जयपुर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: कोरोना के भय ने बढ़ाए मनोरोगी, कोरोना को हरा चुके 25 फीसदी मरीजों में अब ये दिक्कतें

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: कोरोना के भय ने बढ़ाए मनोरोगी, कोरोना को हरा चुके 25 फीसदी मरीजों में अब ये दिक्कतें

जयपुर: देश-दुनिया में मौत का दूसरा नाम बनकर सामने आई महामारी कोरोना के कई पोस्ट"साइड इफेक्ट" भी सामने आ रहे है.लाखों की तादाद में लोग भले ही कोरोना को मात दे चुके है,लेकिन इस बीमारी ने काफी संख्या में मनोरोगी बढ़ा दिए है.जी हां ये कोई हमारा दावा नहीं, बल्कि राजस्थान समेत देशभर में कोरोना के मामलों को लेकर जारी अध्ययन की बानगी है.एक्सपर्ट की माने तो कोरोना का हर दूसरा गंभीर मरीज बीमारी से ठीक होने के बाद भी अवसाद की दिक्कतें झेल रहा है.आखिर कोरोना में क्यों बढ़े मानसिक रोग और चिकित्सकों मुताबिक कैसे तनाव किया जाए कम.विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर देखिए फर्स्ट इंडिया की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट. कोविड 19 महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य से व्यापक रूप से असर दिखाया है.लोगों में डर, चिंता, अनिश्चितता, असुरक्षा की भावना, हताशा और यहां तक कि कई मामलों में तो अवसाद जैसे गंभीर बीमारी के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं.ऐसे पेशंट्स जो कोरोना संक्रमण को हराकर ठीक हो गए हैं, वे अब भी इस वायरस द्वारा दी गई दिक्कतों को झेलने पर मजबूर हैं.इसमें सबसे अधिक है मानसिक रोग.ऐसा नहीं है कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद सभी पेशंट्स को मानसिक परेशानियां हो रही हैं लेकिन जिन लोगों को यह संक्रमण होकर ठीक हो चुका है, उनमें आधे से अधिक मरीजों में मानसिक बीमारियां देखने को मिल रही हैं.

कोरोना से हुए ठीक, लेकिन अब ये दिक्कतें:
- कोरोना फाइटर्स ने कोरोना को तो हरा दिया, लेकिन वे अभी भी तनावग्रस्त है. 
- इन मानसिक बीमारियों में ऐंग्जाइटी (Anxiety),इंसोमनिया (Insomnia),
- डिप्रेशन (Depression) पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर (PTSD) जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं.
-इनमें भी ज्यादातर रोगियों में नींद ना आने की समस्या सबसे अधिक देखी जा रही है.
-इस स्थिति में ये लोग हर समय बेचैनी का अनुभव करते हैं.

 भारत में 19 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक विकास से ग्रसित:
-ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में मानसिक रोगियों की संख्या काफी अधिक है
-तकरीबन 19 करोड़ 73 लाख लोग किसी ना किसी प्रकार की मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं.
-यह आंकड़ा देश की कुल जनसंख्या का लगभग 14.3 प्रतिशत हैं.
-आंकड़े ये भी बताते हैं कि प्रत्येक बीस में से एक व्यक्ति अपने जीवन काल के दौरान जरूर अवसाद का शिकार होता है.
-यही हालात पूरी दुनिया का है, जिसका परिणाम आत्महत्या के रूप में सामने आता है
-दुनिया भर में में हर चालीस सेकंड में एक आत्महत्या की घटना होती है.

कोरोना से पीडित मरीजों में मानसिक विकार आने के पीछे चिकित्सकों के अलग अलग मत है.चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना में आइसोलेशन के दौरान मरीज अकेले में रहता है, जिसके चलते उसमें बीमारी के नेगेटिव आउटकम इफेक्ट ज्यादा रहते है.मरीज मल्टीपल मेडिकल कंसल्टेंसी लेता है, जिसके चलते कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है.इसके अलावा एक संभावित वजह ये भी बताई जा रही है कि कोविड-19 के कारण हमारे फेफड़ों में सूजन आती है.धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य अंगों की तरफ भी बढ़ने लगती है.जिन रोगियों में यह सूजन दिमाग तक पहुंच जाती है, उनके ब्रेन की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न होती है और उन्हें अलग-अलग तरह की मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

कुछ बातों का ध्यान रख हम मानसिक रोग की परेशानियों से बच सकते हैं:
डॉ अखिलेश जैन,विभागाध्यक्ष, मनोरोग ईएसआई मॉडल हॉस्पिटल भारत सरकार ने बताया कि कुछ बातों का ध्यान रख हम मानसिक रोग की परेशानियों से बच सकते हैं.

