अंतरिम बजट पर बोले अरूण जेटली, कहा - आयकर छूट से मजबूत होगी मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/01 09:05

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि बजट में पांच लाख रुपए तक की आय पर आयकर माफ करने के सरकार के निर्णय से देश के मध्यम वर्ग को फायदा होगा। जेटली ने फेसुबक पर एक पोस्ट में लिखा कि वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा अंतरिम बजट में की गई इस महत्वपूर्ण घोषणा से मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ेगी। बता दें कि जेटली अभी इलाज के लिये अमेरिका गए हुए हैं और उनकी जगह अभी पीयूष गोयल वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। जेटली की अनुपस्थिति में गोयल ने ही लोकसभा में शुक्रवार को 2019-20 का अंतरिम बजट पेश किया था।

अरूण जेटली ने कहा अपनी फेसबुक पोस्ट्स के माध्यम से कहा कि 'पीयूष गोयल ने आज एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें पांच लाख रुपए तक कमाने वालों को आयकर से छूट दे दी गई है। इससे देश के मध्यम वर्ग को उल्लेखनीय लाभ होगा, जिनकी क्रय शक्ति देश के भविष्य के लिये मायने रखता है। उन्होंने कहा कि इस बजट ने उस नीतिगत दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ तैयार किया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश को दिया है।

जेटली ने एक के बाद एक ट्वीट भी करते हुए कहा कि 'यह बजट बिना किसी शक के वृद्धि के अनुकूल, राजकोषीय नियंत्रण को बढ़ावा देने वाला, किसान हितैषी, गरीब हितैषी और भारतीय मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को बढ़ाने वाला है।' उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2019 के बीच सारे बजट मध्यम वर्ग को राहत देने वाला रहा है। जेटली ने कहा कि यह बजट खर्च को बढ़ावा देने के साथ ही राजकोषीय स्थिति को नियंत्रण में रखने वाला है। उन्होंने कहा कि यह अंतरिम बजट सरकार के समक्ष पिछले पांच साल के कामकाज की समीक्षा करने और अपने प्रदर्शन को लोगों के सामने रखने का अवसर भी रहा।

जेटली ने कहा कि चुनावी साल में पेश अंतरिम बजट में एक सीमित अवधि के लिए लेखानुदान को मंजूरी मिली है और चुनाव के बाद सरकार अर्थव्यवस्था की आगे की दिशा तय करेगी। हमारे पास 2009 और 2014 के उदाहरण हैं, जब अंतरिम बजट में कराधान में महत्वपूर्ण बदलाव किये गये। उन्होंने रोजगार सृजन पर जारी विवाद को लेकर आश्चर्य जाहिर करते हुए कहा कि बिना रोजगार सृजन के देश की अर्थव्यवस्था पिछले पांच साल से 7.5 प्रतिशत की औसत दर से कैसे वृद्धि कर रही है।

जेटली ने कहा कि पिछले पांच साल में जीडीपी की 7.5 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर देखी गई है। क्या यह संभव है कि नियंत्रित मुद्रास्फीति के साथ उच्च वृद्धि दर के बाद भी रोजगार सृजन नहीं हुआ हो। उन्होंने ईपीएफओ संख्या समेत विभिन्न आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इनसे रोजगार सृजन के संकेत मिलते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में रोजगार सृजन नहीं हुआ होता तो देश में भारी सामाजिक उथल-पुथल देखने को मिलता।

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