विश्व रक्तदान दिवस विशेष: डीडवाना रक्तदान का शहर है, जहां के लोगों ने रक्तदान को बना लिया अपनी परंपरा

विश्व रक्तदान दिवस विशेष: डीडवाना रक्तदान का शहर है, जहां के लोगों ने रक्तदान को बना लिया अपनी परंपरा

जयपुर: आज विश्व रक्तदान दिवस है. जन्मदिन पर आपने लोगों को मिठाइयां बांटते देखा होगा, किसी पुण्यतिथि पर दान पुण्य करते हुए देखा होगा, अपनी खुशी का इजहार करने के लिए दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए भी काफी लोगों को देखा होगा लेकिन आज हम आपको उस शहर में लेकर जा रहे हैं जहां इन मौकों पर लोग रक्तदान करते हैं और बचाते हैं कई जिंदगियां इसीलिए इस शहर को कहा जाता है रक्तदान की राजधानी.

रक्तदान करने के लिए तलाशते है मौका:
जी हां हम बात कर रहे हैं रक्तदान की राजधानी कहे जाने वाले डीडवाना शहर की, नागौर जिले का यह छोटा सा उपखंड जनसंख्या की दृष्टि से ज्यादा बड़ा नहीं है लेकिन यहां के लोगों का दिल बहुत बड़ा है. बड़ा दिल इसलिए हैं कि यहां के लोग दिल खोलकर रक्तदान करते हैं यहां लोग मौका तलाशते हैं रक्तदान करने का. यहीं वजह है कि यहां के ब्लड बैंक से अगर आप ब्लड लेना चाहते हैं तो बदले में आपको रिप्लेसमेंट की भी जरूरत नहीं है क्योंकि यहां पहले से दानदाताओं की भरमार है जो ना केवल डीडवाना की जरूरत को पूरा करते हैं बल्कि जिले की तीन चौथाई जनसंख्या की रक्त की जरूरत को भी पूरा करते हैं. 

COVID-19: पिछले 24 घंटे में 11 हजार 929 नए मामले, 311 मरीजों की मौत, कुल मरीजों की संख्या 3 लाख के पार

डीडवाना में रक्तदान के प्रति जागरूकता:
डीडवाना में रक्तदान के प्रति लोगों में जो जागरूकता देखी गई है वह शायद ही कहीं और आपको देखने को मिले लेकिन यह कुछ सामाजिक संस्थाओं की दो दशक की मेहनत का नतीजा है जिसकी वजह से डीडवाना के लोगों में ब्लड डोनेशन को लेकर इतनी उत्सुकता रहती है कि अकेले डीडवाना में हर साल 3.5 से 4 हजार यूनिट ब्लड डोनेशन होता है. केवल इसी महीने के आंकड़ों की बात करें तो 4-5 छोटे केम्प और 2 बड़े केम्प अब तक हो चुके हैं और इतने ही केम्प अभी इस महीने में और होने हैं. लॉक डाउन की वजह से केम्प पर ब्रेक जरूर लगा था लेकिन कोई जरूरतमन्द इस दौरान भी ब्लड के लिए यहां से खाली हाथ नहीं लौटा.

रिकॉर्ड तोड़ होता है रक्तदान:
डीडवाना में पिछले साल तक जब ब्लड बैंक नहीं हुआ करता था तो यहां बड़े-बड़े रक्तदान शिविरों का आयोजन होता था और उनमें रिकॉर्ड तोड़ रक्तदान भी होता था. रक्तदान के प्रति लोगों की जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की डीडवाना में दो साल पहले तक जो रक्तदान शिविर लगाए जाते थे उनमें कुछ शिविर तो ऐसे होते थे जिनमें 1500 से दो हजार यूनिट तक रक्तदान होता था लेकिन दो साल पहले फरवरी में यहां ब्लड बैंक खुलने के बाद बड़े रक्तदान शिविर लगने बंद हो गए क्योंकि लोगों को अब यह लगने लगा है की बड़े शिविर लगाने की बजाय जरूरत के वक्त जब ब्लड बैंक में रक्त की कमी महसूस की जाए तो हाथों हाथ वहां ब्लड डोनेट किया जाना चाहिए ताकि जरूरत के वक्त ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सके. 

राज्य में नॉन स्टेट सिविल सर्विस ऑफिसर्स से आईएएस में चयन मामला पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट

रक्तदान के लिए चले जन जागरूकता अभियान:
डीडवाना के लोगों में जिस प्रकार रक्तदान के प्रति जागरूकता है वैसी ही जागरूकता प्रदेश के हर कोने में होनी चाहिए और इसके लिए सरकार को जन जागरूकता अभियान चलाना चाहिए ताकि जिस तरह से डीडवाना के लोगों को जरूरत के वक्त खून के लिए भटकना नहीं पड़ता वैसे ही स्थिति पूरे प्रदेश और देश में भी बने और रक्त की कमी की वजह से कभी किसी को असमय मौत का मुंह ना देखना पड़े.

...फर्स्ट इंडिया के लिए नरपत ज़ोया की रिपोर्ट

और पढ़ें