देहरादून राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- भारत में कुष्ठ रोगियों के प्रति मानसिक अस्पृश्यता का रवैया अब भी कायम

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- भारत में कुष्ठ रोगियों के प्रति मानसिक अस्पृश्यता का रवैया अब भी कायम

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- भारत में कुष्ठ रोगियों के प्रति मानसिक अस्पृश्यता का रवैया अब भी कायम

देहरादून: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि संविधान ने आजादी के बाद जाति और धर्म आधारित छुआछूत का अंत कर दिया है, लेकिन भारत में कुष्ठ रोगियों के प्रति मानसिक अस्पृश्यता का रवैया अब भी कायम है. राष्ट्रपति ने हरिद्वार में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के रजत जयंती समारोह के समापन भाषण में कहा कि कुष्ठ रोग और बीमारी से पीड़ित लोगों के बारे में भारतीय समाज में अब भी कई गलत और अवैज्ञानिक धारणाएं प्रचलित हैं.

कोविंद ने मिशन के संस्थापक आशीष गौतम को ऐसे कई मिथकों को तोड़ने की दिशा में सराहनीय कार्य करने का श्रेय देते हुए कहा कि देश में अनेक लोग अब भी महसूस करते हैं कि कुष्ठ एक अभिशाप है जो पिछले पापों का परिणाम है. उन्हें यह नहीं पता कि यह किसी अन्य बीमारी की तरह ही है.” राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा कि जो लोग कुष्ठ रोगियों को तुच्छ समझते हैं, वे वास्तव में स्वयं बीमार हैं. गांधी ने यह भी माना कि स्वयं को जानने का सबसे अच्छा तरीका मानवता की सेवा के लिए खुद को समर्पित करना था. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी व्यक्तिगत रूप से कुष्ठ से पीड़ित अपने मित्र, संस्कृत के विद्वान, कवि और स्वतंत्रता सेनानी परचुरे शास्त्री के प्रति समर्पित थे. कोविंद ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने आजादी के बाद जाति और धर्म आधारित अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया. उन्होंने इस प्रथा को एक दंडनीय अपराध भी बना दिया, लेकिन कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के प्रति मानसिक अस्पृश्यता का रवैया अभी भी हमारे देश में बना हुआ है. हमें संवेदनशील नहीं कहा जा सकता है, जब तक हम राष्ट्र या समाज से उस रवैये को समाप्त नहीं कर देते.’’

उन्होंने कहा कि इस अवसर ने मिशन के साथ उनके 25 साल लंबे जुड़ाव की यादें ताजा कर दी हैं. उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि कैसे एक छोटी सी झोपड़ी में मिशन शुरू हुआ था और मुझे यह देखकर खुशी हुई कि 25 साल पहले जो बीज बोया गया था, वह आज एक बड़े पेड़ में तब्दील हो गया है. उस बीज को बोने में मेरी भी एक छोटी भूमिका थी. उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गरीबों और बीमारों की सेवा करना धर्म का सर्वोच्च रूप है. राज्यपाल ने आशीष गौतम को “स्वामी विवेकानंद का सच्चा अनुयायी” बताते हुए कहा कि कुष्ठ रोगियों की सेवा करने का विकल्प चुनकर उन्होंने असाधारण इच्छा शक्ति और संकल्प का परिचय दिया था. योग गुरु रामदेव ने कुष्ठ रोगियों की नि:स्वार्थ सेवा के लिए मिशन के संस्थापक को भारत रत्न दिये जाने की सिफारिश की. सोर्स- भाषा

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