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खान महाघूस कांड के आरोपियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, आईएएस अशोक सिंघवी सहित आठ की याचिका खारिज

खान महाघूस कांड के आरोपियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, आईएएस अशोक सिंघवी सहित आठ की याचिका खारिज

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने खान महाघूसकाण्ड के आरोपी पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी सहित 8 आरोपियों की ओर से दायर 11 याचिकाओं को खारिज कर दिया है. फैसला सुनाते हुए जस्टिस अशोक गोड़ की एकलपीठ ने कहा कि इस तरह के आर्थिक मामलो में अदालतों पर एक बड़ी जिम्मेदारी होती है. अदालत ने इन याचिकाओं पर दो दिन तक चली मैराथन सुनवाई के बाद 29 नवंबर 2019 को फैसला सुरक्षित रखा था. आज खुली अदालत ने में इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया. इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट के पाच जज पूर्व में सुनवाई से इंकार कर चुके है. वहीं जस्टिस जी आर मूलचंदानी ने खुली अदालत में सिंघवी द्वारा जज से संपर्क करने के प्रयास पर सख्त टिप्पणी की थी. जिसके बाद सीजे इन्द्रजीत महांति ने सभी याचिकाओं को जस्टिस अशोक गौड़ की एकलपीठ को सुनवाई के लिए नियत की. 

मनी लॉन्ड्रिंग की विशेष अदालत ने जारी किया था गिरफ्तारी वारण्ट: 
जयपुर मनी लॉन्ड्रिंग की विशेष अदालत ने 21 जनवरी 2019 को अशोक सिंघवी सहित सभी आरोपियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते हुए गिरफ्तारी वारण्ट जारी किये थे. सिंघवी सहित सभी आरोपियों ने विशेष अदालत द्वारा लिये गये प्रसंज्ञान और गिरफ्तारी वारण्ट के आदेश को चुनौति दी है. बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट विवेक बाजवा, राजेन्द्र प्रसाद और ए के शर्मा ने पैरवी करते हुए कहा कि ईडी की शिकायत में मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत अपराध के लिए आवश्यक तथ्य नही है. इसलिए अदालत इस शिकायत पर प्रसंज्ञान नही ले सकती. प्रसंज्ञान ले भी लिया है तो उसे गिरफ्तारी वारण्ट कि जगह सम्मान से बुलाना चाहिए. क्योंकि शिकायत के तहत लगाये गये सभी मूल आरोप पी सी एक्ट के तहत आते हैं.

आरोपियों पर शिकायत में गंभीर आरोप:
ईडी की ओर से एएसजी आर डी रस्तोगी और आनंद शर्मा ने याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि निचली अदालत द्वारा ईडी की शिकायत के आधार पर प्रसंज्ञान लिया है जो कि पूर्णतया न्यायोचित है. आरोपियों पर शिकायत में गंभीर आरोप है. शिकायत में गैर जमानती अपराध को देखते हुए अदालत का ये विवेकाधिकार है कि वो सम्मन से बुलाए या गिरफ्तारी वारण्ट से. ईडी की ओर से कहा गया कि अदालत को प्रसंज्ञान लेने के लिए ये नही देखना होता कि अपराध साबित है या नही, ये ट्रायल में तय होगा. शिकायत में लगाये गये आरोपो के आधार पर प्रसंज्ञान लिया गया है. दोनों पक्षो की बहस सुनने के बाद 29 नवंबर को जस्टिस अशोक गौड़ ने सभी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख था. 

क्या है मामला?
केंद्रीय खनन मंत्रालय की ओर से 30 अक्टूबर 2014 को नए खान आवंटन पर रोक लगा दी थी. आवंटन की रोक के सकुर्लर को अनदेखा करते हुए खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी, खान निदेशक डीएस मारू, तत्कालीन अतिरिक्त खान निदेशक पंकज गहलोत सहित अन्य 6 अफसरों की ओर से 24 नवंबर 2014 से 12 जनवरी 2015 के बीच 653 खनन पट्टों का आवंटन कर दिया गया था. एसीबी ने 16 सितंबर, 2015 को खान घोटाले का पर्दाफाश किया था. इस मामले में आईएएस डॉ अशोक सिंघवी, संजय सेठी, पंकज गहलोत, पुष्कर राज आमेटा, श्याम सुंदर सिंघवी, मोहम्मद रशीद शेख, धीरेंद्र सिंह चिंटू एवं तमन्ना बेगम फरार है. मनी लॉन्ड्रिग की विशेष अदालत ने प्रसंज्ञान लेने के साथ ही सभी आरोपियो को गिरफतारी वारण्ट से तामिल किया है.


