VIDEO: कांग्रेस पर राजनीति में मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप, लेकिन हकीकत कुछ ओर !

Naresh Sharma Published Date 2019/03/19 09:26

जयपुर (नरेश शर्मा)। कांग्रेस पर भले ही राजनीति में मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते हो, लेकिन हकीकत यह है कि राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में कांग्रेस पिछले 62 सालों में केवल 9 मुस्लिम चेहरों को ही चुनावी मैदान में उतार पाई है। खास बात है कि अब तक एक ही चेहरा लोकसभा की चौखट चूम सका है। क्या इस बार मुस्लिम चेहरे को चुनाव में उतारा जाएगा या फिर राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का नाम पर कांग्रेस इस वोट बैंक को एक जुट रख पाएगी? खास रिपोर्ट-

लोकसभा चुनाव का शंखनाद होने के साथ ही, टिकट बंटवारे पर जयपुर से दिल्ली तक मंथन चल रहा है, लेकिन खास चर्चा है कि क्या कांग्रेस मुस्लिम चेहरा चुनाव में उतरेगी। कांग्रेस व अल्पसंख्यक वोटर को लेकर भले ही कितने चर्चे हो और भले ही पार्टियां अपने वोट बैंक को साथ में कवायद में भी जुट गई है लेकिन प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों को लेकर जो आंकड़े सामने आए वे चौंकाने वाले हैं। कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगे हैं लेकिन हकीकत यह है कि अब तक हुए लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक वर्ग से केवल एक ही प्रत्याशी जीतकर संसद में पहुंचा है। 1984 और 1991 में केवल कैप्टन अयूब ही दो बार झुंझुनू से लोकसभा का चुनाव जीतकर केंद्र में मंत्री बने थे।

प्रदेश में करीब 15 ऐसी सीट है जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में है। 11 फ़ीसदी से अधिक मुस्लिम मतदाता जयपुर, झुंझुनू, सीकर, बाड़मेर, जैसलमेर नागोर, अलवर, कोटा, अजमेर, जोधपुर, चूरू और टोंक सवाई माधोपुर में  खासा प्रभाव रखते हैं। इसके बावजूद टिकट के लिए  समाज के नेताओं को  खासी जद्दोजहद करनी पड़ती रही है। हालांकि राज्यसभा से कई अल्पसंख्यक मुस्लिम नेताओं को कांग्रेस ने संसद में प्रतिनिधित्व दिया है। हॉल ही हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 मुस्लिम चेहरे उतारे थे। उनमें से जीतकर आये किशनपोल  विधायक चुनकर आए अमीन कागज़ी का कहना है कि मुस्लिम समाज हमेशा से कांग्रेस के साथ रहा है।

आंकड़ों पर एक नजर डाले तो कांग्रेस ने 1952 में के पहले आम चुनाव से ही अल्पसंख्यक वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया था. 1952 में जोधपुर से यासीन नूरी, 1977 में चूरू से उस्मान आरिफ, 1984 से 1996 तक कैप्टन अयूब को झुंझुनू से, 1991 से 1996 तक चौधरी तय्यब हुसैन को भरतपुर से, 1998 में सैयद गुडएज को जयपुर से, 1999 में अबरार अहमद को झालावाड़ से, 2004 में आर रहमान को, अजमेर से 2009 में रफीक मंडेलिया को चूरू से तो 2014 में मोहम्मद अजहरुद्दीन को टोंक-सवाई माधोपुर सीट से कांग्रेस ने आजमाया था, लेकिन 62 साल में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों में से केवल कैप्टन अयूबी लोकसभा में पहुंचने में कामयाब हुए। ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने बड़े चेहरे नहीं उतारे। पिछले चुनाव में टोंक-सवाई माधोपुर से क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन अपनी स्टार इमेज के बावजूद राजस्थान से चुनाव नहीं जीत सके।

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