विश्व पुस्तक दिवस विशेष: जैसलमेर के भादरिया गांव में बने पुस्तकालय ने बनाई विश्व स्तरीय पहचान

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/04/23 11:39

जैसलमेर। पानी के समंदर में आप को सीप मिल सकते हैं, मोती मिल सकते हैं। लेकिन जरा कल्पना कीजिए कि रेत के समंदर में आपको मिट्टी के सिवाय और क्या क्या मिल सकता है? दूर दूर तक नजर डालें तो खीप और कूचे आपको जरूर नजर आएंगे, लेकिन परमाणु नगरी के पास स्थित धोरों की धरा में बसे भादरिया गांव की बात करें तो यहां रेत के समंदर में 'ज्ञान का भंडार' भरा पड़ा है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान से सटी सरहदी सीमा में स्थित भादरिया गांव में ज्ञान की पूरी गंगा इस मरूस्थल में समाहित है। इस ज्ञान की गंगा बहाने में मात्र एक ही व्यक्ति ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिससे देश का सर गर्व से ऊंचा हो जाता है।

जैसलमेर मरू प्रदेश में तपते रेतीले धोरों के बीच स्थित जैसलमेर जिला वैसे तो विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान रखता है। इस कडी में जिले के भादरिया गांव मे स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ भादरिया राय मंदिर की जगदम्बा सेवा समिति ने एक विशाल पुस्तकालय की नीव रखी है जिसे विश्व स्तर पर अपनी एक विशेष पहचान मिलने लगी है। पोकरण के पास स्थित शक्ति पीठ भादरिया गांव में देश का ही नहीं, अपित एशिया महाद्वीप की प्रमुख पुस्तकों का संग्रह है। अगर इस पुस्तकालय को एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा पुस्तकालय कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 

विश्व के समस्त पुस्तकालयों में मिलने वाली पुस्तकें एक ही स्थान पर 
दुनिया के सभी धर्मों के ग्रन्थ हो या फिर भारत के तमाम उच्च न्यायालयों के निर्णयों की पुस्तकें, छोटे-बड़े लेखकों के आलेख हो या फिर महापुरूषों की जीवन कथाएं या फिर विश्व के संविधान की पुस्तकें या फिर दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह। यहां तक ही नहीं, भारत के संविधान की मूल प्रति भी इस संग्रहालय में मौजूद है। इसके साथ ही समिति की ओर से समय समय पर कई और कार्य भी करवाये जा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इस समिति का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। समिति में विश्व विद्यालय के शोधकर्ताओं और लोगों के पढ़ने की प्यास को एक जगह पर बुझाने के उद्देश्य को लेकर विश्व के समस्त  पुस्तकालयों में मिलने वाली पुस्तकों को एक ही स्थान पर जमा करने व लोगों के इसके लिये अन्यत्र भटकना न पडे इसके लिये भागीरथी प्रयास किया है। समिति का प्रयास विश्व भर की पुस्तकों को संग्रहण करने व इसे दुनिया का सबसे बडा पुस्तकालय बनाने का अनूठा प्रयास है। इस पुस्तकालय में चार हजार लोग एक साथ बैठ कर पढ़ सकते हैं। पुस्तकालय के खजाने में विश्व के 11 धर्मों में से सात धर्मों का साहित्य मौजूद है। वर्तमान में पुस्तकालय मेंर रखी पुस्तकों को केवल श्रद्धालुओं के आने पर ही दिखाया जाता है। 

यह पुस्तकालय आज ऐशिया महाद्धीप के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक 
1981 में जगदम्बा सेवा समिति के संस्थापक व क्षेत्र के प्रसिद्ध संत हरिवंश सिंह निर्मल उर्फ भादरिया महाराजने भादरिया मंदिर में करवाये गये विशाल धर्मशाला एवं अन्य निर्माण के साथ एक पुस्तकालय की नींव भी रखी थी। यह पुस्तकालय आज ऐशिया महाद्धीप के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक है। यहां वर्तमान में एक करोड से अधिक कीमत की विभिन्न तरह की साहित्यिक, ऐतिहासिक, ज्ञानवर्धक एवं विधि से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हैं। पुस्तकों के संग्रहण का कार्य आज भी नियमित रूप से जारी है। पुस्तकालय में के लिये यहां पर दो विशाल भवन बनाये गये हैं एक में पुस्तकों के अध्ययन की व्यवस्था व दूसरे भवन में सैकडों की संख्या में निर्मित अलमारियों में इन्हें संग्रहित कर के रखा गया है जिन्हें सैकडों लोग एक ही समय में एकसाथ बैठकर अध्ययन कर सकते हैं।

दुलर्भ सहित्य को भी एकत्र करने का प्रयास 
भादरिया मंदिर परिसर के पास बने भूमिगत पुस्तकालय देखने जैसे ही पहुंचते हैं तो विशाल काय भवन में कदम रखते ही पुस्कालय की लाईटों का स्वीच स्वत: ही ऑन हो जाता है। वैसे ही पुस्तकों की अद्भुत दुनिया सामने होती है। वहीं अलमारियों में सजी पुस्तकें देखते ही लगता है कि ज्ञान के समंदर में पहुंच गये हैं। पुस्तक प्रेमियों ने इनके इस कार्य को बहुत ही अनुकरणीय बताया है। यहां देश के जाने माने साहित्यकारों की रचनाओं के साथ ही विश्व के दुलर्भ सहित्य को भी एकत्र करने का प्रयास हो रहा है। इस पुस्तकालय में विश्व के 11 धर्मो में से 7 धर्मों का सहित्य उपलब्ध है। कानून की आज तक की सभी पुस्तकें, वेदों की संपूर्ण श्रृंखलाएं, भारत का संविधान, विश्व का संविधान, जर्मन लेखक एफ. मैक्समूलर की रचनाएं, विश्व के विभिन्न संविधान, पुराण, आर्युवैदिक, इनसाईक्लोपीडिया, इतिहास, स्मृतियां, उपनिषद, देश के सभी प्रधानमंत्रियों के भाषण, विभिन्न शोध की पुस्तकों सहित हजारों तरह की पुस्तकें उपलब्ध हैं। 

पुस्तकों की देखरेख एवं संरक्षण के लिये 562 अलमारियां बनाई गई 
यहां विश्व के ऐसे दुलर्भ साहित्य को एकत्र करने के लिये माईक्रो सीडी बनाने की भी योजना है ताकि लोगों को विश्व की संपूर्ण जानकारी एवं सहित्य मिल सके। यहां पुस्तकों की देखरेख एवं संरक्षण के लिये 562 अलमारियां बनाई गई हैं जिनमें लाखों की संख्या में पुस्तकें रखी है। यहां 16 हजार फीट की रैंक बनाई गई है इसमें भी सभी पुस्तकों को रखा जायेगा। इसी तरह दुलर्भ साहित्य की माईक्रो सीडी बनाने व उसको रखने के लिये 18 कमरों का निर्माण करवाया गया है। यहां बनी चार गैलेरियों में से दो करीब दो सौ पचहत्तर फीट व अन्य दो तीन सौ सत्तर फीट लम्बी है। पुस्तकालय मे अध्ययन के लिये अलग से साठ गुण तीन सौ पैंसठ फीट साईज के विशाल हॉल का निर्माण करवाया गया है जिसमें चार हजार लोग एक साथ बैठ कर पढ सकते हैं जो कि संभवतः राजस्थान का पहला एक छत्तीय हॉल हो सकता है। 

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