 

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जयपुर: प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल आरयूएचएस में गंभीर कोरोना मरीजों को तत्काल "ऑक्सीजन" बैड उपलब्ध होगा. अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर फर्स्ट इंडिया की खबर के बाद RUHS अस्पताल प्रशासन ने आज से व्यवस्थाओं को दुरूस्त करना शुरू कर दिया है. इसके तहत पहले ही दिन ओपीडी में 15 ऑक्सीजन बैड का होल्डिंग एरिया बनाया गया है, जहां मरीज को भर्ती करते ही जरूरत के हिसाब से ट्रिटमेंट मिलेगा. इसके बाद उसे बैड की स्थिति के हिसाब से वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा.

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कानून में संशोधन कर आत्महत्याओं पर अंकुश लगाएं राजस्थान सरकार- रामलाल शर्मा

कानून में संशोधन कर आत्महत्याओं पर अंकुश लगाएं राजस्थान सरकार- रामलाल शर्मा

जयपुर: भाजपा के प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता व विधायक रामलाल शर्मा ने राजस्थान में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर कहा है कि राजस्थान सरकार कानूनों में संशोधन करे और आत्महत्याओं पर अंकुश लगाने का काम करें. रामलाल शर्मा का तर्क है कि पिछले 2 महीनों में राजस्थान में आत्महत्याओं की संख्या में बहुत तीव्र गति से बढ़ोतरी हो रही है. आत्महत्याओं के मुख्य रूप से दो कारण माने जाते हैं. बढ़ी हुई ब्याज दर पर लिए हुए पैसों के लिए सूदखोर द्वारा टॉर्चर किया जाना और नए युवाओं का जुए के अंदर फंसना और इन्हीं दो कारणों की वजह से आत्महत्या बढ़ी हैं.

वर्तमान में बने हुए कानून इतने प्रभावी नहीं:  
शर्मा ने कहा कि वर्तमान में बने हुए कानून इतने प्रभावी नहीं है कि इन पर अंकुश लगाया जा सके. जुए के अंदर पुलिस पकड़ कर लाती है और कार्रवाई करती है. लेकिन जमानती अपराध होने के नाते उनको तत्काल रिहा कर दिया जाता है और इसकी वजह से जुआ खेलने वाले अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है. अब तो जुए का प्रकार भी बदल गया है अब इसके लिए लोगों को इकट्ठा होने की आवश्यकता नहीं है. 

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राजस्थान सरकार कानूनों में संशोधन करें:
उन्होंने कहा कि कई मोबाइल ऐप ऐसी आ चुकी है कि लोग घर बैठे जुआ खेल सकते हैं. लेकिन तीव्र गति से बढ़ रही आत्महत्याओं का कारण जुआ और बढ़ी हुई ब्याज दर पर पैसा वसूल करना है. विधायक शर्मा ने मांग की है कि राजस्थान सरकार कानूनों में संशोधन करें या अध्यादेश जारी करें और जो आत्महत्यायें हो रही है, उन पर अंकुश लगाने का काम करें. 

राज्यसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

राज्यसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नई दिल्ली: राज्यसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. छोटी सी अवधि होने के बावजूद सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया जबकि हंगामे के चलते आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया गया. 

यह सत्र कुछ मामलों में ऐतिहासिक रहा:  
सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह सत्र कुछ मामलों में ऐतिहासिक रहा है. इस बार सत्र के दौरान उच्च सदन के सदस्यों को बैठने की नई व्यवस्था के तहत पांच अन्य स्थानों पर बैठाया गया. उच्च सदन के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. इसके साथ ही लगातार दस दिनों तक सदन ने काम किया. शनिवार और रविवार को भी सदन का अवकाश नहीं रहा. 

