Holi festival 2020: हर्बल गुलाल और बिंदास होकर खेलिए होली, यहां पर महिलाओं ने बनाया प्राकृतिक गुलाल

Holi festival 2020: हर्बल गुलाल और बिंदास होकर खेलिए होली, यहां पर महिलाओं ने बनाया प्राकृतिक गुलाल

Holi festival 2020: हर्बल गुलाल और बिंदास होकर खेलिए होली, यहां पर महिलाओं ने बनाया प्राकृतिक गुलाल

कोटड़ा(उदयपुर): उदयपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कोटड़ा में राजीविका से जुड़ी महिलाएं अभी हर्बल गुलाल बनाने में लगी हुई है. होली के त्योहार को देखते हुए इन महिलाओं ने रोजाना एक क्विंटल से अधिक हर्बल गुलाल बनाया. इस गुलाल को बाजार में दो सौ रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है. कोटड़ा तहसील के गोगरुद में राजीविका महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड की महिलाएं आगामी होली के त्योहार को लेकर फूलों से हर्बल गुलाल बना रही है.

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स्वंय सहायता समूह की साठ महिलाये पिछले माह 27 फरवरी से यह हर्बल गुलाल बना रही है और प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक मात्रा में गुलाल का निर्माण कर रही है. वर्तमान में यह महिलाएं एक हजार किलो से अधिक गुलाल का निर्माण कर चुकी है. इस गुलाल को समिति द्वारा बाजार में दो सौ रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है. महिलाओं द्वारा बनाये गए इस गुलाल की डिमांड हिमाचल प्रदेश,दिल्ली,कोलकाता,बिहार,महाराष्ट्र सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आ चुकी है. 

ऐसे बनता है हर्बल गुलाल..
हर्बल गुलाल बनाने के लिए महिलाएं आस पास के जंगल से पलाश के फूल,रजके के पत्ते व अन्य फूलों की पत्तियां इकट्ठा करके लाती है. इसके बाद इनको साफ पानी से धोया जाता है और पानी में उबाला जाता है. इस मिश्रण को छानकर ठंडा करते है फिर इनमें अरारोट मिलाकर सुखाया जाता है और गुलाल का स्वरूप दिया जाता है. तीन दिन की इस प्रक्रिया में एक दिन फूल व पत्तियां बीनने में लगता है दूसरे दिन इन्हें पानी मे उबालकर तैयार करने में और तीसरा दिन इसे सुखाने में. यह गुलाल पूर्णतः प्राकृतिक होता है जो कि शरीर पर किसी प्रकार का नुकसान नही पहुंचाता है, जबकि बाजार में मिलने वाला गुलाल केमिकल युक्त होता है जो कि शरीर के लिए हानिकारक होता है.

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गुलाल की लागत सौ रुपये प्रति किलो:
स्वय सहायता समूह द्वारा बनाए गए इस गुलाल की लागत सौ रुपये प्रति किलो  आती है. वहीं इस गुलाल को समिति द्वारा बाजार में दो सौ रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है. इस प्रकार प्रति किलो सौ रुपये की आय होती है. यह आय प्रगति महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड गोगरुद में जमा होगी, जिसे सभी सदस्यों में समान भाग में विभाजित कर दिया जाएगा. वहीं फूल बीनने वाली महिलाओं को ढाई सौ से तीन सौ रुपए तक मजदूरी दी जाती है.

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