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महिला दिवस विशेष :राजस्थान हाईकोर्ट को 71 वर्ष में मिली 10 महिला जज

महिला दिवस विशेष :राजस्थान हाईकोर्ट को 71 वर्ष में मिली 10 महिला जज

जयपुर: आज़ादी के बाद से देश को महिला राष्ट्रपति, महिला प्रधानमंत्री और कई महिला मुख्यमंत्री व गवर्नर मिल चुके हैं, पर अभी तक कोई महिला देश की मुख्य न्यायाधीश नहीं बन पाई है. यही हाल राजस्थान हाईकोर्ट के भी रहे हैं. राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनना तो दूर की बात है यहां पर महिला कोटे से अब तक एक जज की नियुक्ति नहीं हो पायी है. लंबे समय बाद ही सही जस्टिस प्रभा शर्मा की नियुक्ति से प्रदेश की आधी आबादी में थोडी खुशी जरूर हुई. 

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- देश की पहली महिला जज बनी थी जस्टिस अन्ना चैण्डी
- केरल हाईकोर्ट में 9 फरवरी 1959 को बनी थी जज
- सुप्रीम कोर्ट में पहली महिला जज बनी थी फातिमा बीवी
- 6 अक्टूबर 1989 से 29 अप्रैल 1992 तक रही सुप्रीम कोर्ट में जज
- 29 अगस्त 1949 को हुई थी राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना
- 1978 में राजस्थान हाईकोर्ट में हुई पहली महिला जज की नियुक्ति
- जस्टिस कांता भटनागर न्यायिक कोटे से बनी थी पहली महिला जज
- प्रदेश में अब तक केवल 4 महिला जजो कि हुई है नियुक्ति
- जस्टिस कांता भटनागर जस्टिस मोहिनी कपूर, जस्टिस निशा गुप्ता
- और जस्टिस मीना वी गोम्बर रही है राजस्थान हाईकोर्ट में जज
- जस्टिस प्रभा शर्मा बनी राजस्थान हाईकोर्ट की 5 वी महिला जज
- जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस निर्मलजीत कौर, जस्टिस जयश्री ठाकुर, जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा
- और जस्टिस सबीना तबादले के बाद बनी है राजस्थान हाईकोर्ट में जज

1950 में सुप्रीम कोर्ट के नए रूप में गठन के बाद पहली महिला न्यायाधीश मिलने में चार दशक का वक्त लगा. 6 अक्टूबर 1989 वो ऐतिहासिक दिन रहा जब जस्टिस फातिमा बीवी को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में वकील कोटे से किसी महिला के न्यायाधीश बनने में 68 साल का वक्त लगा. वर्ष 2018 में वकील कोटे से जस्टिस इंदु मल्होत्रा को जज नियुक्त किया गया. राजस्थान हाईकोर्ट को भी पहली महिला जज मिलने में करीब 39 साल का वक्त लगा. जब न्यायिक अधिकारी कोटे से 1978 में जस्टिस कांता भटनागर की जज के रूप में नियुक्ति हुई. लेकिन वकील कोटे से फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट को नियुक्ति का इंतजार है. 

न्यायिक अधिकारी कोटे से जस्टिस प्रभा शर्मा प्रदेश की 5 वीं महिला जज: 
राजस्थान हाईकोर्ट में नवनियुक्त 5 जजों के शपथग्रहण के साथ ही अब कार्यरत जजों की संख्या 27 हो गयी है. न्यायिक अधिकारी कोटे से राजस्थान हाईकोर्ट की जज नियुक्त होने वाली जस्टिस प्रभा शर्मा प्रदेश की 5 वीं महिला जज है. 29 अगस्त 1949 में राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना से लेकर अब तक वर्तमान में कार्यरत 27 जजों सहित कुल 204 जजों की नियुक्ति हुई है. इन 204 जजो में महिला जजो की संख्या मात्र 10 रही है. जिनमें से भी 5 महिला जज पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट और 1-1 गुजरात हाईकोर्ट,झारखंड हाईकार्ट से तबादले के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में जज बनी थी. जस्टिस प्रभा शर्मा की नियुक्ति के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यरत अब दो महिला जज हो गयी है. जस्टिस सबीना पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से तबादले के बाद 11 अप्रैल 2016 से राजस्थान हाईकोर्ट में नियुक्त हुई है. 

