युवा राजनीति जोश या होश बताएंगे युवा विधायक राजकुमार रोत, गुरूवार शाम 4 बजे  Digital Baal Mela के गूगल मीट पर होगा विशेष संवाद

युवा राजनीति जोश या होश बताएंगे युवा विधायक राजकुमार रोत, गुरूवार शाम 4 बजे  Digital Baal Mela के गूगल मीट पर होगा विशेष संवाद

युवा राजनीति जोश या होश बताएंगे युवा विधायक राजकुमार रोत, गुरूवार शाम 4 बजे  Digital Baal Mela के गूगल मीट पर होगा विशेष संवाद

जयपुर: राजनीति में युवा नेता होना देश को सुनहरे भविष्य की ओर इंगित करता है. आखिरकार देश को विकास की ओर ले जा रहे युवा की राजनीति में उत्साहिता हर किसी को निश्चिंत होने का अवसर देती है. ऐसे में क्या है युवा राजनीति में जोश और होश की सही परिभाषा. बताने आ रहे है नये नवेले विधायक राजकुमार रोत. जो कि वर्तमान में चौरासी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और राजस्थान विधान सभा के सदस्य हैं. विधायक राजकुमार रोत कल शाम 4 बजे बच्चों से Digital Baal Mela के गूगल मीट पर सीधा संवाद करेंगे और बच्चों को युवा राजनीति के सही मायने बताएंगे. 

विधायक राजकुमार रोत का परिचय:
26 जून 1922 में राजस्थान के डूंगरपुर में जन्में राजकुमार रोत साल 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में सबसे कम उम्र के विधायक के रूप में चुने गए थे. उन्होंने ये जीत राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की चौरासी विधानसभा सीट पर भारतीय ट्रायबल पार्टी से 14000 मतों से अपने नाम की. जहां एक समय राजकुमार डूंगरपुर के जंगली इलाकों में आदिवासियों में अधिकारों की अलख जगाने घूमा करते थे वहां उनका राजनीति में आना और पहली ही बार में विजय होना किसी चमत्कार से कम नहीं था.

साल 2014-15 में डूंगरपुर कॉलेज के अध्यक्ष रह चुके है राजकुमार:
साल 2014-15 में डूंगरपुर कॉलेज के अध्यक्ष रहे राजकुमार रोत का राजनीति में आने का लक्ष्य शुरू से ही साफ रहा. उन्होंने इसी साल राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएसएस) में बैठे और पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के परिणाम का इंतजार करते हुए अपने साथियों के साथ दूरदराज के आदिवासी बहुल इलाकों में जल, जंगल जमीन के मुददे पर आवाज उठानी शुरू कर दी. इसी तरह राजनीति में आकर राजकुमार रोत ने लोकतंत्र का मंदिर कहलाने वाली विधानसभा में आदिवासियों की आवाज बनने के लिए ये रास्ता चुना और जीत के बाद लगातार इसपर कार्यरत है. राजकुमार रोत ने राजनीति में आने के अपने मकसद पर कहा था कि राजनीतिक दलों ने आदिवासियों के वास्तविक मुद्दों की कभी गंभीरता से परवाह नहीं की. उनकी समस्याएं तथा मूलभूत जरूरतें जस की तस हैं. इसीलिए उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया और अपने तमाम तीर और तलवार के साथ चुनावी रण में कूद पड़े.

दो बहनों के बीच इकलौते भाई है रोत:
राजकुमार रोत के व्यक्तित्व जीवन की बात करें तो दो बहनों के इकलौते भाई रोत के पिता का निधन बहुत पहले हो गया था.उनकी बड़ी बहन सरकारी सेवा में हैं और वही उनकी प्रेरणा स्रोत रही हैं. रोत भील विद्यार्थी मोर्चा से जुड़े रहे हैं और अपनी बाइक से आसपास के सारे आदिवासी बहुल इलाकों की खाक छान चुके हैं. सीधा सरल व्यक्तित्व और अपनाइयत से भरी आवाज में आम लोगों से सीधे संवाद करने वाले रोत ने धीरे धीरे मतदाताओं में अपनी पैठ बना ली और उसी का नतीजा था कि एक कद्दावर राज्यमंत्री के सामने ‘राजनीति के इस रूंगरूट’ को 64119 मत मिले और वह 12,934 वोटों से जीत गए.