सत्र के दौरान छह विधेयकों को पेश किय गया:
उन्होंने कहा कि इस बार सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया गया या लौटा दिया गया. इसके साथ ही छह विधेयकों को पेश किय गया. सत्र के दौरान पारित किए गए विधेयकों में कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक, महामारी संशोधन विधेयक, विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक, जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक शामिल हैं. 

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इस सत्र के दौरान 104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ:
नायडू ने बताया कि इस सत्र के दौरान 104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ. उन्होंने कहा कि इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर व्यवधान के कारण जहां सदन के कामकाज में तीन घंटों का नुकसान हुआ वहीं सदन ने तीन घंटे 26 मिनट अतिरिक्त बैठकर कामकाज किया. उन्होंने कहा कि पिछले चार सत्रों के दौरान उच्च सदन में कामकाज का कुल प्रतिशत 96.13 फीसदी रहा है. 

पहली बार उपसभापति को हटाये जाने का नोटिस दिया गया:
नायडू ने कहा कि राज्यसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उपसभापति को हटाये जाने का नोटिस दिया गया. सभापति ने कहा कि उन्होंने इसे खारिज कर दिया क्योंकि वह नियमों के अनुरूप नहीं था. उन्होंने इसके बाद सदन में हुई घटनाओं को ‘‘पीड़ादायक’’ बताया. 

खाटूश्यामजी मंदिर अब 31 अक्टूबर तक रहेगा बंद, ऑनलाइन दर्शन की रहेगी व्यवस्था

खाटूश्यामजी मंदिर अब 31 अक्टूबर तक रहेगा बंद, ऑनलाइन दर्शन की रहेगी व्यवस्था

सीकर: विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम के मंदिर के पट अब 31 अक्टूबर तक बंद रहेंगे. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सीकर जिले में लागू हुई धारा 144 को देखते हुए श्याम मंदिर कमेटी ने यह फैसला लिया है. जिसे लेकर कमेटी ने आम सूचना भी जारी की है.

एक अक्टूबर से खुलना था मंदिर:
बता दें कि इससे पहले सरकार की ओर से मिली छूट के बाद खाटूश्यामजी का मंदिर एक अक्टूबर से खुलना था. जिसकी श्याम मंदिर कमेटी की ओर से पूरी तैयारियां भी कर ली गई थी. लेकिन, दो दिन पहले जिले में लागू हुई धारा 144 को ध्याम में रखते हुए मंदिर कमेटी की बैठक हुई. जिसमें श्याम मंदिर के पट अब 31 अक्टूबर तक बंद रहने का फैसला किया गया है.

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ऑनलाइन दर्शन की रहेगी व्यवस्था: 
खाटूश्यामजी मंदिर बंद होने की अवधि के दौरान श्याम भक्तो के लिए बाबा श्याम के ऑनलाइन दर्शनों की व्यवस्था जारी रहेगी. 

VIDEO: अब परकोटे में जमीन के अंदर दौड़ेगी मेट्रो, सीएम गहलोत ने दिखाई हरी झंडी

जयपुर: राजधानी के परकोटा क्षेत्र में अब बड़ी चौपड़ तक मेट्रो दौड़ेगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हरी झंडी दिखाने के साथ ही आज 7 साल का इंतजार खत्म हो गया है. सीएम गहलोत ने आज इसका वर्चुअल उद्घाटन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की. इसके साथ ही बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. अब लोग शाम 4 बजे से बड़ी चौपड़ से मेट्रो में सफर कर सकेंगे.  

इस मौके पर परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, मेट्रो सीएमडी भास्कर ए सावंत सहित कई अधिकारी सएमआर में मौजूद रहे तो बड़ी चौपड़ पर मुख्य सचेतक महेश जोशी और विधायक अमीन कागजी के साथ कई अधिकारी वहां मौजूद रहे. 

इस काम में केवल नौ पेड़ ही काटे गए:
सीएम गहलोत ने कहा कि जहां यह काम चल रहा था वहां हैरिटेज के साथ काफी व्यस्त इलाका था. ऐसे में कोई नुकसान नहीं पहुंचे इसका ध्यान रखना बड़ी चुनौती थी. बिना दुर्घटना के इतना बड़ा काम हो जाना आश्चर्य की बात है. उन्होंने कहा कि इस काम में केवल नौ पेड़ ही काटे गए. 