राजस्थान हाईकोर्ट में ये 10 महिला जज हुई है नियुक्त:
जस्टिस कांता भटनागर— 26 सितंबर 1978 से 14 जून 1992
जस्टिस मोहिनी कपूर — 13 जुलाई 1985 से 17 नवंबर 1995
जस्टिस मीना वी गोंबर—  19 सितंबर 2009 से 30 जुलाई 2013
जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा—  16 मार्च 1994 से 12 जुलाई 2008
जस्टिस निशा गुप्ता— 28 अप्रैल 2011 से 12 सितंबर 2015
जस्टिस बेला एम त्रिवेदी— 17 फरवरी 2011 से 8 फरवरी 2016
जस्टिस जयश्री ठाकुर— 5 जनवरी 2015 से 5 अक्टूबर 2016
जस्टिस कुमारी निर्मलजीत— 9 जुलाई 2012 से 20 नवंबर 2018
जस्टिस सबीना — 11 अप्रैल 2016 से निरंतर
जस्टिस प्रभा शर्मा — 6 मार्च 2020

राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के तीन दशक बाद 1978 में पहली महिला जज के रूप में जस्टिस कांता भटनागर की नियुक्ति कि गयी थी. वहीं हाईकोर्ट कि स्थापना के 7 दशक तक मात्र 4 महिला जजों को न्यायिक कोटे से जज नियुक्त किय गया. जस्टिस प्रभा शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट की 5 वी महिला जज है. जस्टिस प्रभा शर्मा भी न्यायिक कोटे से जज नियुक्त हुई है. हाईकोर्ट की स्थापना से लेकर अब  तक इस हाईकोर्ट में अधिवक्ता कोटे से किसी महिला जज की नियुक्ति नही हुई है. राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले एक दशक से महिला जज कि नियुक्ति की मांग लगातार तेज हुई है. 

मंत्री 15 जिलों में ओलावृष्टि से खराबे की स्थिति का करेंगे आकलन, सीएम गहलोत ने दिए निर्देश 

राष्टपिता महात्मा गांधी ने कहा था जिस बात को हम खुद पर लागू नहीं करते उस पर दूसरो को उपदेश नही दे सकते. न्यायपालिका को हम इस नजरिये से नही तौल सकते लेकिन ये भी एक कड़वा सच है कि न्याय की सर्वोच्च संस्थाओं में अब भी महिलाओं को सम्मान की दरकार है. हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में इन संस्थाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढेगी.

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नई दिल्ली:  चुनाव आयोग के सुझाव पर सरकार ने लोकसभा और विधानसभा उम्मीदवारों की अधिकतम व्यय सीमा 10 प्रतिशत बढ़ा दी है, क्योंकि कोविड-19 के कारण जारी दिशा-निर्देशों के चलते उन्हें प्रचार करने में परेशानी का सामना कर पड़ सकता है. इससे बिहार विधानसभा चुनाव और लोकसभा की एक तथा विधानसभा की 59 सीटों पर होने वाले उप चुनाव में उम्मीदवारों को मदद मिलेगी.

चुनाव आयोग ने एक महीने पहले कोविड-19 के मद्देनजर उम्मीदवारों के धन व्यय की सीमा 10 प्रतिशत बढ़ाने का सुझाव दिया था. कानून मंत्रालय द्वारा सोमवार रात जारी की गई एक अधिसूचना के अनुसार लोकसभा चुनाव लड़ रहा उम्मीदवार अब अधिकतम 77 लाख रुपये खर्च कर सकता है. पहले यह सीमा 70 लाख रुपये थी. वहीं विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार अब 28 लाख रुपये की जगह 30.8 लाख रुपये खर्च कर सकता है.

आपको बता दे कि उम्मीदवारों की प्रचार के लिए खर्च करने की अधिकतम सीमा हर राज्य में अलग है. चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अधिकतम व्यय सीमा किसी कारण से बढ़ाई गई है. लेकिन अधिसूचना में कारण का उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है. लोकसभा चुनाव से पहले 2014 में आखिरी बार अधिकतम व्यय सीमा बढ़ाई गई थी. 

बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 28 अक्टूबर, तीन नवम्बर और सात नवम्बर को होना है. अधिकतर उपचुनाव तीन नवम्बर को होंगे. बिहार में वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट और मणिपुर की कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनव सात नवम्बर को है. (सोर्स-भाषा)

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जैसलमेर: जिले के सांकड़ा क्षेत्र के माधोपुरा गांव की मेघवालों की ढाणी में पत्नी द्वारा पति की हत्या करने के मामले में आरोपी पत्नी के इस षड़यंत्र में उसकी मां व प्रेमी भी शामिल था. गौरतलब है कि रविवार को इस मामले का खुलासा हुआ था. मृतक कौशलाराम के परिजनों ने इस संबंध में सांकड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. मृतक के पिता की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मृतक की पत्नी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया था.

पूछताछ में पत्नी ने सारा सच कबूला: 
कौशलाराम के परिजन रविवार की सुबह जब उठे तो उन्हें कौशलाराम का शव पलंग पर पड़ा मिला. आसपास खून भी बिखरा था. ऐसे में परिजनों को उसकी पत्नी पर ही संदेह था तो उन्होंने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी डॉ. अजयसिंह ने मौका मुआयना किया और हत्या का मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने गिरफ्तार पत्नी ने पूछताछ की तो उसने हत्या करना स्वीकार करने के साथ-साथ सारा सच कबूल कर लिया. 

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पहले खुद ने नींद की गोली लेकर की जांच:
इस पूरे मामले में नाबालिग किशोरी की मां सुआदेवी पत्नी मोटाराम भी शामिल थी. उसने ही अपनी बेटी को नींद की गोलियां लाकर दी ताकि वह अपने पति को खिलाकर उसे सुला दे और बाद में उसकी हत्या कर दें. नाबालिग किशोरी ने पहले एक गोली लेकर यह जांच की कितनी देर तक नींद आती है. फिर अगले दिन अपने पति को खाने में गोलियां मिलाकर खिला दी. पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी पत्नी का अपने पिता के साथ काम करने वाले एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन उसके माता-पिता ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी. आरोपी ने बताया कि उसकी जिस लड़के के साथ शादी हुई थी वह शराबी था. उनकी शादी तीन माह पहले ही हुई थी. 

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विभाग ने आरोप लगाया कि क्रेमलिन की इसी इकाई ने 2016 के अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप किया था. अभियोग में छह प्रतिवादियों पर आरोप लगाए गए हैं. ये सभी जीआरयू के रूप में जाने जाने वाले रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी के वर्तमान और पूर्व अधिकारी बताए जा रहे हैं. अभियोजन पक्ष का कहना है कि ये हैकिंग रूस के भू-राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और कथित दुश्मनों को अस्थिर करने या दंडित करने के मकसद से की गई थी. 

इन हमलों की वजह से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और पेंसिल्वेनिया में स्वास्थ्य देखभाल, यूक्रेन में एक पावर ग्रिड और फ्रांसीसी चुनाव समेत जन-जीवन के एक बड़े हिस्से को बाधित किया था. पेंसिल्वेनिया के पश्चिमी जिले के लिए अमेरिकी अटॉर्नी स्कॉट ब्रैडी ने कहा कि ये हमले सबसे विनाशकारी है और अब तक के सबसे भयंकर साइबर हमलों में शामिल हैं. फिलहाल ये मामला आगे क्या तूल पकड़ता है, कुछ कहा नहीं जा सकता है. (सोर्स-भाषा)

