कार्रवाईयों के बावजूद बेखौफ मिलावटखोर, आखिर कैसे मिलेगा 'राइट टू हेल्थ' का अधिकार

Vikas Sharma Published Date 2019/07/18 07:43

जयपुर: राजधानी जयपुर समेत पूरे प्रदेश में खाद्य सामग्री के रूप में "जहर" बिक रहा है. चिंता की बात ये है कि पहले जहां मसाले, दूध, मावा, पनीर में ही मिलावट देखने को मिल रही थी, लेकिन अब डाई फूट्स समेत अन्य खाद्य पदार्थ भी मिलावट से अछूते नहीं है. आलम ये हो गया है कि चन्द रुपए के लालच में थडी-ठेला व्यवसायी घटिया खाद् सामग्री का कारोबार धडल्ले से कर रहे हैं, जिसके चलते लोगों को आए दिन फूड पाइजनिंग जैसे समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है. आईए इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के जरिए हम आपको बताते है कि विभाग की कार्रवाईयों की बानगी और इस दौरान सामने आई हाईटैक मिलावट... 

कोई खाद्य नहीं, जो पूरी तरह शुद्ध:
आपके घर की खाने की थाली मिलावटियों के चंगुल में है. जी हां, प्रदेश में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थ घर-घर पहुंच रहे हैं. दाल, घी जैसी रोजमर्रा की चीजें भी मिलावट से अछूती नहीं रही हैं. चिकित्सा विभाग के पिछले दिनों शुरू किए गए शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के दौरान ऐसी कोई चींज नहीं जिसमें मिलावट नहीं पकड़ी गई हो. हालांकि अब राज्य सरकार जल्द ही राइट टू हेल्थ कानून लाने जा रही है, लेकिन चिंता की बात ये है कि जिस तरह से मिलावटखोर फील्ड में जड़े जमा चुके है, उन्हें शायद किसी का खौफ नहीं है. आइए आपको बताते है कि पिछले सालों में मिलावटखोरों पर क्या कार्रवाईयां की गई.

पिछले सालों की कार्रवाईयां:
साल                  जांच         सैम्पल        सब स्टेण्डर्ड    मिस ब्राण्ड    अनसेफ 

वर्ष 2015          25191       8735          1263            584            357
वर्ष 2016          17286       7284           773             658            240 
वर्ष 2017          15062       7687           1124           616             291
वर्ष 2018          11952       5858           740             361             259
वर्ष 2019(मार्च तक)2424     1956           145             80               94 

किस तरह मिलावटखोर है फील्ड में सक्रिय:
- केसारी दाल :
राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत कई प्रदेशों में केसारी दाल प्रतिबंधित है. पांच रुपए किलो में मिलावटखोर यह दाल लाकर दूसरी दाल में मिलाकर राजस्थान में धडल्ले से बेचते है, लेकिन कार्रवाईयों में खुलासे के बाद अब केसारी दाल की खेप को पिसवाकर बेसन के रूप में खपाया जा रहा है.
- मावा : मावे में 30 फीसदी कम से कम फेट होना चाहिए, लेकिन अब मिलावटियों ने "मीठे मावे" पर दांव खेलना शुरू कर दिया है. मीठा मावा फूड सेफ्टी एक्ट में मिठाई श्रेणी आता है, इसके लिए उसके मापदण्ड अलग हो जाते है. चीनी मिलने के बाद कई बार मिलावटी मावे के सैम्पल पास हो जाते है. 
- ड्राई फ्रूटस : बादाम की बड़ी घटिया खेप को मिलावटखोर पेस्ट के जरिए चमकाकर महंगे दाम पर बेचते है, लेकिन अब हेण्डी मशीनों के जरिए घटिया बादाम पर ऐसे कोटिंग की जा रही है कि उसे पकड़ पाना काफी मुश्किल है.
- मसाले : कमोबेश हर तरह के मसालों में रंग मिलाकर मिलावट की जा रही है. मिर्च में गेहूं की चापड और सिथेटिक कलर मिलाया जाता है. धनिये में डण्ठल पिसकर मिलाने का खेल चल रहा है तो हल्दी में घटिया चावल के बुरादे को पिसकर उपयोग में लिया जाता है.

सरकार काफी गंभीर:
सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा मिलावटखोरी के प्रति काफी गंभीर है. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ये है कि सरकार ने सत्ता में आते ही राइट टू हेल्थ की दिशा में काम शुरू किया है. जल्द ही प्रदेश में यह कानून लागू होने जा रहा है. अब देखना ये होगा कि फील्ड में फैले मिलावट के मक्कडजाल को ये कानून कितना रोक पाता है.

... संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट 

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