इस दिलचस्प जीत में विधायक बनने के बाद उनके लिए अपनी सरकारी नौकरी और करियर से ज्यादा महत्वपूर्ण विधानसभा में लाखों लाख आदिवासियों की आवाज बनना और ऐसी आवाज बनना जिसक अनदेखी नहीं की जा सके सबसे बड़ा लक्ष्य रहा. अब डिजिटल बाल मेला के मंच पर बच्चों की इसी आवाज को उठाने और देशभर के सामने लाने का हौसला देने के लिए राजकुमार रोत बच्चों से संवाद करेंगे. जिसमें वो बच्चों को राजनीति में जोश या होश का सबसे जरूरी अध्याय कराएंगे.

15 जून से शुरू हुआ था बच्चों संग राजनेताओं का सीधा संवाद:
'बच्चों की सरकार कैसी हो' में बच्चे हर दिन राजनेताओं से बात कर राजनीति के हर पहलू को समझ रहे है. ऐसे में इस संवाद की शुरूआत श्रम राज्यमंत्री टीकाराम जूली से हुई जिसके बाद अभी तक बच्चों संग संवाद में बीजेपी के युवा विधायक रामलाल शर्मा,सूजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल,छात्र नेता ललित यादव,विधायक अविनाश गहलोत,योगा ट्रेनर दिव्या शेखावत,अमेरिका की एल्डरमैन बनी भारतीय मूल की श्वेता बैद, मनोचिकित्सक डॉ अनीता गौतम, विश्वप्रसिद्ध रूमा देवी, आदर्श नगर विधायक रफीक खान,सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती,राजस्थान के उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी, राजस्थान के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी,डॉ अजयवर्धन आचार्य,मनोवैज्ञानिक डॉ मनीषा गौड़,पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी,डॉ सुभाष गर्ग,पीसीसी सचिव पुष्पेंद्र भारद्वाज. तो वही आरजे कार्तिक ,राज्यसभा सांसद नीरज डांगी और बच्चों को राजपरिवारों का लोकतंत्र में योगदान बताने के लिए राजसमंद सांसद दीया कुमारी ने बच्चों से सीधा संवाद किया. इसके अलावा आईपीएस पंकज चौधरी और नवलगढ़ विधायक राजकुमार शर्मा, कैबिनेट मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी बच्चों से संवाद किया. 

राजस्थान विधानसभा जाएंगे बाल राजनीति में शामिल हो रहे विजेता बच्चे
14 नवंबर को बाल राजनीति में शामिल हो रहे विजेता बच्चों को राजस्थान विधानसभा के विशेष बाल सत्र में जाने का मौका दिया जाएगा. जहां बच्चे अपनी सरकार और उनकी कार्यविधि को करीब से जानेंगे.ये बच्चों के लिए एक बड़ा मौका है जिसके लिए बच्चों को सिर्फ अपने मन की बात देश के सामने लाने के लिए डिजिटल बाल मेला में अपनी एंट्री भेजनी है और फिर देश जानेंगा बच्चों की जुबानी 'बच्चों की सरकार कैसी हो'..

Digital Baal Mela 2021 की वेबसाइड के साथ अब बच्चे व्हॉटसप पर भी भेज सकते है अपनी एंट्री: 
'डिजिटल बाल मेला सीजन2' में 'बच्चों की सरकार कैसी हो' की किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिसके लिए बच्चे रजिस्ट्रेशन के लिए वेबसाइड www.digitalbaalmela.com के साथ ही डिजिटल बाल मेला के व्हॉटसप नंबर 8005915026 पर भी अपनी एंट्री भेज सकते है.

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