कोचिंगसिटी कोटा में हर तरफ जलतांडव, रिकॉर्ड बारिश के बाद सभी बांध ओवरफ्लो 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/14 08:11

कोटा: कोचिंगसिटी कोटा में हर तरफ जल का तांडव नजर आ रहा है. रिकॉर्ड बरसात के बाद अंचल की नदी-नालों से लेकर बड़े बांध तक ओवरफ्लो हो चुके हैं और बड़े बांधों के गेट खुलने से अचानक उफनी नदियां किनारे तोड़कर बस्तियों का रुख कर रही हैं. कोटा शहर में नगरनिगम के बचाव दलों ने करीब 250 पानी में फंसे लोगों को निकाला हैं. हालांकि गनीमत ये हैं कि इस जलतांडव के बीच अभी तक कोटा से किसी प्रकार की जनहानि की खबर नहीं हैं. खास रिपोर्ट:

सभी बांध पानी के आगे पस्त:
दरअसल ये आफत तो आनी ही थी, जब रिकॉर्ड 1350 एमएम बरसात ने कोटा में बीते कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं और इसके साथ ही हाड़ौती अपने जिन विशालकाय बांधों पर इठलाता हैं, उनमें से करीब-करीब सभी इस बारिश के पानी के आगे पस्त हो चुके हैं. गांधीसागर से लेकर कोटा बैराज तक इस सिरीज के सारे प्रमुख बांधों के सारे गेट अब खोलने पड़ गये हैं और इसके बाद कोटा शहर में हालात बाढ के बन गये हैं, लेकिन बांधों की स्थिति पर गौर करें तो देश के दूसरे सबसे बड़े जलाशय माने जाने वाले गांधीसागर बांध के सभी 19 गेट अगर 13 साल के बाद खोले गये हैं, तो फिर बाकी बांधों की तो क्या बिसात हैं. फर्स्ट इंडिया टीम द्वारा जुटायी ताजा जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश से लेकर हाड़ौती तक इस अंचल के बड़े बांधों का ताजा हाल कुछ इस तरह हैं.

S.N.   बांध का नाम          कुल गेट/खोले गये गेट   निकासी (क्यूसेक में)        भराव क्षमता        ताजा जलस्तर     
01.    गांधीसागर बांध           19/19                     5  लाख क्यूसेक               1312 फीट            1312 फीट
02.    राणाप्रताप सागर बांध   14/14                आवक की संपूर्ण निकासी       1157.5 फीट          1157.5 फीट
03.    जवाहरसागर बांध        12/12                 आवक की संपूर्ण निकासी        980 फीट             980 फीट
04.    कोटा बैराज                 19/19                  6 से 6.5 लाख क्यूसेक          854 फीट              853.5 फीट

जल की अधिकता से त्राहिमाम:
गांधीसागर ही नहीं बल्कि कोटा बैराज के लिये भी साल 2009 के बाद ये पहला मौका था, जब सभी 19 गेट खोलकर सारा संचित पानी चम्बल के हवाले करना पड़ रहा हैं. इस भारी जल निकासी के चलते कोटा शहर की गांवड़ी, हरिजन बस्ती, नयापुरा,कुन्हाड़ी, बालिता, भीमगंजमंडी, बापू बस्ती समेत करीब एक दर्जन बस्तियां पानी-पानी हो गयी हैं और कई कॉलोनियों में तो पानी पहली मंजिल तक चढने के समाचार हैं. ऐसे में कई जगह जुगाड़ की नावें और रबर ट्यूब लोगों का सहारा बन रही हैं. निचली बस्तियों के कुछ लापरवाह लोगों ने मुनादी के बावजूद घर नहीं छोड़े तो पानी मौत बनकर घरों-बस्तियों में घुसा और आखिरकार नगर निगम को ऐसे कई ईलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने पड़े. आलम ये था कि दुपहिया से लेकर चौपहिया वाहन तक पानी में डूबे पड़े हैं और कोचिंगसिटी की कई कॉलोनियों का जनजीवन जल की अधिकता से त्राहिमाम कर उठा हैं. 

इन हालातों के बीच प्रशासन हाईअलर्ट पर:
हालांकि कोटाबैराज से पानी की निकासी का दौर तो पांच दिनों से जारी हैं, लेकिन थोड़ी-थोड़ी तादाद में बढायी जा रही निकासी से हालात इतने नहीं बिगड़े थे, लेकिन जब मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान के हाड़ौती अंचल तक का सारा पानी चम्बल में आये और इस अंचल के चारों बड़े बांधों के इंजीनियर हाथ खड़े करके सारे गेट ही खोलकर बैठ जाये तो फिर जलतांडव के अलावा और क्या होगा. बहरहाल कोटा में इन हालातों के बीच प्रशासन हाईअलर्ट पर हैं और माधौपुर-धौलपुर और करौली जिला प्रशासनों को भी अलर्ट भेजा गया हैं, क्योंकि गांधीसागर से लेकर कोटाबैराज तक का ये सारा पानी चम्बल का जलस्तर बढाने वाला हैं और आगामी एक-दो दिनों में इन हालातों से राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही हैं. आलम ये हैं कि चम्बल के अलावा परवन, पार्वती, मेज, कालीसिन्ध, उजाङ और ब्राह्णी समेत अंचल की करीब सारी प्रमुख नदियां भी उफान मारती और किनारों को तोड़कर मचलती हुई बह रही हैं. 

... सचिन ओझा के साथ भंवर एस चारण की रिपोर्ट 

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