1. चिंता या भय महसूस होने पर विचलित नहीं हों. कोरोना जैसी परिस्थितियों में शुरुआत में इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक हैं. खुद को ये समझाकर शांत रखने की कोशिश करें कि इस बीमारी में रिकवरी की रेट काफी अच्छी है. ये सिर्फ कुछ समय की बात है.
2. कभी भी ऐसा सोचकर तिरस्कृत महसूस न करें कि आपको अलग-थलग रहना है. आइसोलेशन कोई सजा नहीं है बल्कि ये एक अवसर है कि आप खुद को फिर से स्वस्थ करें और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचाएं.
3. अनावश्यक एक साथ कई परामर्शों से बचें. विषय विशेषज्ञ डॉक्टर की ही सलाह सुनिए और उन पर विश्वास रखिए. अन्य किसी से सलाह तब ही लें जबकि तमाम कोशिशों को बावजूद स्थिति सुधर नहीं रही हो या और ज्यादा बिगड़ रही हो, वो भी इलाज कर रहे अपने डॉक्टर के संज्ञान में लाने के बाद.
4. सोशल मीडिया पर कई तरह के घरेलू नुस्खे आपस में शेयर किए जा रहे हैं. इन्हें अमल में लाने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें.
5. याद कीजिए अब से पहले कब आपके पास इतना खाली समय था ? अब तो आपके पास बहुतायत में वक्त ही वक्त है, तो अगर आपकी शारीरिक स्थिति अनुकूल है और डॉक्टर की अनुमति है तो अपनी दिनचर्या सुधारिए और दिन की शुरुआत हल्के व्यायाम, ध्यान और श्वास संबंधी व्यायाम से करें.
6. पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थ का सेवन सुनिश्चित करें, चाहे आपको खाने की इच्छा नहीं हो तब भी. भरपूर पोषण इस संक्रमण से जंग में सबसे अधिक भरोसेमंद संसाधन है जो आपकी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाकर संक्रमण घटाने में सबसे बड़ा हथियार है.
7. इस समय सोशल मीडिया का उपयोग एक वरदान या अभिशाप हो सकता है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका उपयोग कैसे करते हैं. दोस्तों, परिवार और प्रियजनों के साथ जुड़ें, अपने नवाचारों को शेयर करें. लेकिन ध्यान रहे भ्रामक सूचनाओं से प्रभावित ना हों.
8. थोड़े- थोड़े अंतराल में पर्याप्त आराम करें क्योंकि यह आपको शारीरिक रूप से तरोताजा कर देगा और इससे आपका दिमाग भी सकारात्मक सोचने के लिए तैयार होगा.
9. धूम्रपान, मदिरा या किसी भी अन्य मादक पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचें। नशा आपकी स्थिति को और खराब करता है.
10.  अपने परिवार के निरंतर संपर्क में रहें और अपनी स्थिति के बारे में उन्हें अवगत कराते रहें। कभी भी अपनी भावनाएं न छुपाएं, खुले मन से सबकुछ शेयर करें.

कोरोना वायरस का मानसिक स्थिति पर इस तरह हावी होना और मानसिक रोगों को बढ़ाने वाली स्थिति देखकर हेल्थ एक्सपर्टस लोगों से हर वो संभव प्रयास करने की अपील कर रहे, जिससे कोरोना उन्हें संक्रमित ना कर सके. यानी हाइजीन का ध्यान रखें, खान-पान संबंधी सतर्कता बनाए रखें. पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें. मास्क और हैंडसैनिटाइजर का उपयोग करें.उम्मीद है कि लोग भी इस सुझाव पर ध्यान देंगे, जिससे न सिर्फ कोरोना पर जीत हासिल की जा सकेगी,बल्कि मानसिक रोग की दिक्कतें भी दूर होगी.

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