क्या आसान होगा जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदना

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/17 05:35

नई दिल्ली:जम्मू-कश्मीर से स्पेशल स्टेटस का दर्जा खत्म होने के बाद यह बात हर ओर प्रचारित की जा रही है कि घाटी में कोई भी जाकर जमीन खरीद सकता है. लेकिन कई राज्य ऐसे हैं जिनके लिए विशेष प्रावधान के तहत हर किसी के लिए जमीन खरीदने पर प्रतिबंध है. जम्मू-कश्मीर में भी ऐसी ही कड़ी व्यवस्था की मांग उठने लगी है.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने की घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया पर कश्मीर घाटी में घर खरीदने और खुद के मालिक होने की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. संविधान के अनुच्छेद 35A के तहत बनाए गए नियमों से राज्य के बाहर के लोग जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकते थे. अब अनुच्छेद 370 के हटाये जाने के बाद जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो गया है, तो बाहरी लोगों को कश्मीर घाटी में संपत्ति खरीदने की कानूनी अड़चनें भी खत्म हो गई हैं.

'स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा अहम'
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर निर्मल सिंह ने कहा, 'हम जल्द ही जम्मू-कश्मीर में भूमि से संबंधित अधिकारों को प्रस्तावित करेंगे. स्थानीय नागरिकों के हितों की सुरक्षा की जाएगी. जिस तरह से पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कृषि योग्य भूमि नहीं खरीदी जा सकती, ऐसी ही व्यवस्था यहां भी होनी चाहिए. हालांकि केंद्र सरकार पहले से ही इस तरह के विकल्प पर विचार कर रही है.'
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर निर्मल सिंह ने यह भी कहा कि निजी सेक्टरों के आने से राज्य में उद्योग जगत को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि किसी भी तरह का दुरुपयोग नहीं होगा और जमीन के मालिकों का हित बरकरार रहेगा.

आसान काम नहीं है घाटी में घर खरीदना

 सरकार ने यह घोषणा की है कि नए नियम और कानून 31 अक्टूबर से लागू होंगे 31 अक्टूबर को पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारत के पहले केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन है. लेकिन, कश्मीर घाटी में जमीन या घर खरीदना आसान काम नहीं है.लद्दाख और जम्मू क्षेत्रों में यह आसान हो सकता है. कश्मीर घाटी में कानून और व्यवस्था की स्थिति वर्षों से बहुत नाजुक बनी हुई है.पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद कश्मीर घाटी में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती है
राज्य में आतंकवाद 1989 से बहुत अधिक पनपा और विस्तार होता गया। आतंकवाद को अलगाववाद का समर्थन हासिल हुआ, जिससे स्थानीय लोगों ने कश्मीर घाटी में बसने वाले बाहरी लोगों से दुश्मनी ठान ली. कश्मीर घाटी में रोजगार के अवसर बहुत सीमित हैं.सरकारी नौकरियों के बल पर ही वहां के लोगों को आर्थिक सुरक्षा मिल पाती है। निजी निवेश बिल्कुल न के बराबर रहा है, जिसकी वजह से निजी क्षेत्र में नौकरियां बहुत ही कम हैं कश्मीर घाटी में बसने के लिए अब जमीन और संपत्ति खरीदी जा सकेगी, लेकिन रोजगार के अवसर कम होने की वजह से वहां पर कौन बसना चाहेगा? 

आज भी ताजा हैं कश्मीरों पंडितों का जख्म

कश्मीरी पंडितों के पलायन की याद अभी भी ताजा है मौजूदा हालात में कश्मीर घाटी में घर खरीदना इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वहां के आतंकी समूह इसका अतिक्रमण नहीं करेंगे. जब 1989 में कश्मीर घाटी में आतंकवाद की शुरुआत हुई तो उसे जिहाद नाम दिया गया और कहा गया कि गैर-मुसलमान लोग घाटी को छोड़कर चले जाएं या गोलियों का सामना करें। हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के पर्चे अखबारों में प्रकाशित हुए थे। उन्होंने घोषणा की कि कश्मीर विशेष रूप से मुसलमानों के लिए है.

'परिवारों का खत्म हुआ विशेषाधिकार'

निर्मल सिंह ने कहा कि राज्य में अब तक कुछ ही परिवारों के पास विशेषाधिकार था. जबकि जम्मू, लद्दाख, गुर्जरों, बक्करवालों और वाल्मीकियों के साथ भेदभाव किया गया था.

संसद से अनुच्छेद 370 के जरिए राज्य को मिले स्पेशल स्टेटस का दर्जा हटाए जाने के बाद ही डॉक्टर निर्मल सिंह ने अपनी गाड़ी से जम्मू-कश्मीर का झंडा उतार दिया था. पहले उनकी गाड़ी पर तिरंगा और जम्मू-कश्मीर का झंडा लगा हुआ था, लेकिन अब उन्होंने जम्मू-कश्मीर का झंडा उतार दिया है. इसके बाद उनकी गाड़ी पर सिर्फ एक ही झंडा (तिरंगा) लगा हुआ है.

रियल स्टेल के लिए हो सकती है खुशखबरी

जो कश्मीरी पंडित और अन्य गैर-मुस्लिम लोग कश्मीर घाटी में सदियों से रह रहे थे, जिहादियों के दिलों में उनके लिए कोई जगह नहीं थीं. तत्कालीन सरकारें - राज्य में फारूक अब्दुल्ला और केंद्र में वीपी सिंह - कश्मीर घाटी से पांच लाख से अधिक गैर-मुस्लिमों के पलायन को रोकने में विफल रहे. अनुच्छेद 370 के हटाये जाने के कॉरपोरेट रियल एस्टेट के लिए खुशखबरी हो सकती है, जो भविष्य की संभावना को ध्यान में रखते हुए बड़े-बड़े भूखंड की खरीद कर सकते हैं. लेकिन देश भर में रीयल एस्टेट की स्थिति को देखते हुए फिलहाल उस पर भी संशय है.

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में घर खरीदने के लिए सरकार कुछ प्रतिबंध लगा सकती है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में इस तरह के प्रतिबंध पहले से ही लागू हैं

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