लखनऊ अयोध्या मामले पर रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड, मस्जिद की जमीन पर चर्चा नहीं

अयोध्या मामले पर रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड, मस्जिद की जमीन पर चर्चा नहीं

अयोध्या मामले पर रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड, मस्जिद की जमीन पर चर्चा नहीं

लखनऊ: अयोध्या मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक हुई. बैठक में 7 में से 6 सदस्यों ने रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं करने की बात कही. हालांकि, इस बात पर कोई चर्चा नहीं हुई कि मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन ली जाएगी या नहीं. इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 17 नवंबर को बैठक कर 5 एकड़ जमीन को शरीयत के खिलाफ बताया था.

मस्जिद की जमीन को लेकर बैठक में कोई बातचीत नहीं हुई: 
आज हुई सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में केवल एक सदस्य अब्दुल रज्जाक पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के पक्ष में थे, लेकिन बोर्ड ने 6-1 के बहुमत से पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का फैसला किया. मस्जिद की जमीन को लेकर बैठक में कोई बातचीत नहीं हुई. अगली बैठक में बोर्ड इस पर चर्चा करेगा. अब्दुल रज्जाक ने कहा कि जमीन के मामले पर अभी फैसला नहीं हुआ, जब सरकार ऑफर करेगी तब फैसला होगा.

अगली बैठक में जमीन लेने या ना लेने पर विचार किया जाएगा: 
बैठक में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफ़र फारूकी, अब्दुल रज्जाक, अदनान फारुख शाह, खुशनूद मियां, जुनैद सिद्दीकी, मोहम्मद जुनीद और मोहम्मद अबरार अहमद मौजूद थे. वहीं, एक सदस्य इमरान माबूद खान ने इस बैठक का बहिष्कार कर दिया था. बताया जा रहा है कि अगली बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दी गई 5 एकड़ जमीन लेने या ना लेने पर विचार किया जाएगा. इतना ही नहीं जमीन का प्रस्ताव पूरी तरह ठुकराने की जगह 5 एकड़ जमीन पर हॉस्पिटल या एजुकेशन इंस्टीट्यूट बनाने को लेकर मिल रहे सुझावों पर विकल्प के तौर पर अगली बैठक में पेश किया जाएगा.

सुन्नी वक्फ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान लेना चाहिए: 
सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी पहले ही अपनी राय रख चुके हैं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान लेना चाहिए. हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रिव्यू पिटीशन में जाने के बाद अब सुन्नी वक्फ बोर्ड भी दो खेमों में बंट चुका है. एक खेमा खुलकर पिटीशन दाखिल करने के पक्ष में है, जबकि दूसरे कई लोग इस मामले को आगे ले जाने के पक्ष में नहीं हैं.

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