सीतारमण के साथ बैठक के बाद बैन कैपिटल का बयान- भारत में और निवेश करने को लेकर आशान्वित, अगला दशक बेहद महत्वपूर्ण

सीतारमण के साथ बैठक के बाद बैन कैपिटल का बयान- भारत में और निवेश करने को लेकर आशान्वित, अगला दशक बेहद महत्वपूर्ण

सीतारमण के साथ बैठक के बाद बैन कैपिटल का बयान- भारत में और निवेश करने को लेकर आशान्वित, अगला दशक बेहद महत्वपूर्ण

बोस्टन: भारतीय कंपनियों में करीब पांच अरब डॉलर का निवेश करने वाली बेन कैपिटल के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी निजी निवेश कंपनी देश में "और निवेश" करने को लेकर आशान्वित है और अगला दशक भारत एवं अमेरिका दोनों के लिए वैश्विक आधार पर कारोबारों के निर्माण के लिए मिलकर काम करने के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होगा. 

बैन कैपिटल के को-चेयरमैन स्टीफन पग्ल्युका और को-मैनेजिंग पार्टनर जॉन कनॉटन ने सोमवार को यहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की. पग्ल्युका ने बैठक को "शानदार" बताया और कहा कि बैठक में गुजरात के वित्तीय सेवा जिले (गिफ्ट सिटी) पर भी चर्चा की गयी. सीतारमण वाशिंगटन में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठकों के साथ-साथ जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर (FMCBG) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इस समय एक हफ्ते की लंबी यात्रा पर अमेरिका में हैं. अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के दौरान, सीतारमण के अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन से मिलने की भी उम्मीद है. 

न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद, सीतारमण वहां से बोस्टन गयीं, जहां वह फिक्की और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में निवेशकों तथा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मिलेंगी. वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में छात्रों को भी संबोधित करेंगी. कनॉटन ने कहा कि हम भारत में 12 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं और भारत में हो रहे सुधारों को देखकर हमें वहां अपनी निवेश गतिविधि तेज करने का प्रोत्साहन मिलता है, खासकर उन व्यापक क्षेत्रों में जहां हम भागीदारी कर रहे हैं जैसे कि बैंकिंग, आउटसोर्सिंग और दवा क्षेत्र. 

उन्होंने कहा कि हम और भी निवेश करने की उम्मीद कर रहे हैं, हमने पहले ही पांच अरब डॉलर का निवेश किया है और हम इसमें तेजी देख रहे हैं. वहीं पग्ल्युका ने कहा कि बाजारों को और अधिक व्यापार-अनुकूल बनाया जा सकता है और मुझे लगता है कि इस समय भारत में ऐसा ही हो रहा है. इससे भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए काफी आकर्षक माहौल बनेगा. सोर्स-भाषा
 

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