809वां उर्स: गरीब नवाज की दरगाह में संदल की रस्म को अदा किया, जन्नती दरवाजा भी खोला

809वां उर्स: गरीब नवाज की दरगाह में संदल की रस्म को अदा किया, जन्नती दरवाजा भी खोला

अजमेर: ख्वाजा गरीब नवाज के 809 वे उर्स की अनौपचारिक शुरुआत का आगाज हो चुका है. गरीब नवाज की दरगाह में संदल की रस्म को अदा किया गया और जन्नती दरवाजे को भी खोला गया. इस रस्म को आस्ताना मामूल होने के बाद निभाया जाता है उस समय दरगाह के खादिम द्धारा इस रस्म को निभाया जाता है. वहीं अल सुबह जन्नती दवाज़े को भी खोल दिया गया और जायरीनों की दरवाजे से निकलने की होड़ लगी रही. 

संदल की रस्म सिर्फ गरीब नवाज के उर्स में ही निभाया जाता है जो की गरीब नवाज की मजार के ऊपरी हिस्से पर लेप की तरह लगाया जाता है जो खादिमों द्वारा रोज पेश किया जाता है. उर्स के एक दिन पहले गरीब नवाज के उर्स के समय ही इसे गरीब नवाज के खादिमों द्धारा उतारा जाता है. इस संदल को उतारने के बाद इसे जायरीनों को बांटा जाता है जिसे पाने के लिए बाहर से आने वाले जायरीनों में होड़ सी मच जाती है. संदल की रस्म अदा होने के अल सुबह जन्नती दवाज़े को भी खोलने की रस्म अदा की गई. आज अगर रजब का चांद दिखाई देता है तो जन्नती दरवाजा खुला रहेगा अन्यथा यह दरवाजा रात को दरबार बन्द होने के साथ बन्द हो जाएगा और अगले दिन सुबह वापस खोल जाएगा जो 6 रोज तक खुला रहेगा.

जन्नती दरवाजे को साल में केवल चार बार ही खोला जाता है:
आज अलसुबह जन्नती दरवाजे को भी जायरीनों के लिए खोल दिया गया. जन्नती दरवाजे को साल में केवल चार बार ही खोला जाता है बकरा ईद, मीठी ईद, व इनके पिरेमुर्शिद के उर्स पर गरीब नवाज के उर्स में जन्नती दरवाजा पुरे उर्स में खुला रहता है. जब 4 बजे इस दरवाजे को खोला गया तो उस समय जायरीनों में इस दरवाजे से पहले निकलने को लेकर एक होंड सी मच गयी. ऐसा माना जाता है जो इस जन्नती दरवाजे से जो भी गुजरता है उसे जन्नत नसीब होती हैं. 

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