आंकड़ों का आधार बना इस गांव की छात्राओं के भविष्य की राह में रोड़ा

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/03/30 04:15

चितलवाना (जालोर)। भले ही देश और प्रदेश की सरकारें 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' के नारे के साथ महीला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती हों, लेकिन इस गांव की स्थिति देखकर हकीकत कुछ और ही बयां करती है। महिला शिक्षा की बढ़ावा देने के लिए भले ही सरकार की ओर से लाख जतन किए जा रहे हैं, लेकिन यहां के हालात देखकर सरकार के तमाम दावे और प्रयास खोखले साबित होते दिखाई देते हैं।

जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं जालौर जिले की चितलवाना तहसील में आने वाले कुंडकी गांव की, जहां सन् 1982 में स्थापित स्कूल को क्रमोन्नत नहीं किए जाने के कारण यहां की लड़कियों को स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पिछले 36 वर्षों से कुंडकी में ये स्कूल संचालित है और वर्तमान की बात की जाए तो यहां कुल 140 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं।

हाल में ही में शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में स्कूल क्रमोन्नत के लिए छात्र संख्या का मानदंड बताकर सैकड़ों स्कूलों को उच्च प्राथमिक से माध्यमिक में क्रमोन्नत किया है। गांव वालों और विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी इस स्कूल के क्रमोन्नत होने का बेसब्री से इंतजार था, लेकिन विधानसभा में हुई घोषणा में इस स्कूल का नाम तक नहीं लिया गया। हालांकि अभी तक शिक्षा विभाग ने सूची जारी नहीं की है, लेकिन सांचौर विधायक सुखराम बिश्नोई से बात करने पर बताया गया कि हाल ही में क्रमोन्नत होने वाले स्कूलों की सूची में कुंडकी स्कूल का नाम नहीं है।

आपको बता दें कि शिक्षा विभाग ने क्रमोन्नत होने वाले विद्यालयों के लिए 8वीं कक्षा में 30 बच्चों व स्कूल में 150 का नामांकन अनिवार्य होने वाली प्रणाली को साथ में लिया है। ऐसे में उन बच्चों के भविष्य का क्या होगा, जिस स्कूलों में 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 30 से कम है। पिछले 5 सालों से बच्चे और अभिभावक भी इसी आस में हैं कि ये स्कूल 10वीं तक हो जाए तो यहां की बच्चियों का भविष्य संवर सके। लेकिन आकंडों के आधार पर स्कूल का चयन इनके भविष्य में रोड़ा साबित हो रहा है।

आंकडों के आधार पर स्कूल का क्रमोन्नत करना भले ही शिक्षा विभाग को रास आ रहा हो, लेकिन इन आकंडों ने जाने कितनी ही छात्राओं को शिक्षा से वंचित कर दिया है, जो आगे की पढ़ाई करना तो चाहती है, लेकिन स्कूल के 10वीं तक नहीं होने के कारण और घर से दूर नहीं जा पाने के चलते मजबूरन शिक्षा से दूर होना पड़ता है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प हो गया है कि शिक्षा विभाग के लिए अपने आंकड़े महत्वपूर्ण है या फिर देश का भविष्य बनने वाली इन छात्राओं का भविष्य।

4 किलोमीटर की परिधि में 3 स्कूल माध्यमिक, यहां एक भी नहीं :
गौरतलब है कि इस गांव के नजदीक अन्य गांवों में चार किलोमीटर की परिधि में ही तीन स्कूल माध्यमिक है। इनमें वीरावा ग्राम पंचायत के वीरावा में माध्यमिक स्कूल है, हालीवाव में उच्च माध्यमिक स्कूल है, वहीं हाल ही में मेघावा को भी माध्यमिक में क्रमोन्नत कर दिया है। अब मजे की बात तो यह है कि ये तीनों स्कूल चार किलोमीटर की परिधि में है। वहीं कुंडकी से हालीवाव 8 किमी, कुंडकी से मेघावा 8 किमी व कुंडकी से वीरावा 10 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन कुंडकी को क्रमोन्नत नहीं किया गया है।

एक भी लड़की नहीं सरकारी नौकरी में :
वहीं चिंताजनक बात यह है कि इस गांव से आज तक एक भी लड़की सरकारी नौकरी में नहीं लग सकी है। क्योकि गांव में 8वीं तक ही स्कूल है और इसके बाद परिजन 8 किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं। इसलिए सरकारी नौकरी तो दूर की बात यहां तो लड़कियां 8वीं के बाद आगे की पढ़ाई भी नहीं कर पाती है। अगर कोई धनाढ्य परिवार से है तो वह किसी अन्य शहर में जाकर पढ़ाई कर पाती है। 

सपना ही बनकर रह जाएगा उच्च शिक्षा का अरमान :
चितलवाना उपखंड के ग्राम पंचायत मुख्यालय वीरावा पर स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय वीरावा में 80 प्रतिशत संख्या छात्राओं की है, लेकिन 10वीं के बाद यही छात्राएं स्कूल नहीं जा पाएगी। क्योंकि सीनियर स्कूल यहां से सात किलोमीटर दूर है, वहीं सात किलोमीटर भी पैदल जाना पड़ेगा। क्योंकि इस मुख्यालय पर बस तो क्या, दूसरे साधन भी कभी—कभार ही चलते हैं। बस का तो गांव वालों ने मुंह भी नहीं देखा। तो आखिर यह बालिकाएं 10वीं पास करके क्या करेगी, क्योंकि उनके मन में उच्च शिक्षा का सपना केवल सपना बनकर ही रहेगा। इस विद्यालय मे 400 विद्यार्थियों का नामांकन है। 10वीं कक्षा में कुल 51 विद्यार्थी हैं, जिनमें 27 बालिकाएं हैं। वहीं 9वीं कक्षा में भी 53 विद्यार्थियों में से 38 छात्राएं हैं।

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