क्यों बढ़ रहा है रेव पार्टी का प्रचलन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/31 12:31

जयपुर: वीकएंड में इन पार्टियों को इंजॉय करते हैं  पूरी रात गुलजार करने के बाद तड़के घरों को लौट जाते हैं जी हां आज का युवा इस जाल में फैशन और मस्ती के नाम पर फंसता जा रहा हैं.  

नये-नये नशे के साधन उपलब्ध: 
रेव पार्टियों की नई पनप रही संस्कृति अनेक विकृतियों का सबब बन रही है, जिसमें युवा पीढ़ी को नये-नये नशे के साधन उपलब्ध कराये जाते हैं. ये पार्टीज इतने गुप्त तरीके से ओर्गनइजे की जाती है की पार्टी के बारे में वे 'सर्किट' के बाहर के लोगों को जरा भी भनक नहीं लगने देते. देर रात तक चलने वाली इन पार्टियों में महफिलें जमती हैं, दिल्ली में हर वीकेंड पर फार्म हाउस एवं आलीशान बिल्डिंगों, होटलों में ये महफिलें सजती हैं. आखिर क्या परोसा जाता हैं इन पार्टीज में की युवा खींचा चला आता है इन पार्टीज की ओर, इन महफिलों में आने वाले लोगों को पूरी रात डांस, म्यूजिक, ड्रग्स और सैक्स का काकटेल मिलता है. इन रेव पार्टी में भारी मात्रा में विदेशी ब्रांड की शराब के साथ ब्रिक्स कोकिंग टैबलेट और शराब परोसी जाती है. रात भर उन्मुक्तता, अश्लीलता एवं सैक्स से भरपूर मनोरंजन तरह-तरह के नशे के साथ परोसा जाता है.

दिल्ली रोड और आउट स्कर्ट्स इस तरह की पार्टीज का अड्डा:
जयपुर में दिल्ली रोड और आउट स्कर्ट्स इस तरह की पार्टीज का अड्डा बनते जा रहें हैं दिल्ली और एनसीआर में एक के बाद एक पकड़ी जा रही रेव पार्टियों से स्पष्ट है कि दिल्ली का युवा वर्ग नशे की चपेट में आ चुका है. बीते महीने उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक फार्म हाउस में चल रही रेव पार्टी पर छापा मारा गया था, तब 192 लोगों को गिरफ्तार किया गया था जिनमें 31 युवतियां भी शामिल थीं. अब दिल्ली के छतरपुर में एक कम्पाउंड में रेव पार्टी पर छापेमारी की गई. दिल्ली पुलिस और एक्साईज डिपार्टमेंट की कार्रवाई में नाबालिग लड़कों और लड़कियों समेत एक हजार लोगों को पकड़ा गया. भारी मात्रा में शराब और नशीले पदार्थ पकड़े गये हैं. 

समाज एवं राष्ट्र के लिये खतरनाक: 
पंजाब की तर्ज पर दिल्ली एवं एनसीआर में बढ़ती रेव पार्टियां उन्मुक्त होने एवं नशे की अंधी सुरंगों में उतरने का एक माध्यम है, जो समाज एवं राष्ट्र के लिये खतरनाक साबित होती जा रही है. क्या ऐसी पार्टियां बिना स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के हो सकती हैं? यह सब कुछ पुलिस और ड्रग्स एवं नशे का धंधा करने वालों की सांठगांठ से ही होता है. इसमें सरकार की नीतियों पर भी प्रश्न खड़े होते हैं. 

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