VIDEO: क्या सचमुच हो पाएगा राजस्थान में 27 या 28 जुलाई को मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार? देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: क्या सचमुच हो पाएगा राजस्थान में 27 या 28 जुलाई को मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार? देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार क्या सचमुच 27 या 28 जुलाई को हो पाएगा ? इस पर आलाकमान से जुड़े सूत्रों ने खुलासा करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल के बारे में अब सब कुछ फाइनल हो चुका हैं. पायलट कैम्प से आने वाले लोगों के नाम भी फाइनल हो चुके हैं. ड्रॉप होने वाले और नए मंत्री बनने वाले लोगों के नाम भी फाइनल हो चुके हैं, लेकिन शपथ ग्रहण की FINAL DATE अभी तक तय नहीं हो सकी. सुलह कमेटी अपनी रिपोर्ट फाइनल कर चुकी  हैं.

केसी वेणुगोपाल और अजय माकन अपनी फाइनल सिफारिशें दे चुके हैं. इस रिपोर्ट पर अब सोनिया गांधी की भी मंजूरी की खबर हैं. अलबत्ता दिल्ली की 27 या 28 जुलाई को शपथ दिलाने की कोशिश है. अब इस सारे माहौल में एक यक्ष प्रश्न उठता है? यदि सब कुछ फाइनल हो चुका है, तो फिर इंतजार किस बात का है ? इस बारे में 10, जनपथ से जुड़े एक सूत्र ने अपनी मजबूरी या विवशता दर्शायी. कहा कि अभी तक सीएम गहलोत से फाइनल बातचीत नहीं हो सकी है और गहलोत का रुख और मूड़ जाने बिना शपथ ग्रहण नहीं हो सकता हैं और गहलोत का मूड जानने या उन्हें मनाने की सबसे बड़ी चुनौती है.

आलाकमान से जुड़ा हर व्यक्ति इस UNPLEASANT EXERCISE से बचना चाहता हैं. पहले गहलोत के दिल्ली जाकर सोनिया से चर्चा करने की संभावना थी, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से गहलोत ने दिल्ली जाने में असमर्थता जताई. ऐसे में अब आलाकमान के सामने गहलोत की सहमति जुटाने के दो विकल्प थे. पहला यह कि खुद सोनिया गांधी गहलोत को फोन करे और दूसरा यह कि दिल्ली से कोई सीनियर आदमी जयपुर आकर गहलोत को मनाए. इस पृष्ठभूमि में आज रात वेणुगोपाल और माकन जयपुर आ रहे हैं.

इसलिए अब गहलोत-वेणुगोपाल की बातचीत के बाद ही तस्वीर साफ होगी. दूसरी ओर गहलोत कैंप से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि गहलोत आज रात या कल करेंगे वेणुगोपाल से दो टूक और मन की बात करेंगे. आखिर 102 वफादार विधायकों को छोड़कर कैसे बना दे पायलट कैंप के 4-5 बागी विधायकों को मंत्री ? ऐसे में क्या वेणुगोपाल साहस जुटा पाएंगे ? गहलोत को मंत्रिमंडल विस्तार का सोनिया मैडम का दो टूक संदेश देने का साहस? 

उधर आलाकमान पायलट कैंप को पक्का आश्वासन दे चुका हैं. अगले कुछ ही दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार, पीसीसी और राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट कैंप की भागीदारी का आश्वासन. वेणुगोपाल और माकन को एक फर्क समझना होगा. गहलोत और कैप्टन अमरिंदर और सिद्धू और पायलट के बीच का फर्क समझना होगा. ऐसे में राजस्थान की राजनीति में अब 48 घंटे बेहद CRITICAL AND CRUCIAL है. उधर गहलोत के लिए भी ये 48 घंटे परीक्षा की घड़ी है. मन की भावना,अंतर्आत्मा की आवाज और आलाकमान के दबाव के बीच परीक्षा की घड़ी
है. अब देखिए आगे क्या-क्या होता है? कुल मिलाकर मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ ग्रहण की तारीखों पर गहरे बादल छाए. 

...दिल्ली से अदिति नागर की रिपोर्ट 

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