सेकंड फेज का काम भी शुरू करेंगे:
इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सीतापुरा से अंबाबाड़ी तक का 22 किमी का सेकंड फेज का काम भी शुरू करेंगे. इसमें एयरपोर्ट भी जुड़ जाएगा. इसके साथ ही जल्द ही मानसरोवर से दूसरे इलाकों को भी जोड़ा जाएगा. हमारी प्रायरिटी में होने के बाद भी कोरोना के चलते इसमें विलंब हो रहा है. इस पूरे काम के लिए सीएम गहलोत ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे जयपुर और कोटा का ध्यान रखते हैं. ऐसे में मेरी उनसे शिकायत रहती है कि वे जोधपुर का भी उतना ही ध्यान रखें. 

महिला के हाथों हो रहा है शुभारंभ:
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन से पहले मेट्रो को चलाने वाली पायलट शैफाली से अपने विचार रखने को कहा. इस पर शैफाली ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे भूमिगत मेट्रो चलाने का मौका मिला है. सीएम गहलोत ने शैफाली का उत्साहवर्धन किया और कहा कि यह अच्छी बात है कि इस काम का शुभारंभ एक महिला के हाथों हो रहा है.  

हमारी मेट्रो का किराया कम: 
इससे पहले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि और राज्यों की तुलना में हमारी मेट्रो का किराया कम है. मेट्रो के चलने से न केवल लोगों को आसानी होगी बल्कि इससे पॉल्यूशन भी कम होगा. लोग बिना किसी दुर्घटना के अपने घर सुरक्षित पहुंच सकेंगे. 

मेट्रो में टोकन ले कर यात्रा करने पर पूरी तरह रोक रहेगी:
कोरोना को देखते हुए मेट्रो प्रबधंन ने बचाव के लिए कई फ़ैसले लिए हैं. मेट्रो में टोकन ले कर यात्रा करने पर पूरी तरह रोक रहेगी. स्मार्ट कार्ड ले कर ही मेट्रो में यात्रा कर सकेंगे. साथ ही मास्क लगाना हर यात्री के लिए अनिवार्य होगा. जिन स्टेशनों पर सोशल डिस्टेसिंग नहीं होगी वहां मेट्रो नहीं रुकेगी. सभी मेट्रो स्टेशनों पर सेनेटाईजेशन की भी व्यवस्था की गई है.  

- 2014 में शुरू हुआ था मेट्रो फेज-1बी का निर्माण कार्य

- मार्च, 2018 तक इस प्रोजेक्ट को करना था पूरा

- 02 भूमिगत मेट्रो स्टेशन बने हैं परकोटे के करीब दो किमी के दायरे में

- 1126 करोड़ आया है फेज वन भी प्रोजेक्ट का खर्चा

- मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक आसानी से पहुंच सकेंगे लोग

- बड़ी चौपड़ से मानसरोवर के बीच की मेट्रो की दूरी 11.3 किमी हो जाएगी, जो 26 मिनट में तय होगी यानी एक ट्रेन को आने-जाने में 52 मिनट लगेंगे 

- मेट्रो परियोजना पर 3149 खर्च किए गए हैं और इसको पूरा करने में 10 साल से अधिक का वक्त लगा है

किफायती किराया:- 

- 2 स्टेशन तक 6 रुपए

- 3 से 5 स्टेशन 12 रु.

- 6 से 8 स्टेशन 18 रु.

- 9 से 10 स्टेशन 22 रु.

- यह किराया अन्य किसी भी साधन से किफायती है

 

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

अमृतसर: केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों के खिलाफ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में समर्थक भी दिखाई दिए. इस दौरान पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान बिल से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. क्या सरकार रोटी को आवश्यक वस्तु नहीं मानती है? 

सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे:  
इस दौरान सिद्धू ट्रैक्टर पर सवार दिखे. साथ ही किसानों के हाथ में तख्तियां थीं और कुछ ने काले झंडे भी लिए हुए थे. सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू पिछले काफी लंबे वक्त के बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. उनका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ रिश्ता सही नहीं रहा है, ऐसे में यही वजह है कि पंजाब की पॉलिटिक्स में कम एक्टिव हैं.  हालांकि, कोरोना संकट के दौरान भी वो लगातार सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाल मुद्दों पर बात रखते रहे. 

