चुनावों से पहले मोदी सरकार का बड़ा दाव, राममंदिर जमीन विवाद मामले में SC में दायर की अर्जी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/29 12:11

नई दिल्ली। लंबे समय समय से चले आ रहे राम जन्म-भूमि विवाद मामले में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मोदी सरकार ने SC में गैर विवादित ज़मीन सरकार को लौटाने की अर्जी दी है।अपनी अर्जी में सरकार ने 67 एकड़ जमीन में से कुछ हिस्सा सौंपने को लेकर अर्जी दी है। यह 67 एकड़ जमीन 2.67 एकड़ विवादित जमीन के चारो तरफ स्थित है। सरकार के इस फैसले का हिंदूवादी संगठनों और विश्व हिंदू परिषद् ने स्वागत किया है।

बतादें, आज सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर-बाबरी विवाद पर सुनवाई होनी थी। लेकिन नयी संवैधानिक बेंच के जस्टिस एस. ए. बोबडे के मौजूद नहीं होंने के कारण आज की सुनवाई टाल दी गई।राम मंदिर को लेकर शिवसेना और विश्व हिंदू परिषद मोदी सरकार को लागातार घेर रही हैं ऐसे में सरकार का ये कदम चुनावी साल में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मालू़म हो, साल 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने 2010 के फ़ैसले में अयोध्या की 2.77 एकड़ ज़मीन सुन्नी वक़्फ बोर्ड, र्निमोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बांटने का फ़ैसला दिया था।

गौरतलब है कि 1993 में केंद्र सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण अधिनियम बनाकर विवादित भूमि और उसके आसपास की जमीन का अधिग्रहण किया था। साथ ही इससे पहले से जमीन विवाद को लेकर दाखिल सभी याचिकाओं को खत्म कर दिया था। सरकार द्वारा बनाए गए इस अधिनियम को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी। तब सुनवाई के दौरान अदालत ने 1994 में तमाम दावेदारी वाली अर्जियों को बहाल कर दिया था।

विवादित ढांचे के मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी का कहना था कि 1993 में जब अयोध्या अधिग्रहण अधिनियम लाया गया था तब उसे अदालत में चुनौती दी गई थी। अदालत ने तब यह व्यवस्था दी थी कि अधिनियम लाकर अर्जियों को खत्म करना गैर संवैधानिक है।
 

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