जैसलमेर जैसलमेर सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में शव के पोस्टमार्टम की अवैध वसूली

जैसलमेर सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में शव के पोस्टमार्टम की अवैध वसूली

जैसलमेर सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में शव के पोस्टमार्टम की अवैध वसूली

जैसलमेर: जिले के सबसे बड़े अस्पताल में पिछले कुछ समय से मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाने वाले परिजनों को स्वीपर को दो हजार रूपए देने का मामला सामने आया है. गौरतलब है कि मेडिकल रिलीफ सोसायटी द्वारा पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को 300 रूपए व स्वीपर को 100 रूपए देने का प्रावधान है. लेकिन गत कुछ समय पहले एकमात्र मेल स्वीपर के रिटायर होने के बाद बाहर से ही स्वीपर बुलाया जाता है. बाहर से आने वाला स्वीपर 2 हजार रूपए लेता है जिसका भुगतान मरीज के परिजनों से लिया जाता है. जिससे गरीब व आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के लोगों को पोस्टमार्टम करवाने के लिए 2 हजार रूपए का भुगतान करना पड़ता है.

जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे: 
हाल ही में एक युवक द्वारा आत्महत्या करने के बाद उसके परिजनों द्वारा स्वीपर को दो हजार रूपए का भुगतान किया गया. उस समय बदहवास परिजनों की यह स्थिति थी कि उनके पास दो हजार रूपए नहीं थे. जिस पर उन्होंने आस पास के लोगों से मांगकर दो हजार रूपए इकट्‌ठे किए और स्वीपर को दे दिए. अब यह मामला और बढ़ता जा रहा है. लेकिन जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं.

जिम्मेदार जानबूझकर अनजान बने हुए:
आमतौर पर उन शवों का ही पोस्टमार्टम करवाया जाता है जिनकी मौत दुर्घटना या संदिग्ध परिस्थितियों में होती है. उस पर पहले से परेशान परिजनों पर पोस्टमार्टम के बाद दो हजार रूपए देने का दबाव बनाया जाता है. जिससे अधिकांश परिजन पोस्टमार्टम करवाने से दूरी बनाते हैं. अस्पताल प्रबंधन को इस पूरे मामले की जानकारी है लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार जानबूझकर अनजान बने हुए है. जिससे इस प्रकार अवैध वसूली करने वालों को बल मिलता है.

अवैध वसूली होने से भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा:
वहीं पहले से परेशान परिजनों को और ज्यादा परेशान करने का काम किया जा रहा है. अस्पताल में इस प्रकार की अवैध वसूली होने से भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है. कई कर्मचारी भी इस प्रकार के अवैध वसूली के रास्ते खोजने शुरू हो जाते है. जिससे अन्य प्रकार के भ्रष्टाचार को बढ़ावा भी मिल रहा है. जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 

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