खान महाघूस कांड के आरोपियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, आईएएस अशोक सिंघवी सहित आठ की याचिका खारिज

Nizam Kantaliya Published Date 2020/01/24 12:44

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने खान महाघूसकाण्ड के आरोपी पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी सहित 8 आरोपियों की ओर से दायर 11 याचिकाओं को खारिज कर दिया है. फैसला सुनाते हुए जस्टिस अशोक गोड़ की एकलपीठ ने कहा कि इस तरह के आर्थिक मामलो में अदालतों पर एक बड़ी जिम्मेदारी होती है. अदालत ने इन याचिकाओं पर दो दिन तक चली मैराथन सुनवाई के बाद 29 नवंबर 2019 को फैसला सुरक्षित रखा था. आज खुली अदालत ने में इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया. इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट के पाच जज पूर्व में सुनवाई से इंकार कर चुके है. वहीं जस्टिस जी आर मूलचंदानी ने खुली अदालत में सिंघवी द्वारा जज से संपर्क करने के प्रयास पर सख्त टिप्पणी की थी. जिसके बाद सीजे इन्द्रजीत महांति ने सभी याचिकाओं को जस्टिस अशोक गौड़ की एकलपीठ को सुनवाई के लिए नियत की. 

मनी लॉन्ड्रिंग की विशेष अदालत ने जारी किया था गिरफ्तारी वारण्ट: 
जयपुर मनी लॉन्ड्रिंग की विशेष अदालत ने 21 जनवरी 2019 को अशोक सिंघवी सहित सभी आरोपियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते हुए गिरफ्तारी वारण्ट जारी किये थे. सिंघवी सहित सभी आरोपियों ने विशेष अदालत द्वारा लिये गये प्रसंज्ञान और गिरफ्तारी वारण्ट के आदेश को चुनौति दी है. बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट विवेक बाजवा, राजेन्द्र प्रसाद और ए के शर्मा ने पैरवी करते हुए कहा कि ईडी की शिकायत में मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत अपराध के लिए आवश्यक तथ्य नही है. इसलिए अदालत इस शिकायत पर प्रसंज्ञान नही ले सकती. प्रसंज्ञान ले भी लिया है तो उसे गिरफ्तारी वारण्ट कि जगह सम्मान से बुलाना चाहिए. क्योंकि शिकायत के तहत लगाये गये सभी मूल आरोप पी सी एक्ट के तहत आते हैं.

आरोपियों पर शिकायत में गंभीर आरोप:
ईडी की ओर से एएसजी आर डी रस्तोगी और आनंद शर्मा ने याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि निचली अदालत द्वारा ईडी की शिकायत के आधार पर प्रसंज्ञान लिया है जो कि पूर्णतया न्यायोचित है. आरोपियों पर शिकायत में गंभीर आरोप है. शिकायत में गैर जमानती अपराध को देखते हुए अदालत का ये विवेकाधिकार है कि वो सम्मन से बुलाए या गिरफ्तारी वारण्ट से. ईडी की ओर से कहा गया कि अदालत को प्रसंज्ञान लेने के लिए ये नही देखना होता कि अपराध साबित है या नही, ये ट्रायल में तय होगा. शिकायत में लगाये गये आरोपो के आधार पर प्रसंज्ञान लिया गया है. दोनों पक्षो की बहस सुनने के बाद 29 नवंबर को जस्टिस अशोक गौड़ ने सभी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख था. 

क्या है मामला?
केंद्रीय खनन मंत्रालय की ओर से 30 अक्टूबर 2014 को नए खान आवंटन पर रोक लगा दी थी. आवंटन की रोक के सकुर्लर को अनदेखा करते हुए खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी, खान निदेशक डीएस मारू, तत्कालीन अतिरिक्त खान निदेशक पंकज गहलोत सहित अन्य 6 अफसरों की ओर से 24 नवंबर 2014 से 12 जनवरी 2015 के बीच 653 खनन पट्टों का आवंटन कर दिया गया था. एसीबी ने 16 सितंबर, 2015 को खान घोटाले का पर्दाफाश किया था. इस मामले में आईएएस डॉ अशोक सिंघवी, संजय सेठी, पंकज गहलोत, पुष्कर राज आमेटा, श्याम सुंदर सिंघवी, मोहम्मद रशीद शेख, धीरेंद्र सिंह चिंटू एवं तमन्ना बेगम फरार है. मनी लॉन्ड्रिग की विशेष अदालत ने प्रसंज्ञान लेने के साथ ही सभी आरोपियो को गिरफतारी वारण्ट से तामिल किया है.


 

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