प्रदेश में जीत तय करेंगे युवा, मगर नही मिलता औसत के अनुपात में प्रतिनिधित्व

Nizam Kantaliya Published Date 2018/10/22 10:00

जयपुर। प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है 6 अक्टूबर को आचार संहिता के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस सहित सभी दल अपने प्रत्याशियों की कवायद में जुटे है । राज्य में पौने पाच करोड़ मतदाता इन चुनावों में मतदान के लिए तैयार है । लेकिन क्या आप जानते है कि देश में होने वाले 5 राज्यो में से सबसे ज्यादा युवा वोटर भी राजस्थान में अपने मत का प्रयोग करेंगे । यही नही पहली बार अपने मत का प्रयोग करने वाले युवा मतदाता भी सर्वाधिक राजस्थान में ही है । 

विधानसभा चुनावों में जीत तय करेगे युवा मतदाता 
राज्य में कुल 4.74 करोड़ में 59 प्रतिशत युवा मतदाता 
39 साल से कम आयु के कुल 2.81 करोड़ मतदाता
करीब 6 लाख मतदाता करेगे पहली बार मत का प्रयोग
कुल युवा मतदाताओं का है करीब 10 प्रतिशत
चुनावों में राजस्थान में है सर्वाधिक युवा मतदाता
सभी दलो की नजर रहेगी इन युवा मतदाताओं पर 

राज्य में कुल पौने पांच करोड़ मतदाताओं में से युवा मतदाताओं की संख्या 59 प्रतिशत है जो आने वाले चुनाव में उम्मीदवारो की किस्मत का फैसला करेंगे । दोनो ही दलों की खास नजर भी पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओ पर भी रहेगी । लेकिन एक तथ्य ये भी है कि भले ही राज्य में युवा मतदाताओं की संख्या 2.81 करोड़ हो लेकिन विधानसभा में युवाओं की भागीदारी बेहद कम है।

चुनाव में युवा उम्मीदवार कि रही है हमेशा कमी
पिछले दो विधानसभा में भी नही बढा युवाओं का प्रतिशत
17.5 फीसदी विधायकों की उम्र रही 40 साल तक 
गहलोत सरकार में 39 वर्ष से कम के रहे 28 विधायक 
राजे सरकार में भी 39 वर्ष से कम के रहे 29 विधायक
लेकिन युवाओं को मंत्री पद देने में दोनो ही दल रहे कंजूस
मात्र 1 से 2 युवाओं को ही मिल पायी मंत्रिमण्डल में जगह
विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल की उम्र है 84 वर्ष 
वर्तमान सरकार में ही चार मंत्रियों की उम्र 70 से 75 साल

राज्य में भले ही युवा मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद हो और इन पर भाजपा कांग्रेस के साथ सभी दलो की नजर भी है । लेकिन जब प्रतिनिधित्व देने की बात आती है तो दोनो ही दलो की स्थिती एक जैसी हो जाती है । पिछले दो विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा दोनो ही दलो ने युवाओं को नजरअंदाज किया है । यही कारण है कि 200 विधानसभा सीटो में से मात्र 29 विधायक ही 39 वर्ष से कम आयु के है ।
मौजूदा भाजपा सरकार में मंत्रियों की औसत उम्र 60 साल है। जबकि पिछली गहलोत सरकार में भी मंत्रियों की औसत उम्र 59 साल थी। भले ही भाजपा-कांग्रेस का दारोमदार युवा वोटरों पर हो, लेकिन टिकट वितरण में युवाओं की अनदेखी की जाती रही है। 

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