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तारानगर(चूरू): गत रात्रि के करीब 1 बजे तारानगर से सरदारशहर रोड पर बालिया स्टैण्ड पर पराली चारे से भरे हुए ओवरलोड ट्रक व बाइक की टक्कर होने से 4 बाइक सवारों की मौके पर ही मौत हो गई. मिली जानकारी के अनुसार मृतक विक्रम कस्वां, मांगीलाल कस्वां, गोलू कस्वां, सुरेश कस्वां निवासी ढाणा कस्वां उम्र सभी की लगभग 20 से 22 वर्ष के थे जो अविवाहित बताये जा रहे हैं जो रात्री में ढाणा कस्वां से तारानगर बाइक पर आ रहे थे तो वहीं पराली चारे से भरा ओवरलोड ट्रक तारानगर से सरदारशहर की तरफ जा रहा था, बालिया बस स्टैण्ड पर आमने सामने की टक्कर में चारों युवकों को ट्रक ने कुचल दिया. टक्कर जबरदस्त बताई जा रही है, दुर्घटना के बाद शव बूरी तरह से कुचल गये थे. घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया. घटना की जानकारी मिलने पर चारों युवकों का शव पुलिस ने मोर्चरी में रखवाया और पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौप दिया. पुलिस ने ट्रक व बाइक को जब्त कर मामले की जांच कर रही है. 

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पराली से भरे ओवरलोड ट्रक यमराज से कम नहीं: 
हरियाणा, पंजाब की तरफ से आने वाले पराली चारे से भरे हुए ओवरलोड ट्रक यमराज से कम नजर नहीं आते. ये ट्रक पूरी सड़क को घेर कर चलते है जिससे चालक को दांयी बांया व पीछे की साइड से आ रहे वाहन नजर नहीं आने के कारण उक्त हादसो को अंजाम दे देते हैं. तारानगर से रोजाना सैंकड़ों की संख्या में एैसे ट्रक गुजरते है जो ओवलोड के साथ साथ अपनी बॉडी के बाहर झूल बनाकर पराली चारा भरा रखते हैं जिनके कारण सामने से आने वाले चालक के लिये साइड लेना भी मुश्किल हो जाता है तो वहीं पीछे वाले वाहन भी जल्दी से इन ओवरलोड वाहनों को ओवरटेक नहीं कर सकते. 

अब विप्रो और फोर्टम मिलकर देखेगीं मार्केट, 5 साल का एग्रीमेंट किया साइन

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नयी दिल्ली: विप्रो लि. को फोर्टम से ऐप्लिकेशन प्रबंधन (एएमएस) तथा सेवा एकीकरण एवं प्रबंधन (एसआईएम) का पांच साल का अनुबंध  साइन किया है. आपको बता दे कि फिनलैंड मुख्यालय वाली फोर्टम दुनिया की प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा कंपनियों में से है. 

विप्रो ने मंगलवार को बयान में कहा कि पांच साल के अनुबंध के तहत वह 18 देशों में 11,500 प्रयोगकर्ताओं के लिए फोर्टम के ऐप्लिकेशन पोर्टफोलियो का प्रबंधन करेगी.  इसके अलावा वह कारोबार की दृष्टि से महत्वपूर्ण ऐप के लिए चौबीसों घंटे समर्थन उपलब्ध कराएगी. 

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ने कहा कि वह अपने कृत्रिम मेधा (एआई) तथा ऑटोमेशन मंच विप्रो होल्म्स के जरिये प्रोसेस ऑटोमेशन से अंतिम प्रयोगकर्ताओं के लिए अनुभव को बेहतर बनाएगी. इस करार के वित्तीय पक्ष का खुलासा नहीं किया गया है. 

घोषणा के बाद फोर्टम के उपाध्यक्ष  तुओमास सलोसारी ने कहा है कि हमने विप्रो के लचीले और दक्ष समाधान उपलब्ध कराने के अनुभव और क्षमता को देखते हुए उसे अपना भागीदारी चुना है. कोरोना त्रासदी के बीच ये जोड़ कितना कारगर होगा ये तो वक्त ही बताएगा. (सोर्स-भाषा)

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केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश, कैप्टन जमकर साधा निशाना

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चंडीगढ़: देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इस बीच आज पंजाब विधानसभा में इन कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर दिया है. इसके साथ ही तीन एक्ट भी पेश किए गए. ऐसे में पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया:
मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया. बिल पेश करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वे केंद्रीय कृषि कानून की आलोचना करते हैं. केंद्र सरकार इस एक्ट को वापस ले, इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है. इस कानून से किसानों का भला नहीं होगा, बल्कि उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा.

