुधवार को विधानसभा में पास कर दिया गया, उसके बाद देर रात राज्यपाल ने भी विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिये। सरकारी नौकरियों के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में अलग से आरक्षण देने का प्रावधान किये जाने के बाद भी गुर्जर नेता डटे हुए है,,,ऐसा क्यों है कि विधानसभा द्वारा विधेयक पेश किये जाने के बाद गुर्जर आन्दोलन को जारी रखे हुए है।

राज्य में एक बार फिर से गुर्जर सहित 5 जातियों के आरक्षण को लेकर विधानसभा में  विधेयक पारित हो चुका है। विधयेक पारित होने के कुछ घण्टे बाद ही इस पर राज्यपाल भी हस्ताक्षर कर चुके है,,,फिर भी गुर्जर  कर्नल बैंसला के नेतृत्व में आंदोलन जारी रखे हुए है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पूर्व में पारित हो चुके आरक्षण विधेयकों का हश्र है। खास तौर से 2015 का आरक्षण अधिनियम सभी को याद है जो हाइकोर्ट से ही खारिज कर दिया गया था। ऐसे में गुर्जर नेताओ में अविश्वास बना हुआ है और वे अब सरकार पर दबाव बनाकर भविष्य में आने वाली कानूनी पेचीदगियो की जिम्मेदारी तय करना चाहते है।

गुर्जर नेता कर्नल बैंसला के खास कानूनी सलाहकारों में भी ये दोनों ही नेता शामिल है लेकिन ये भी इस विधेयक को लेकर आशंकित है। यही कारण है कि कर्नल बैंसला ने विजय बैंसला को आगे कर समाज के विधायकों और मंत्रियों को जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया है। इस एक कदम के जरिये कर्नल बैंसला एक तीर से कई निशाने साध रहे। मंत्री और विधायकों से समाज के सामने खड़ा कर वे खुद भी जिम्मेदारी से सुरक्षित रहेंगे। भविष्य में कोई कानूनी पेचदगी से अगर विधेयक  का हश्र पहले की तरह होता है तो समाज सीधे उन्हें कुछ नही कहेगा। दूसरा इस कदम से वे सभी गुर्जर मंत्रियों और विधायकों को हमेशा के लिये समाज और खुद से जुड़े रहने के लिये मजबूर कर सकेंगे। वही सबसे बड़ी बात गुर्जर में भी वो सबसे बड़े पॉवर सेंटर बने रहेंगे। 

बहरहाल विधानसभा से पारित किये गये गुर्जर आरक्षण के विधेयक को लेकर आज गुर्जर नेता मंथन में जुटे है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्दी ही ये आंदोलन अपने अंतिम पड़ाव पर होगा। 

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