'विश्व बाघ' दिवस आज: राजस्थान में पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार, लेकिन अब भी बाघ संरक्षण को लेकर गहन चिंतन कर ठोस फैसले लेने की जरूरत

'विश्व बाघ' दिवस आज: राजस्थान में पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार, लेकिन अब भी बाघ संरक्षण को लेकर गहन चिंतन कर ठोस फैसले लेने की जरूरत

'विश्व बाघ' दिवस आज: राजस्थान में पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार, लेकिन अब भी बाघ संरक्षण को लेकर गहन चिंतन कर ठोस फैसले लेने की जरूरत

जयपुर: आज वैश्विक  बाघ दिवस है. प्रदेश में पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार यानी 105 तक पहुंच गई है... लेकिन प्रदेश में बाघ कितने सुरक्षित हैं ? उनके लिए पर्याप्त रहवास की उपलब्धता है या नहीं ? और बाघ की शरण स्थली से गांवों के पुनर्वास की योजना कितनी सफल हुई ? ऐसे तमाम सवाल हैं जिन पर गहन चिंतन कर ठोस फैसले लेने की जरूरत है. 

राजस्थान में पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार पहुंची है. फिलहाल प्रदेश में कुल 105 बाघ हैं. रणथंभौर में क्षमता 45 से 50 बाघ की है लेकिन यहां पर बाघों की संख्या 72 पहुंच गई है. ऐसे में एक टाइगर रिज़र्व और घोषित होने की दरकार है, जिससे देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में सबसे बड़ा टाइगर कॉरिडोर बन जायेगा और यह सम्भवतः देश का भी सबसे बड़ा टाइगर कॉरिडोर साबित होगा. फिलहाल राजस्थान में तीन टाइगर रिज़र्व हैं अलवर का सरिस्का, सवाई माधोपुर-करौली का रणथंभौर और कोटा, झालावाड़, बूंदी और चित्तौड़गढ़ का मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिज़र्व. अब बूंदी के रामगढ को भी चौथे टाइगर रिज़र्व का दर्जा मिल गया है इससे सवाई माधोपुर से चित्तौड़ तक टाइगर कनेक्टिविटी हो जाएगी. 

राजस्थान में एक ऐसी होटल लॉबी है जो नहीं चाहती नए टाइगर रिज़र्व बने: 
वहीं अगर कुंभलगढ़ टाइगर रिज़र्व बनता है तो उदयपुर से राजसमंद से पाली और रावली टॉडगढ़ होते हुए अजमेर और उदयपुर के रणकपुर से सिरोही की माउंट आबू वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से फिर उदयपुर के फुलवारी की नाल तक टाइगर कॉरिडोर बनने की संभावना है. राजस्थान क्षेत्रफल में जरूर बड़ा है पर ज्यादातर मरु भूमि होने से यहां जंगल कम हैं वहीं मध्यप्रदेश में 6 टाइगर रिज़र्व हैं, राजस्थान में जो जंगल टाइगर रिज़र्व बनाए जा सकते हैं उसमें अप्रत्याशित देरी हो रही है. मध्यप्रदेश भारत का टाइगर स्टेट भी है यहां राजस्थान की तरह कोई होटल लॉबी नहीं है जो किसी भी टाइगर रिज़र्व को प्रभावित करती हो जबकि राजस्थान में एक ऐसी होटल लॉबी है जो नहीं चाहती कि राजस्थान में एक जगह विशेष की जगह कहीं और टाइगर रिज़र्व बने और अपने पैसे और राजनैतिक अप्रोच के बलबूते पर राजस्थान में नए टाइगर रिज़र्व की हर पहल को प्रभावित करती रहती है.

मुकुन्दरा तो शुरू से ही विवादों में रहा:
क्या कारण है सरिस्का अभी तक टाइगर टूरिस्म में अपने आप को स्थापित नहीं कर पाया. वहीं एक समय में सरिस्का से लगभग सारे बाघ खत्म हो गए थे. मुकुन्दरा तो शुरू से ही विवादों में रहा और अब यहां भी एक बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी एवं यहां 7 में से महज एक बाघ शेष बचा है. आपको बता दें एक तरफ हम 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाते हैं वहीं दूसरी तरफ रणथंभौर जैसे ख्यातनाम टाइगर रिज़र्व से 36 से अधिक बाघ गायब हैं. मुकुन्दरा में 6 बाघ संधिग्ध परिस्थितियों में मौत की नींद सो जाते हैं पर मुकुन्दरा प्रशासन की नींद नहीं उड़ती है. कुछ समय पहले रणथंभौर, सरिस्का और मुकुन्दरा तीनों जगह शिकारी कैमरा ट्रैप में कैद हुए, जिसमें मुकुन्दरा में हल्का केस बनाने की वजह से शिकारियों की जमानत भी हो गई. 

रणथंभौर से निकल कर कई युवा बाघ टेरीटोरी की तलाश में असुरक्षित स्थानों में भटक रहे:
वहीं कुछ अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं और लगातार शिकारियों और अवैध खनन कर्ताओं को पकड़ने का काम कर रहे हैं, लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते ऐसे ईमानदार अधिकारी भी अपना काम सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं. दूसरी तरफ रणथंभौर से निकल कर कई युवा बाघ टेरीटोरी की तलाश में असुरक्षित स्थानों में भटक रहे हैं.  लचर सरकारी तंत्र और अधिकारियों की उदासीनता,  एवं वन मंत्री की ल अरुचि के चलते राजस्थान में नए टाइगर रिज़र्व यानी कुम्भलगढ़ का काम अटका हुआ है. बाघों की लगातार मौतें हो रही हैं कई बाघ लापता हैं, अवैध खनन माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं. 

रामगढ़ विषधारी में अब तेजी से काम होना चाहिए:
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि रामगढ़ विषधारी में अब तेजी से काम होना चाहिए. वहीं कुंभलगढ़ को नए रिजल्ट के तौर पर घोषित करना चाहिए ताकि रणथंभौर से बाघों को इन नए टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जा सके और रणथंभौर में बाघों की संख्या को संतुलित किया जा सके. वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि राजस्थान के सभी टाइगर रिज़र्व की एडवाइजरी कमेटी को भंग कर एडवाइजरी कमेटियों का पुनर्गठन होना चाहिए व मानद वन्यजीव प्रतिपालकों की भी नियुक्तियां जल्द से जल्द होनी चाहिये. साथ ही साथ हर जिले में जो कलेक्टर के सानिध्य में पर्यावरण समिति होती है उनमें वन्यजीव क्षेत्र में जिन लोगों नें निःस्वार्थ काम किया हो ऐसे लोगों की नियुक्ति होनी चाहिए.
 

और पढ़ें