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पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ:
बता दें कि पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है. इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विश्वास में लेने में कामयाब नहीं हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस बिल को लेकर विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. और किसानों को विपक्ष की बातों में ना आने की सलाह दी जा रही है. 


 

हरियाणा में अदालतों का कामकाज हिंदी में शुरू करने की तैयारी, स्टाफ की होगी ट्रेनिंग

हरियाणा में अदालतों का कामकाज हिंदी में शुरू करने की तैयारी, स्टाफ की होगी ट्रेनिंग

चंडीगढ़: हरियाणा में अदालतों का कामकाज हिंदी में शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इस बारे में सरकार ने इसी साल जनवरी में फैसला कर लिया था लेकिन कोरोना संकट के चलते यह मामला बीच में अटक गया था. ऐसे में अब एक बार फिर सरकार इसे नए सिरे से शुरू करने जा रही है ताकि आम लोगों को इसका फायदा मिल सके. 

प्रदेश की अदालतों में स्टाफ की ट्रेनिंग भी करवाएगी: 
इसी के चलते सरकार अब प्रदेश की अदालतों में स्टाफ की ट्रेनिंग भी करवाएगी. इसके लिए एक ऐसी एजेंसी की तलाश की जा रही है जिसे न्यायिक मामलों में अंग्रेजी व हिंदी भाषा के प्रशिक्षण का अनुभव हो. इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे एडवोकेट जनरल हरियाणा बलदेव राज महाजन ने बताया कि इस मामले में सरकार की सोच बहुत स्पष्ट है. 

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अदालतों के कामकाज में अभी अंग्रेजी की ही आदत: 
इस बारे में उन्होंने बताया कि, प्रदेश की अदालतों में इस वक्त पूरा माहौल अंग्रेजीमय है. अदालतों के कामकाज में अभी अंग्रेजी की ही आदत है एसे में इसे एक सात शिफ्ट करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण है. इसी के चलते योजना को लागू करने से पहले अदालतों के स्टाफ की ट्रेनिंग करवाई जाएगी. 

विधायकों, अधिवक्ताओं के आग्रह पर सरकार ने लिया फैसला:
दरअसल, प्रदेश के 60 से अधिक विधायकों, हरियाणा के महाधिवक्ता समेत सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हरियाणा की अदालतों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी कामकाज शुरू करने के लिए हरियाणा सरकार को मांगपत्र भेजा था. इसी मांगपत्र के आधार पर सरकार ने फैसला लिया है. अब इसी फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने अगला कदम उठा लिया है. 

संसद में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर मायावती ने जताई नाराजगी, कहा - यह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला

संसद में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर मायावती ने जताई नाराजगी, कहा - यह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले दिनों किसान बिल पारित होने के दौरान संसद खासकर राज्यसभा में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है. मायावती ने ट्वीट करते हुए लिखा कि वैसे तो संसद लोकतंत्र का मंदिर ही कहलाता है फिर भी इसकी मर्यादा अनेकों बार तार-तार हुई है. वर्तमान संसद सत्र के दौरान भी सदन में सरकार की कार्यशैली व विपक्ष का जो व्यवहार देखने को मिला है वह संसद की मर्यादा, संविधान की गरिमा व लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है. अति-दुःखद.

विपक्षी सांसदों ने काफी हंगामा खड़ा किया था: 
गौरतलब है कि रविवार को राज्यसभा में किसान बिल पारित कराने के दौरान विपक्षी सांसदों ने काफी हंगामा खड़ा किया था. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने तो उप सभापति के आसान के पास जाकर रूल बुक तक फाड़ दी थी. 

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मंगलवार को सरकार ने सात विधेयक उच्च सदन से पास करा लिए:
रविवार की घटना के बाद हालांकि मंगलवार को सरकार ने सात विधेयक उच्च सदन से पास करा लिए. इस पर विपक्ष ने अपनी मांगे नहीं मानने पर संयुक्त रूप से सत्र का बहिष्कार किया. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि जब तक हमारे सांसदों के बहिष्कार को वापस नहीं लिया जाता और किसान के विधेयकों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता, विपक्ष सत्र का बहिष्कार करेगा.