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इलेक्ट्रिसिटी बिल में भी जो बदलाव किए गए: 
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रस्ताव पेश करने के बाद कहा कि तीन कृषि कानूनों के अलावा इलेक्ट्रिसिटी बिल में भी जो बदलाव किए गए हैं, वो भी किसान और मजदूरों के खिलाफ हैं. इससे पंजाब के साथ हरियाणा और वेस्ट यूपी पर भी असर पड़ेगा. 

अब धरना खत्म कर दें और काम पर लौटें:
विधानसभा में केंद्र के कानूनों के खिलाफ तीन नए बिल पेश किए गए, जो केंद्र द्वारा लाए कानूनों के बिल्कुल अलग हैं और एमएसपी को जरूरी करते हैं. पंजाब सीएम ने रेलवे ट्रैक पर बैठे किसानों से अपील की है कि अब धरना खत्म कर दें और काम पर लौटें, इन कानूनों के खिलाफ हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. 

महिला से सामूहिक दुष्कर्म, चार गिरफ्तार

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चित्रकूट: उत्तर प्रदेश से महिला के साथ सामूहिक ज्यादती का मामला सामने आया है. प्रदेश के चित्रकूट जिले की कर्वी कोतवाली पुलिस ने एक महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.  हैरत की बात ये है कि आरोपियों में एक महिला भी शामिल है. 

कर्वी कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अनिल पाठक ने बताया कि रैपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 35 वर्षीय महिला ने रविवार को रामनगर गांव के रहने वाले राजेश साहू और बरुई गांव के चिमन पटेल के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का और कर्वी के कसहाई रोड़ निवासी रेवतीरमण, उसकी पत्नी विद्या व बेटे मोनू के खिलाफ घटना की साजिश रचने का मामला दर्ज करवाया है. 

उन्होंने बताया कि मामले में चिमन पटेल को दुष्कर्म करने और रेवतीरमण, उसकी पत्नी विद्या और बेटे मोनू को साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. फरार आरोपी राजेश साहू की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है, मगर वो अभी भी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच पाया है. 

एसएचओ ने दर्ज प्राथमिकी के आधार पर बताया कि पीड़िता को 28 सितंबर को राजेश व चिमन पटेल किसी बहाने से कर्वी ले आये और यहां कसहाई रोड़ स्थित रेवतीरमण के घर में दोनों ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और इसके बाद उसे उसे प्रयागराज ले जाया गया, जहां दुष्कर्म करते रहे और बाद में वहीं छोड़कर फरार हो गए.

उन्होंने बताया कि सोमवार को पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया है, लेकिन अभी रिपोर्ट नहीं मिली है. फिलहाल आरोपियों को गिकफ्तार किया जा चुका है और चिकित्सकीय रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है क्योंकि उसके बाद  ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है. (सोर्स-भाषा)

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मैच फिक्सिंग मामला: फुटबॉल संघ के उप प्रमुख रोमन बरबर ने दिया इस्तीफा

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प्राग:  मैच फिक्सिंग मामला में नया मोड़ आया है जहां चेक फुटबॉल संघ के उप प्रमुख रोमन बरबर ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. मैच फिक्सिंग प्रकरण में संदिग्ध भ्रष्टाचार के कारण पिछले हफ्ते पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद बरबर ने यह कदम उठाया है. फुटबॉल संघ के अध्यक्ष मार्टिन मलिक ने सोमवार को कार्यकारी समिति की बैठक के बाद बरबर के कदम की घोषणा की है. 

कार्यकारी समिति ने साथ ही शीर्ष दो पेशेवर लीग के सदस्यों को छोड़कर रैफरियों की पूरी समिति को बर्खास्त कर दिया गया है.  चेक गणराज्य की पुलिस ने रैफरी और अन्य फुटबॉल अधिकारियों सहित 20 लोगों को निशाना बनाते हुए भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग जांच के संदर्भ में शुक्रवार को संघ मुख्यालय पर छापा मारा था और 19 लोगों को हिरासत में लिया है. बरबर सहित चार लोग अब भी पुलिस हिरासत में हैं और आगे कार्यवाही जारी है. (सोर्स-भाषा)

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